बरेली: प्रतिष्ठित आयकर अधिवक्ता कृष्ण कुमार अग्रवाल का निधन
बरेली, अमृत विचार। प्रतिष्ठित आयकर अधिवक्ता और हिंदी एवं अंग्रेजी के वरिष्ठ लेखक कृष्ण कुमार अग्रवाल (के. कुमार) का 93 वर्ष छह महीने की आयु में शुक्रवार को निधन हो गया। वह कुछ समय से बीमार थे। रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में भर्ती रहने के दौरान कोरोना संक्रमण से मुक्त हो गए थे। रिपोर्ट …
बरेली, अमृत विचार। प्रतिष्ठित आयकर अधिवक्ता और हिंदी एवं अंग्रेजी के वरिष्ठ लेखक कृष्ण कुमार अग्रवाल (के. कुमार) का 93 वर्ष छह महीने की आयु में शुक्रवार को निधन हो गया। वह कुछ समय से बीमार थे। रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में भर्ती रहने के दौरान कोरोना संक्रमण से मुक्त हो गए थे। रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी। कृष्ण कुमार अग्रवाल अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनका जन्म 16 नवंबर 1927 को हुआ था। उन्होंने विज्ञान से स्नातक कर नौकरी के दौरान एमए अर्थशास्त्र की पढ़ाई की।
बाद में कानून की पढ़ाई कर आयकर विभाग के जाने माने प्रतिष्ठित अधिवक्ता बने। वह 1969 से आयकर बार एसोसिएशन बरेली के दो बार अध्यक्ष और बरेली कॉलेज गीता परिषद के प्रथम अध्यक्ष भी रहे। कृष्ण कुमार अग्रवाल आलोचक, कहानीकार, स्तंभकार, स्वतंत्र पत्रकार थे। सामाजिक और आर्थिक विषयों पर उनके लेख चर्चा में रहे। उनकी ‘मानवता की झांकी’ (2014) चर्चित पुस्तक थी। जिसमें विदेशी लेखकों की कुछ विश्व प्रसिद्ध कहानियों का हिंदी में (अंग्रेजी के माध्यम से) अनुवाद किया गया है।
‘भगवद गीता-विपश्यना साधना का दर्शन है’ (2008), और ‘भगवद गीता-विपश्यना की छाया में’ (2012) दोनों पुस्तकों को देश-विदेश के भारतीय दर्शन के विद्वानों द्वारा व्यापक रूप से सराहा गया है। उनके लेख बरेली, मुरादाबाद, लखनऊ, हल्द्वानी से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र ‘अमृत विचार’ के रविवारीय अंक ‘लोक दर्पण’ के ‘शब्द संसार’ में अक्सर पढ़ने को मिलते थे। वह बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के प्रथम कुलाधिपति (चांसलर) भी रहे हैं।
शाम को सिटी श्मशान भूमि पर उनका दाह संस्कार किया गया। बड़े बेटे बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति डा. केशव कुमार अग्रवाल ने मुखाग्नि दी। बरेली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के प्रति कुलाधिपति डा. अशोक कुमार अग्रवाल, डा. विपुल अग्रवाल, डा. वरुण अग्रवाल, डा. अर्जुन अग्रवाल, केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार व भाजपा नेता गुलशन आनंद समेत शहर के डाक्टर, उद्यमी आदि लोग श्मशान भूमि पहुंचे थे।
