गोलागोकर्णनाथ खीरी: ‘यह मकान बिकाऊ है योगी सरकार में कोई हिंदू सुरक्षित नहीं है’
अमृत विचार, गोलागोकर्णनाथ खीरी। थाना हैदराबाद क्षेत्र के ग्राम भल्लिया बुजुर्ग में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। यह स्थित गांव में अल्पसंख्यक समुदाय के एक प्रधान के जीत जाने के बाद से उत्पन्न हुई है। पराजित समुदाय के लोग इतना पीड़ित है कि उन्होंने अपने मकानों पर मकान बेचने और पलायन करने …
अमृत विचार, गोलागोकर्णनाथ खीरी। थाना हैदराबाद क्षेत्र के ग्राम भल्लिया बुजुर्ग में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। यह स्थित गांव में अल्पसंख्यक समुदाय के एक प्रधान के जीत जाने के बाद से उत्पन्न हुई है। पराजित समुदाय के लोग इतना पीड़ित है कि उन्होंने अपने मकानों पर मकान बेचने और पलायन करने के लिए पोस्टर चिपका दिए हैं।
पीड़ित समुदाय के लोगों का कहना है उनके घरों पर अक्सर पथराव होता रहता है। घर में खाना बनाना और रहना मुश्किल काम हो गया है। ऐसी स्थिति में वह गांव से पलायन करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। उधर पुलिस ने गांव में पहुंचकर शांति बहाली के लिए पीड़ित लोगों को समझाने का काम शुरू कर दिया है लेकिन पीड़ित लोगों का कहना है कि वह दहशत के माहौल में आखिर कब तक जिएंगे।
ग्रामवासी रामअवतार पासी मैकूलाल पासी, सनी पासी, विजयपाल पासी आदि बहुत से ग्रामीणों ने अपनी दीवारों पर मकान बिकाऊ है के पोस्टर लगाते हुए कहा है कि योगी सरकार में भी हिंदू सुरक्षित नहीं है। गांव में इस तरीके के पोस्टर लगाए जाने की खबर मिलते ही पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया।
खबर पाकर थानाध्यक्ष हैदराबाद अजय शर्मा ने मौके पर पहुंचकर पोस्टर हटवाए और पीड़ित परिवारों को समझाने का प्रयास किया और कहा कि तुम यह कहो कि हमें कोई दिक्कत नहीं है पुलिस तुम्हारी सुरक्षा करेगी। थानाध्यक्ष ने कुछ ग्रामीणों पर दबाव डालकर वीडियो भी बनाया और मीडिया को उपलब्ध कराया।
वहीं दूसरी ओर ग्रामवासी रामअवतार पासी ने अमृत विचार को फोन पर बताया कि उन्होंने अपने मकान पर मकान बेचने के लिए पोस्टर खुद लगाया हुआ है। वह लोग विजयी प्रधान पक्ष के लोगों से पीड़ित हो चुके हैं। अक्सर उनके घरों पर पथराव होता है। घरों में खाना खाना, खाना बनाना मुश्किल काम हो गया है। ऐसी हालत में वह गांव में किस तरीके से रहेंगे।
उन्होंने बताया कि गांव में लगभग 4000 की आबादी है। जिनमें 70% अल्पसंख्यक समुदाय के लोग निवास करते हैं और 30% हिंदू समुदाय के लोग रहते हैं। जिन पर अब अल्पसंख्यक समुदाय के लोग कहर बनकर टूट रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस दबाव डालकर लोगों का बयान बदलवाने का काम कर रही है। जबकि इससे कोई काम चलने वाला नहीं है। अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के हौसले बुलंद हैं । ऐसी स्थिति में वह लोग गांव में किस तरीके से निवास कर सकते हैं।
वहीं एक और पीड़ित परिवार मैकूलाल पासी की पुत्रवधू आरती देवी पत्नी अरविंद ने फोन पर अमृत विचार को बताया कि उनके घरों में अक्सर पत्थर की बरसात होने लगती है। विपक्षी जीने नहीं देना चाहते हैं। आरती ने बताया कि दो-तीन वर्ष पहले ब्याह के वह इस गांव में आई है। अब इस गांव में जीना हराम हो गया है इसलिए उनके परिवार वाले गांव में मकान बेचकर कहीं दूसरी जगह भाग जाना चाहते हैं।
उधर थानाध्यक्ष हैदराबाद अजय शर्मा का कहना है कि ऐसी कोई बात नहीं है। गांव में किसी ने साजिशन पोस्टर लगाए हैं और गांव में कोई तनाव की स्थिति नहीं है। हर समुदाय के लोगों को सुरक्षा प्रदान करना पुलिस का कर्तव्य है। गांव में पुलिस तैनात कर दी गई है। कोई भी अप्रिय घटना घटती है तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि पुलिस के दबाव के बाद एक दो ग्रामीणों ने यह भी बयान दिया है कि उनकी दीवार पर पोस्टर चिपकाए गए हैं परंतु अधिकांश ग्रामीणों का कहना है कि पोस्टर उन्होंने स्वयं लगाए हैं और वह लोग रोज-रोज की पत्थरबाजी से परेशान हो चुके हैं और पुलिस विपक्षियों पर कोई अंकुश नहीं लगा पा रही है। गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
अमृत विचार अखबार ने पहले भी इस गांव में विजय जुलूस निकाले जाने पर हुए बवाल में इस बात के संकेत दिए थे कि दो समुदाय के लोग होने के कारण गांव में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है और पुलिस को सावधानी बरतनी चाहिए परंतु पुलिस ने इस सुझाव को अनदेखा किया जिसका परिणाम अब सामने है कि गांव में पूरी तरीके से तनावपूर्ण स्थिति बन गई है।
