गांवों में नल से जल पहुंचाने में उत्तर प्रदेश सबसे पीछे

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संजय सिंह, नई दिल्ली, अमृत विचार। जलजीवन मिशन के तहत गांव के घरों में नल के जरिये स्वच्छ पेय जल उपलब्ध कराने में उत्तर प्रदेश सबसे पीछे है। उत्तर प्रदेश में अब तक केवल 5 फीसद आंगनवाड़ी केंद्रों तथा 8 फीसद स्कूलों में नल से पेयजल का इंतजाम हो सका है। उत्तर प्रदेश के 1,91,282 …

संजय सिंह, नई दिल्ली, अमृत विचार। जलजीवन मिशन के तहत गांव के घरों में नल के जरिये स्वच्छ पेय जल उपलब्ध कराने में उत्तर प्रदेश सबसे पीछे है। उत्तर प्रदेश में अब तक केवल 5 फीसद आंगनवाड़ी केंद्रों तथा 8 फीसद स्कूलों में नल से पेयजल का इंतजाम हो सका है। उत्तर प्रदेश के 1,91,282 आंगनवाड़ी केंद्रों में से अब तक केवल 9,721 केंद्रों में नल से जल की व्यवस्था हुई है। जबकि 2,45,380 स्कूलों में से 19,460 स्कूलों में पानी के नल लग पाए हैं।

नल से जल स्कीम को लागू करने में केंद्र सरकार ने भी उत्तर प्रदेश को असम, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान जैसे उन राज्यों के समूह में रखा है, जहां सबसे अंत यानी 2024 तक सभी को नल से जल की आपूर्ति की व्यवस्था की जाएगी। यहां तक कि 2 अक्टूबर, 2020 को आंगनवाड़ी केंद्रों और स्कूलों में पाइपलाइन के जरिये पेयजल पहुंचाने का जो 100 दिवसीय अभियान चलाया गया था उसमें भी उत्तर प्रदेश में कोई काम नहीं हुआ।

जबकि इस छोटी सी अवधि में ही आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, गोआ, हरियाणा, तमिलनाडु तथा तेलंगाना जैसे राज्यों ने अपने सभी आंगनवाड़ी केंद्रों और स्कूलों में नल का जल पहुँचा दिया। जल जीवन मिशन की शुरुआत 15 अगस्त, 2019 को हुई थी। उस वक्त तक देश के 18.93 करोड़ घरों में से केवल 3.23 करोड़ घरों में नल से जल की आपूर्ति हो रही थी। लेकिन मिशन चालू होने के बाद अब तक 3.50 करोड़ और घरों में पानी की पाइपलाइन पहुंचने से नल वाले घरों की कुल संख्या बढ़कर 6.73 करोड़ (35.12 फीसद) हो गई है।

इस वर्ष 15 फरवरी तक देश भर में 5.15 लाख स्कूलों तथा 4.64 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों में नल का जल पहुंचाया जा चुका है। इस दौरान गोवा और तेलंगाना पहले ऐसे राज्य बन गए हैं जहां शत-प्रतिशत घरों में नल से पीने का पानी पहुंच रहा है। जबकि जिलों के हिसाब से गोवा, तेलंगाना, गुजरात, जम्मू व कश्मीर, पंजाब समेत आठ राज्यों के 52 जिलों ने ये उपलब्धि हासिल कर ली है। लेकिन उत्तर प्रदेश में एक भी जिला ऐसा नहीं जहां 100 फीसद घरों में नल लगा हो।

पानी समितियां: नल से जल योजना को सफल बनाने के लिए केंद्र सरकार ने गांवों और ग्राम पंचायतों में विलेज वाटर एन्ड सेनिटेशन समितियों अथवा पानी समितियों के गठन का प्रावधान किया है। इन समितियों में 50 फीसद महिलाओं तथा 25 फीसद कमजोर वर्ग के लोगो समेत गांव के 10-15 लोग होने चाहिए।

उप्र में एक पानी समिति नहीं
पूरे देश के 6,0,5040 गांवों में अब तक 1,36,971 पानी समितियां गठित की जा चुकी हैं। जिनमें राजस्थान ने अपने 43,323 गांवों में से 33153 गांवों में पानी समितियां गठित कर सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है। परंतु उत्तर प्रदेश के 97,455 गांवों में एक भी पानी समिति के गठन की सूचना नहीं है।

उत्तराखंड भी आगे: जबकि उसके पर्वतीय पड़ोसी उत्तराखंड तक ने 15,218 गावों में 2,248 पानी समितियां गठित कर ली हैं।

पेयजल की गुणवत्ता: जिन राज्यों में गांवों में पानी समितियां हैं, वहां महिलाओं को पानी की गुणवत्ता जांचने का प्रशिक्षण भी दिया गया है। लेकिन पानी समितियों का गठन न होने से उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं को ये प्रशिक्षण भी नहीं दिया जा सका है।

जल जीवन मिशन में विफलता के पीछे उत्तर प्रदेश में सामुदायिक चेतना का अभाव बड़ी वजह है। जिसके कारण मिशन में पंचायतों की भागीदारी फिलहाल नगण्य है। पानी समितियों का गठन न होने की ये बड़ी वजह है। इसके अलावा यहां लोग नल से पेयजल के लिए भुगतान करने को भी तैयार नहीं हैं। साथ ही पानी के प्रबंधन और परीक्षण योग्य पेशेवरों की भी कमी है।

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