बरेली: कोरोना के कारण बच्चों का सुरक्षा कवच प्रभावित
बरेली, अमृत विचार। इस साल अप्रैल और मई में जिले के नौनिहालों का टीकाकरण नहीं हो सका। अप्रैल में बच्चों का टीकाकरण जनवरी की तुलना में 25 फीसदी तक ही हो सका। मई में यह आंकड़ा तो और भी चौंकाने वाला है। मई में 20 फीसदी भी बच्चों का टीकाकरण नहीं हो सका। स्वास्थ्य विभाग …
बरेली, अमृत विचार। इस साल अप्रैल और मई में जिले के नौनिहालों का टीकाकरण नहीं हो सका। अप्रैल में बच्चों का टीकाकरण जनवरी की तुलना में 25 फीसदी तक ही हो सका। मई में यह आंकड़ा तो और भी चौंकाने वाला है। मई में 20 फीसदी भी बच्चों का टीकाकरण नहीं हो सका।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में हर महीने 12,000 से अधिक बच्चों का टीकाकरण किया जाना था, लेकिन अप्रैल में कोरोना की दूसरी लहर और कोविड टीकाकरण की शुरुआत होते ही बच्चों के टीकाकरण का अभियान रोक दिया जिसकी वजह से लक्ष्य के सापेक्ष विभाग टीकाकरण नहीं कर सका। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा.आरएन सिंह बताते हैं कि एएनएम, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और स्वास्थ्य कर्मियों को कोविड-19 की ड्यूटी पर लगा दिया गया। कोरोना के खौफ और लाकडाउन के कारण लोग भी घरों से बाहर निकलकर टीकाकरण केंद्र तक नहीं पहुंचे। ऐसे में स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचकर टीका लगवाने वालों की संख्या काफी गिर गई।
इस साल टीकाकरण की ऐसी रही रफ्तार
महीना टीकाकरण
जनवरी 12445
फरवरी 12427
मार्च 12615
अप्रैल 4694
बेहद जरूरी होता है टीकाकरण
टीकाकरण बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित करता है। इससे उन्हें गंभीर बीमारियों से सुरक्षा मिलती है। टीके संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर देते हैं। 12 से 24 महीने के बीच बच्चों को 2 महीने, 4 महीने, 9 महीने और 12 और 24 महीने के अंतराल पर टीका लगाया जाता है।
बच्चों को यह लगाए जाते हैं टीके
जन्म के समय- बीसीजी, पोलियो और हिपेटाइटिस बी
जन्म से 6 सप्ताह पर- पोलियो-1, रोटा वाइरस-1, आईपीवी-1, पेंटावैलेंट-1, पीसीवी-1
जन्म से 14 सप्ताह पर- पोलियो-3, रोटा वाइरस-3, आईपीवी-3, पेंटावैलेंट-3, पीसीवी-2
9 से 12 महीने पर- मीजल्स- रुबेला-1, पीसीवी बूस्टर डोज, जापानी इंसिफेलाइटिस-1
16 से 24 महीने पर- पोलियो बूस्टर डोज, मीजल्स-रुबेला-2, डीपीटी बूस्टर-1, जापानी इंसिफेलाइटिस-2
5 से 10 वर्ष पर- डीपीटी बूस्टर-2
जन्म से 10 वर्ष पर- टिटनेस डिफ्थीरिया
कोरोना के चलते टीकाकरण का कार्य बाधित हुआ है। सभी चिकित्सा अधिकारियों के साथ बैठक कर टीकाकरण के लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। जिन क्षेत्रों में टीकाकरण का कार्य कमजोर है, वहां विशेष अभियान चलाकर लक्ष्य को पूरा किया जाएगा।-डा.आरएन सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
बच्चों को विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण जरूरी है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अभिभावक बच्चों को लेकर घर से बाहर निकले ही नहीं। जिन लोगों के टीके छूट गए हैं वह अब लगवा सकते हैं। बच्चों की सुरक्षा के लिए यह कवच बहुत ही आवश्यक है।
– डा.कमेंद्र, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
