बरेली: लॉकडाउन के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रहे युवक ने की आत्महत्या
बरेली, अमृत विचार। लाकडाउन के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रहे नमकीन फैक्ट्री के कर्मचारी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। डेढ़ साल पूर्व उसके पिता की कैंसर से मौत हो गई थी। जिसके बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उस पर ही थी। पुलिस ने शव को पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया है। पुराना …
बरेली, अमृत विचार। लाकडाउन के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रहे नमकीन फैक्ट्री के कर्मचारी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। डेढ़ साल पूर्व उसके पिता की कैंसर से मौत हो गई थी। जिसके बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उस पर ही थी। पुलिस ने शव को पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया है।
पुराना शहर के चक महमूद निवासी अमन मौर्य (20) घर के पास ही स्थित नमकीन फैक्ट्री में नौकरी करता था। युवक के चचेरे भाई सुनील मौर्य ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले अमन के पिता की भी मौत हो गई थी। इसके बाद अमन पर ही परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ आ गया था। नौकरी से होने वाली कमाई से ही वह घर का खर्च व छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई का खर्च निकालता था।
बताया जा रहा है कि युवक के पिता का कुछ कर्ज बाकी था जिसे अमन ही चुका रहा था। रविवार को अमन की छुट्टी रहती थी। जिसके चलते वह घर पर ही था। युवक की मां और बड़ी बहन रिश्तेदारी में गई थीं। छोटी बहन और भाई घर पर ही थे। दोपहर को परिवार के साथ बैठकर अमन ने खाना खाया। उसके बाद पास में ही स्थित अपने दूसरे घर पर चला गया।

देर रात तक जब युवक घर नहीं पहुंचा तो रात करीब 10 बजे उसके चचेरे भाई सुनील मौर्य व विशाल मौर्य उसे बुलाने पहुंचे तो देखा कि जीने का दरवाजा अंदर से बंद था। जिसके बाद दोनों भाई पड़ोस की छत से कूदकर पहली मंजिल पर बने कमरे के बाहर पहुंचे तो खिड़की से देखा कि अमन का शव छत के कुंडे में बंधी रस्सी से लटका था। भाइयों ने शव को नीचे उतारकर परिजनों को सूचना दी। सुबह पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्ट मार्टम के लिए भिजवाया।
पढ़ाई की उम्र में दबता गया जिम्मेदारियों के बोझ से
डेढ़ साल पहले मेडिकल स्टोर पर हेल्परी का काम करने वाले युवक के पिता लालता प्रसाद मौर्य की मौत कैंसर से हो गई थी। जिसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी अमन के ऊपर थी। पढ़ाई की उम्र में वह पारिवारिक दायित्वों के तले दबता चला जा रहा था। परिजनों ने जानकारी दी कि युवक की दो छोटी बहनें सोनम (17), अंतिका (14) व एक छोटा भाई नितिन (7) है जिनकी पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी भी अमन पर ही थी।
पिछले साल मार्च से लगे लाकडाउन ने कमाई के सारे साधन बंद कर दिए थे। किसी तरह जब इस साल नमकीन फैक्ट्री में युवक ने नौकरी शुरू की तो फिर से बंदी लगने की वजह से वह भी चली गई। कुछ दिन पहले ही अमन ने दोबारा काम पर जाना शुरू किया था। आर्थिक तंगी और बहनों की शादी की चिंता ने अमन को मौत के मुंह में पहुंचा दिया। पहले पति और अब जवान बेटे को खोने के बाद अमन की मां ओमवती पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा है।
