बरेली: अधिनियम एक पर विभागों की कार्रवाई अलग-अलग

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। वर्ष 2017 में लागू हुआ जीएसटी अधिनियम वैसे तो पूरे देश के लिए एक बना था लेकिन फर्मों की जांच के मामले में सीजीएसटी (केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर) और एसजीएसटी (राज्य वस्तु एवं सेवाकर) विभागों की कार्रवाई भिन्न है। सीजीएसटी विभाग की बात करें तो फर्म की जांच करने वाले अधिकारी ही …

बरेली, अमृत विचार। वर्ष 2017 में लागू हुआ जीएसटी अधिनियम वैसे तो पूरे देश के लिए एक बना था लेकिन फर्मों की जांच के मामले में सीजीएसटी (केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर) और एसजीएसटी (राज्य वस्तु एवं सेवाकर) विभागों की कार्रवाई भिन्न है। सीजीएसटी विभाग की बात करें तो फर्म की जांच करने वाले अधिकारी ही कर का निर्धारण और जुर्माना लगाने के साथ पूरी रिपोर्ट देते हैं मगर एसजीएसटी विभाग में अधिकारी जांच रिपोर्ट बनाकर संबंधित खंडों को भेजते हैं।

इसके बाद खंड फिर अपने हिसाब से उसका आकलन कर टैक्स और जुर्माने का निर्धारण करते हैं। इसकी वजह से व्यापारियों को एक ही जांच के लिए अलग-अलग अफसरों के यहां हाजिरी लगानी पड़ती है। खासबात यह भी है कि इन दोनों विभागों में दूरी का फासला भी एक-दूसरे के कार्यालय से काफी अधिक है।

विभागीय कर्मी बताते हैं कि एसजीएसटी में फर्मों की जांच विशेष अनुसंधान शाखा (एसआइबी) करती है। एसआइबी धारा 130 के तहत कार्रवाई करती है, जबकि खंड कार्यालय से धारा 173 और 174 की कार्रवाई की जाती है। सीजीएसटी की फर्मों की जांच एसजीएसटी के अफसरों द्वारा कर लेने पर भी यह व्यवस्था नहीं है कि रिपोर्ट सीजीएसटी विभाग में तैयार हो सके। इससे व्यापारी इन विभागों के बीच में फंसा रह जाता है।

जीएसटी के जानकार राजेन विद्यार्थी बताते हैं कि सूबे में वैट की तरह ही जीएसटी में भी जांच की प्रक्रिया लागू कर दी गई है। इससे व्यापारियों को अलग-अलग अफसरों के पास चक्कर लगाना पड़ता है और उन्हें मुश्किलें होती हैं। यह एक देश और एक कर व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। व्यवस्था में बदलाव किया जाना चाहिए ताकि एक ही कार्यालय में समस्या का समाधान होने से व्यापारियों की भागदौड़ बचेगी।

वाणिज्यकर विभाग के डिप्टी कमिश्नर गौरी शंकर ने बताया कि वाणिज्यकर विभाग में शुरू से ही यह प्रक्रिया रही है कि एसआइबी फर्म की जांच करती है और खंड स्तर से टैक्स का निर्धारण होता है। इस व्यवस्था में व्यापारियों को किसी तरह की दिक्कत नहीं होती है। फिर भी अगर कोई दिक्कत आ रही तो वह अपनी मांग रहे उस पर विचार किया जाएगा।

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