मुरादाबाद: कैसे रुकेंगे बाल विवाह? सख्ती के बाद भी नहीं लग पा रही रोक

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Edited By Amrit Vichar
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मुरादाबाद, अमृत विचार। दशकों पहले खत्म हुई बाल विवाह प्रथा आज भी गुपचुप तरीके से जारी है। हाईटेक दौर में भी ग्रामीण आंचलों की बात छोड़िए महानगर में भी बाल विवाह के मामले सामने आ रहे हैं। शासन द्वारा सख्त कानून बनाए जाने के बाद भी परिजन उनकी अनदेखी करने से बाज नहीं आ रहे …

मुरादाबाद, अमृत विचार। दशकों पहले खत्म हुई बाल विवाह प्रथा आज भी गुपचुप तरीके से जारी है। हाईटेक दौर में भी ग्रामीण आंचलों की बात छोड़िए महानगर में भी बाल विवाह के मामले सामने आ रहे हैं। शासन द्वारा सख्त कानून बनाए जाने के बाद भी परिजन उनकी अनदेखी करने से बाज नहीं आ रहे हैं।

कुछ मामलों में परिजनों की मजबूरी कहें या फिर बेबसी कि न चाहकर भी वे कानून तोड़ने के लिए मजबूर हो गए। एक साल में पूरे मंडल में ऐसे 24 मामले सामने आए थे। इनमें अधिकतर मामले वर्ष 2020-21 में कोरोना संक्रमण के दौरान लाकडाउन में सामने आए। लाकडाउन के बहाने परिजनों ने खामोशी से बाल विवाह कराने का प्रयास किया। समय से सूचना मिलने पर 22 मामलों में टीम ने पहुंचकर विवाह को रुकवाया। इस दौरान टीम के सदस्यों की परिजनों से नोकझोंक भी हुई। नौबत हाथापाई तक भी पहुंची। लेकिन, कानूनी सख्ती का खौफ दिखाकर टीम ने इन शादियों को रुकवा दिया। मौजूदा समय में ग्रामीणों द्वारा इन मामलों की मॉनीटरिंग की जा रही है।

कहने को बाल विवाह अपराध है और इसे रोकने के लिए शासन काफी सख्त है। बच्चों के मौलिक अधिकारों के हनन को रोकने के लिए शासन ने बड़े जिलों में चाइल्डलाइन व जिला बाल विवाह निषेध समिति के अलावा अन्य समितियों का गठन किया है। इसके अलावा सोशल मीडिया द्वारा भी प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इसके बाद भी मुरादाबाद मंडल में चोरी-छुपे बाल विवाह के मामले सामने आ रहे हैं। खासतौर पर पर लाकडाउन के दौरान सबसे अधिक शिकायतें आईं। कई मामलों में टीम जब मौके पर पहुंची तो विवाह की अंतिम रस्में चल रही थीं। कहीं पर फेरे लेने की तैयारी थी तो कहीं पर विदाई की। टीम ने पुलिस के साथ दबिश दी तो अधिकतर मामलों में हंगामा हो गया। कोई अपनी आर्थिक स्थिति तो कोई अन्य मजबूरी बताकर विवाह करने की जिद पर अड़ गया।

केस-1
25 दिन पहले मझोला थाना क्षेत्र के जवाहरनगर गांव में बाल विवाह की सूचना मिली। इस पर चाइल्डलाइन की टीम पुलिस के साथ मौके पर पहुंच गई। जिस वक्त टीम पहुंची, बाराती खाना खा रहे थे और निकाह की तैयारियां चल रही थी। टीम को देखकर बारातियों व घरातियों में हड़कंप मच गया। साक्ष्य दिखाने पर दूल्हा तो बालिग निकला। लेकिन, दुल्हन की सही उम्र के संबंध में परिजन कोई जानकारी नहीं दे सके। टीम ने सख्ती दिखाते हुए विवाह रुकवाने का प्रयास किया तो माहौल गर्मा गया। परिजनों ने पहले दबाव बनाया। लेकिन, पुलिस ने सख्ती की तो वे नाबालिग के बालिग होने पर विवाह करने के लिए राजी हो गए।

केस-2
डेढ़ माह पहले सूचना पर टीम ने पाकबड़ा थाना क्षेत्र में छापा मारा। बारात अमरोहा देहात से आई थी और विवाह की तैयारियां अंतिम चरण में थी। टीम ने मौके पर पहुंचकर उम्र संबंधी साक्ष्य मांगे तो परिजन बगलें झांकने लगे। दूल्हा बालिग निकला। लेकिन, दुल्हन नाबालिग थी। टीम ने विरोध किया तो परिजन विवाह न करने के लिए राजी तो हो गए। लेकिन मौका पाकर दुल्हन को लेकर निकल गए। जानकारी होने पर टीम ने पीछा किया। बाद में अमरोहा देहात पुलिस को सूचना देकर सभी को हिरासत में करवाया। पुलिस ने सख्ती की तो वे लोग भी उसके बालिग होने तक विवाह न करने पर राजी हो गए।

यह है सजा का प्रावधान
21 वर्ष से कम उम्र के लड़के और 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की के विवाह को गैरकानूनी अर्थात बाल विवाह की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में विवाह के समय वर-वधू दोनों में से किसी की भी उम्र कम पाई जाती है तो वह विवाह बाल विवाह की श्रेणी में होगा। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के अंतर्गत अगर कोई व्यक्ति पुलिस या बाल विवाह प्रतिषेध पदाधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराता है तो इस स्थिति में पुलिस या बाल विवाह प्रतिषेध पदाधिकारी जांच कर इसे मजिस्ट्रेट के संज्ञान में लाएंगे। बाल विवाह में दो वर्ष तक का कारावास या फिर एक लाख का जुर्माना किया जा सकता है। यह भी संभव है कि जुर्माना व सजा दोनों हो सकती हैं।

एक साल में मुरादाबाद जिले में 19, सम्भल में दो व अमरोहा जिले में एक बाल विवाह की सूचना मिली। इस पर टीम ने मौके पर जाकर उन्हें रुकवा दिया। वर्तमान में ग्रामीणों द्वारा भी इसको लेकर मॉनीटरिंग की जा रही है। -श्रद्धा शर्मा, सदस्य, जिला बाल विवाह निषेध समिति

 

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