पंचायत ड्यूटी में कोरोना से रामपुर के 17 शिक्षकों की मौत, प्रशासन ने नहीं ली आश्रितों की सुध

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Edited By Amrit Vichar
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रामपुर, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पूरे प्रदेश में काफी शिक्षकों की मौत हुई है। इसमें रामपुर जिले के करीब 17 शिक्षकों की ड्यूटी करने के बाद मौत हो चुकी है, जिसमें किसी का बेटा, किसी का पिता और किसी का सुहाग उजड़ गया। लेकिन इन मृतकों के परिजनों की …

रामपुर, अमृत विचार। कोरोना संक्रमण में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पूरे प्रदेश में काफी शिक्षकों की मौत हुई है। इसमें रामपुर जिले के करीब 17 शिक्षकों की ड्यूटी करने के बाद मौत हो चुकी है, जिसमें किसी का बेटा, किसी का पिता और किसी का सुहाग उजड़ गया। लेकिन इन मृतकों के परिजनों की अभी तक प्रशासन ने सुध नहीं ली है।
इन लोगों को अब परिवार तक चलाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

शासन स्तर से लेकर जिला प्रशासन तक अब तक कोई सुविधा नहीं मिल रही है। इन लोगों का एक-एक दिन बहुत मुश्किल से कट रहा है। जिलेभर के सभी शिक्षक संघ ने कई बार मुद्दे तक उठाए है। कई मृतक शिक्षकों की पत्नियों का रो-रोकर बुरा हाल है। अमृत विचार से हुई बातचीत में मृत शिक्षकों के आश्रितों ने अपना दर्द बयां किया। पेश हैं उनसे बातचीत के मुख्य अंश…।

मृतक शिक्षक दिनेश चंद्र सागर के बेटे प्रशांत कुमार ने कहा कि पिता शिक्षक होने के नाते 15 अप्रैल को पंचायत चुनाव में डूयटी करने गए थे। वहां से आने के बाद कोरोना संक्रमित हो गए थे। 2 मई को उनकी मौत हो गई। उसके बाद से शासन की ओर से अभी तक किसी तरह की कोई सुविधा नहीं मिली है। तभी से मां भी बीमार चल रही हैं।

मृतक शिक्षक राम मूरत सिंह की पत्नी पूजा ने कहा कि हमारे पति चुनाव में ड्यूटी करने गए थे । वे डयूटी से वापस आए तो बीमार होकर आए। जब उनका चेकअप कराया गया तो वह कोरोना संक्रमित निकले। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। अब उनको पालन भी भारी पड़ रहा है। अधिकारियों की ओर से कोई सुविधा अभी तक नहीं मिली है।

मृतक शिक्षक रामवीर सिंह शिक्षामित्र की पत्नी आशा देवी ने कहा कि पंचायत चुनाव के दौरान 15 अप्रैल को पति ड्यूटी करने गए थे। उसके बाद आकर वे बीमार हो गए थे। यहां उनकी जांच कराई तो वह कोरोना संक्रमित थे। अब तक शासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली है। वे घर में अकेले कमाने वाले थे। तीन बेटियां हैं। अब इनके साथ गुजारा कैसे होगा।

मृतक शिक्षक जयपाल सिंह का पुत्र राहुल श्रीवास्तव ने कहा कि त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव में पापा की डयूटी लगी थी। वहां से वापस आने के बाद वे बीमार हो गए थे। उसके बाद उनका इलाज कराया गया, लेकिन सुधार नहीं आया। 30 अप्रैल को उनकी मौत हो गई। लेकिन शासन और जिला प्रशासन स्तर से अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। प्रशासन को परिजनों के बारे में कुछ कदम उठाना चाहिए।

मृतक शिक्षक विवेक कुमार की पत्नी चांदनी ने कहा कि चुनाव डयूटी करने के बाद जब पति घर आए थे तो उनके गले में समस्या हो रही थी। चेकअप के बाद संक्रमित मिले थे। इलाज चल रहा था लेकिन, दो दिन पहले उनकी मौत हो गई। दो छोटे बच्चे हैं। लेकिन अभी विभाग की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही है। इतना ही नहीं बीमार के बाद भी पति की डयूटी मुरादाबाद में भी लगा दी गई थी।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ जिला अध्यक्ष कैलाश बाबू पटेल ने कहा कि शासन ने 4 दिन पूर्व सभी मृतकों के परिवार को 15 दिन में समस्त देयकों का भुगतान एवं आश्रित को सेवायोजित करने के निर्देश दिए हैं। अभी तक इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हैं। डाईआईओएस स्वयं या अपने किसी प्रतिनिधि द्वारा मृतकों के घर पर जाकर पेंशन और नियुक्ति के प्रपत्र पूर्ण कराएं और उन्हें पेंशन स्वीकृति आदेश व नियुक्ति पत्र दें।

शिक्षक बीमारी से जूझते रहे पर प्रशासन ड्यूटी लगाता रहा
रामपुर। देश भर में कोरोना जैसी बीमारी ने दस्तक दे रखी है। इसको देखते हुए मौजूदा समय में 24 मई तका लाकडाउन लगाया गया है। लेकिन अप्रैल में चार चरणों में शासन के आदेश पर त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव भी हुए थे। जिले में 15 अप्रैल को चुनाव और 2 मई को मतगणना हुई थी। 15 अप्रैल के चुनाव में ड्यूटी करने के बाद काफी शिक्षक बीमार हो गए थे। लेकिन प्रशासन ने बिना जानकारी किए काफी शिक्षकों की ड्यूटी मतगणना में भी लगा दी थी। इस बात की जानकारी मिलने के बाद शिक्षकों ने प्रार्थना पत्र देकर अधिकारियों को अवगत कराते रहे कि वे बीमार चल रहे हैं। लेकिन प्रशासन उनकी ड्यूटी लगाता चला गया। इसका नतीजा यह निकला कि बहुत से शिक्षकों की कोरोना संक्रमित होने के बाद मौत हो गई। लेकिन प्रशासन अपनी मनमानी पर उतार रहा। प्रशासन की लापरवाही से बहुत शिक्षकों को मौत की नींद सुला दिया।

 

 

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