मुरादाबाद : हरी-लाल बत्ती नहीं, हाथ के इशारे से चलता है शहर का ट्रैफिक
मुरादाबाद, अमृत विचार। प्रदेश का महत्वपूर्ण जिला होने के बाद भी मुरादाबाद की ट्रैफिक व्यवस्था आज भी ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के हाथों के इशारे पर चल रही है। हाईटेक दौर में भी पुलिसकर्मी ब्रिटिश शासनकाल के समय बनाए गए ट्रैफिक नियमों का पालन कर रहे हैं। कहने को तो शहर के प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक व्यवस्था …
मुरादाबाद, अमृत विचार। प्रदेश का महत्वपूर्ण जिला होने के बाद भी मुरादाबाद की ट्रैफिक व्यवस्था आज भी ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के हाथों के इशारे पर चल रही है। हाईटेक दौर में भी पुलिसकर्मी ब्रिटिश शासनकाल के समय बनाए गए ट्रैफिक नियमों का पालन कर रहे हैं। कहने को तो शहर के प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक व्यवस्था का संचालन करने के लिए नगर निगम द्वारा लाइटें लगवाई गई थीं। लेकिन देखरेख के अभाव में और सही प्लानिंग न होने के कारण वे ठप हो चुकी हैं। यह कहने में जरा भी गुरेज नहीं है कि आज भी शहर का ट्रैफिक हरी-लाल बत्ती के बजाय हाथ के इशारों से चलता है।
ट्रैफिक बढ़ा, नहीं बढ़े संसाधन
वक्त के साथ शहर का ट्रैफिक तो बढ़ा लेकिन संसाधनों का अभाव बना हुआ है। यही वजह है कि शहर की सड़कें अक्सर जाम की गिरफ्त में रहती है। आए दिन जाम से जूझ रहे लोगों को राहत देने के लिए कई प्लान बने। लेकिन, प्रभावी रूप से अमल में नहीं आ सके। आलम यह है कि लाकडाउन में भी महानगर की सड़कों पर रोजाना जबरदस्त ट्रैफिक रश देखने को मिल रहा है।
ट्रैफिक को रफ्तार देने के लिए लगी थी लाइट
शहर के ट्रैफिक को रफ्तार देने के लिए करीब आठ साल पहले पुलिस महकमे के अलावा नगर निगम द्वारा पहल की गई थी। हाईटेक तरीके से हरी-लाल बत्ती के जरिए ट्रैफिक का संचालन करने के लिए प्रमुख चौराहों को चिह्नित किया गया। सर्वे के बाद पीएसी तिराहा, पीलीकोठी, कपूर कंपनी, इंपीरियल तिराहा और डबल फाटक पर ट्रैफिक लाइट लगाने की योजना बनी। नगर निगम ने लाखों रुपये खर्च करने के बाद लाइट भी लगवा दी।
देखरेख के अभाव में खराब हो गई लाइटें
ट्रैफिक लाइट लगने के बाद उम्मीद जगी कि अब शहर के अंदर ट्रैफिक का संचालन हाईटेक तरीके से होगा। शहर के कांठ रोड की ओर आने वाले वाहन ट्रैफिक लाइट के इशारे पर संचालित होंगे। लेकिन, लंबा समय बीतने के बाद भी इन लाइटों का प्रयोग नहीं किया गया। नतीजा वक्त के साथ देखरेख के अभाव में यह लाइटें खराब हो गईं। मौजूदा समय में लाखों की लागत से बनीं सभी लाइटें शोपीस बनकर रह गई हैं। यही वजह है कि अभी भी पुलिस र्मियों के हाथों के इशारे से शहर का ट्रैफिक संचालित हो रहा है।
जानकारी में आया है लंबे समय से लाइटें खराब है। पहले चुनाव फिर कोरोना के कारण देरी हो रही है। उन्हें सही कराने के संबंध में संबंधित विभाग को पत्र भेजा जाएगा।-अशोक कुमार, एसपी ट्रैफिक
