मुरादाबाद में ब्लैक फंगस के दो और मरीज मिले, अब पीड़ितों की कुल संख्या हुई 11
मुरादाबाद, अमृत विचार। कोरोना काल में ब्लैक फंगस ने भी तबाही मचाना शुरू कर दिया है। इस बीमारी से महानगर में भी अब तक इसके नौ मामले सामने आ चुके हैं। बिलारी क्षेत्र में एक की मौत भी हो चुकी है। लेकिन अब पिछले 24 घंटे में फिर इस बीमारी के दो नए मामले सामने …
मुरादाबाद, अमृत विचार। कोरोना काल में ब्लैक फंगस ने भी तबाही मचाना शुरू कर दिया है। इस बीमारी से महानगर में भी अब तक इसके नौ मामले सामने आ चुके हैं। बिलारी क्षेत्र में एक की मौत भी हो चुकी है। लेकिन अब पिछले 24 घंटे में फिर इस बीमारी के दो नए मामले सामने आए हैं। अब पीड़ितों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है। मझोला और जामा मस्जिद क्षेंत्रों के व्यक्तियों में इसकी पुष्टि की गई है।
नेत्र रोत्र विशेषज्ञ डा. गिरजेश केन का कहना है कि कोरोना से पीड़ित हुए 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में यह संक्रमण सबसे अधिक पाया जा रहा है। इससे पहले भी इस बीमारी के नौ मामले सामने आ चुके हैं। उनके अनुसार साफ-सफाई पर ध्यान देकर तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता ठीक रखने से इसकी चपेट में आने से बचा जा सकता है।
स्टेरॉयड की वजह से हो रहा ब्लैक फंगस
कोरोनाग्रस्त रोगियों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं अब लोगों के लिए समस्या बन कर उभर रही हैं। डा. गिरजेश के अनुसार इस बीमारी में लोगों को स्टेरॉयड दिया जाता है, जिससे ब्लैक फंगस होने की संभावना अधिक हो जाती है। इसके साथ ही उनका कहना है कि अगर लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी है तो इससे आसानी से पार पाया जा सकता है।
एक-दूसरे के संपर्क में आने से नहीं होता संक्रमण
यह संक्रमण अधिकतर उन लोगों को चपेट में ले रहा है, जो कोरोनाग्रस्त होने के चलते लंबे समय तक ऑक्सीजन पर रहे हैं। इसके साथ ही यह संक्रमण एक-दूसरे के संपर्क में आने से नहीं फैल रहा है। अभी तक जनपद में जिन लोगों में भी इसकी पुष्टि हुई है। वे सब कोरोना से ग्रस्त रहे हैं।
प्रतिरोधक क्षमता कम होने से संक्रमण की चपेट में आ रहे लोग
डॉ. केन के अनुसार कोरोना संक्रमण में उपचार के दौरान दी जाने वाली दवाओं के कारण लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इस वजह से अधिकतर लोग ब्लैक फंगस की चपेट में आ रहे हैं। इस फंगस से बचने के लिए लोगों को साफ-सफाई के साथ ही खान-पान पर ध्यान रखना जरूरी है।
एसीएमओजीएस मारतोलिया ने बताया कि संक्रमित लोगों के उपचार के लिए स्टेरॉयड दिया जाता है। इस वजह से लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिस वजह से ब्लैक फंगस होने की संभावना बढ़ जाती है।
