बरेली: विश्वविद्यालय में शोध की प्रक्रिया हुई ऑनलाइन

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बरेली, अमृत विचार। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में शोध की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी। इसके लिए विश्वविद्यालय ने शोध निदेशालय की वेबसाइट लांच कर दी है। वेबसाइट पर शोध पर्यवेक्षकों को लॉग इन-पासवर्ड भी दे दिए हैं। जल्द ही शोधार्थियों को भी लॉग इन पासवर्ड दे दिए जाएंगे। शोधार्थी भविष्य में अपनी …

बरेली, अमृत विचार। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में शोध की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी। इसके लिए विश्वविद्यालय ने शोध निदेशालय की वेबसाइट लांच कर दी है। वेबसाइट पर शोध पर्यवेक्षकों को लॉग इन-पासवर्ड भी दे दिए हैं। जल्द ही शोधार्थियों को भी लॉग इन पासवर्ड दे दिए जाएंगे।

शोधार्थी भविष्य में अपनी अस्थायी डिग्री भी वेबसाइट से स्वयं डाउनलोड कर सकेंगे। शोध निदेशालय ने शोध की प्रवेश परीक्षा की तैयारियां शुरू कर दी हैं। जल्द ही शासन और विश्वविद्यालय प्रशासन की अनुमति के बाद परीक्षा नियंत्रण कक्ष से तिथि जारी कर दी जाएगी। विश्वविद्यालय के द्वारा शोध गंगा पोर्टल पर भी अब तक 600 से अधिक थीसिस अपलोड की जा चुकी हैं।

शोध निदेशक प्रो. सुधीर कुमार ने बताया कि वेबसाइट की लांचिंग के साथ शोध सुपरवाइजर पर्यवेक्षकों की बैठक वर्चुअल माध्यम से की गई। विश्वविद्यालय में पहली बार इस तरह की बैठक हुई है। इसमें कुलपति प्रो. केपी सिंह, कुलसचिव डा. सुनीता पांडेय, सह शोध निदेशक डा. अविनाश अग्रवाल और डा. संजीव त्यागी शामिल हुए।

कुलपति ने बैठक में शोध से जुड़ी सभी समस्याओं को दूर करने के साथ ही पूरी शोध प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के लिए कहा। बैठक में विश्वविद्यालय परिसर के शोध पर्यवेक्षक डा. संतोष अरोड़ा व डा. अनीता त्यागी और महाविद्यालयों से बरेली कॉलेज के प्राचार्य डा. अनुराग मोहन शामिल हुए। सभी ने शोध को लेकर अपनी-अपनी राय रखी।

दूसरे संस्थानों के पर्यवेक्षक भी होंगे शामिल
शोध निदेशक के मुताबिक वेबसाइट पर 315 शोध पर्यवेक्षकों का डाटा अपलोड कर दिया गया है। शोध पर्यवेक्षक ने अब तक कितनी रिसर्च की हैं, उनके अंतर्गत कितने छात्रों ने शोध की हैं, विदेश में उनकी शोध का क्या स्तर रहा है यह सभी जानकारी वेबसाइट पर देनी होगी। उन्होंने कहा कि नए पर्यवेक्षक भी जुड़ सकेंगे। इसके लिए उनका विभाग 10 साल पुराना और उन्हें कम से कम संस्थागत तौर पर दो वर्ष पढ़ाने का अनुभव हो। जल्द ही दिल्ली, उत्तराखंड व अन्य राज्यों के संस्थानों के भी शोध पर्यवेक्षक शामिल किए जाएंगे। इससे छात्र ऑनलाइन ही अपना पर्यवेक्षक अपनी सुविधा के हिसाब से चुन सकेगा।

सारी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन
भविष्य में सभी छात्रों को लॉग इन पासवर्ड दे दिया जाएगा। इसके साथ शोध की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। छात्र ने क्या पढ़ाई की है, उसने क्या प्रोजेक्ट तैयार किया है, उसकी सिनास्पिस कैसी है, वह यह सब ऑनलाइन ही सबमिट कर सकेगा। छात्र को अपनी डिग्री लेने के लिए भी विश्वविद्यालय में नहीं आना होगा। जरूरत पर वह अस्थायी डिग्री वेबसाइट से अपलोड कर सकेगा।

ऑनलाइन होगी आरईटी
विश्वविद्यालय जल्द ही शोध की प्रवेश परीक्षा (आरईटी-रिसर्च इंट्रेंस टेस्ट ) आयोजित करेगा। प्रवेश परीक्षा ऑनलाइन ही आयोजित करायी जाएगी। इस बार शोध छात्रों को तीन साल के लिए फेलोशिप भी दी जाएगी। इसके लिए उसे पढ़ाना आवश्यक होगा। अलग-अलग तरह की फेलोशिप पाने वाले छात्रों का सीधे प्रवेश लिया जाएगा। इसकी भी तैयारी की जा रही है। इसके लिए साक्षात्कार या अन्य कोई व्यवस्था की जाएगी।

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