बरेली: कोरोना संक्रमित निजी कोविड अस्पतालों में भी करा सकेंगे मुफ्त इलाज, जानें कैसे?

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बरेली,अमृत विचार। सरकारी अस्पताल, सरकारी मेडिकल कॉलेज, निजी मेडिकल कॉलेज में बेड व वेंटिलेटर की उपलब्धता न होने पर गंभीर संक्रमित मरीज निजी अस्पतालों में अपना बेहिचक उपचार करा सकेंगे। इसके लिए उन्हें इंटीग्रेटेड कोविड कमांड सेंटर से एक प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। जिसके आधार पर वह निजी कोविड अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले …

बरेली,अमृत विचार। सरकारी अस्पताल, सरकारी मेडिकल कॉलेज, निजी मेडिकल कॉलेज में बेड व वेंटिलेटर की उपलब्धता न होने पर गंभीर संक्रमित मरीज निजी अस्पतालों में अपना बेहिचक उपचार करा सकेंगे। इसके लिए उन्हें इंटीग्रेटेड कोविड कमांड सेंटर से एक प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। जिसके आधार पर वह निजी कोविड अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले सकेंगे।

कोरोना महामारी के दौर में सरकारी अस्पतालों में मरामारी मची हुई है। कहीं पर बेड नहीं मिल रहा है तो कहीं पर वेंटीलेटर, आईसीयू भी खाली नहीं मिल रहे हैं। यह हाल पूरे प्रदेश का है। जिसको लेकर अब मुख्य कार्यपालक अधिकारी आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना संगीता सिंह ने निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों से संक्रमित मरीजों को काफी राहत मिलेगी। निजी कोविड अस्पतालों में उन्हें भर्ती कर उपचार करना होगा। उपचार में आने वाला खर्च आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य के तहत किया जाएगा। उपचार में आने वाले खर्च को अस्पताल प्रबंधन सीएमओ को भेजेंगे। जिसके बाद बिल सत्यापित कर अस्पताल को भुगतान किया जाएगा।

सरकारी लाभ के लिए इन दस्तावेजों की जरूरत
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कोरोना संक्रमित मरीजों का भुगतान होगा। इसके लिए इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर का रेफर प्रमाण पत्र, भर्ती की तिथि, डिस्चार्ज की तिथि, मरीज किस यार्ड (रूटीन, एचडीयू, आईसीयू, आईसीयू वेंटीलेटर के साथ) में भर्ती हुआ इसका विवरण, अस्पताल का बैंक खाता, आईएफएससी कोड समेत देना होगा। जिसके बाद बिल सत्यापित कर भुगतान किया जाएगा।

निजी कोविड अस्पतालों के लिए निर्धारित फीस
रूटीन वार्ड- 1800 रुपए प्रतिदिन
एचडीयू- 2700 रुपए प्रतिदिन
आईसीयू- 3600 रुपए प्रतिदिन
आईसीयू विद वेंटिलेटर- 4500 रुपए प्रतिदिन

“सरकारी अस्पतालों में बेड न होने पर आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत संक्रमित मरीजों का निजी कोविड अस्पतालों में उपचार किया जाएगा। इसके लिए आईसीसीसी कमांड से प्रमाण पत्र जारी होगा। इसके लिए उन्हें वेब लिंक सीपी डाट आयुष्मानयूपीडाटइन पर मरीज की जानकारी अपलोड करनी होगी। इसी के आधार पर सत्यापन कर मरीज के उपचार में आए खर्चे का भुगतान किया जाएगा।” -डॉ.एसके गर्ग, मुख्य चिकित्सा अधिकारी

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