शिक्षक का शिष्य अखिलेश को ‘विजयी भव:’ का आशीष, कहा- भविष्य में हासिल करेंगे प्रधानमंत्री का पद
इटावा। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के शैक्षिक गुरू अवध किशोर बाजपेई को यकीन है कि उनका योग्य शिष्य 2022 में न सिर्फ राज्य की सत्ता की बागडोर एक बार फिर अपने हाथ में लेगा बल्कि भविष्य में प्रधानमंत्री का पद हासिल करेगा। जिले के सिविल लाइन इलाके …
इटावा। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के शैक्षिक गुरू अवध किशोर बाजपेई को यकीन है कि उनका योग्य शिष्य 2022 में न सिर्फ राज्य की सत्ता की बागडोर एक बार फिर अपने हाथ में लेगा बल्कि भविष्य में प्रधानमंत्री का पद हासिल करेगा।
जिले के सिविल लाइन इलाके के निवासी सेवानिवृत्त अंग्रेजी के प्रवक्ता अवध किशोर बाजपेई ने गुरूवार को ‘यूनीवार्ता’ से कहा “ अखिलेश यादव मेरे प्रिय शिष्यों में शामिल है जो योग्य और जुझारू हैं और प्रदेश की जनता की भलाई के लिये समर्पित हैं। 2022 मे उत्तर प्रदेश की कमान उनके हाथ में एक बार फिर से होगी, इसमें किसी को शक नहीं होना चाहिये।”
उन्होने कहा कि अपने जुझारूपन और सच के रास्ते में चलने की आदत उनको जनता के बीच लोकप्रिय बना रही है। उनकी नेतृत्व क्षमता पर देश के लगभग सभी राजनीतिक दलों को भरोसा है। यहां तक कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी उनकी लोकप्रियता से डरती है और उन्हे विजय की राह में सबसे बड़ी बाधा मानती है और यही एक सच्चे जनसेवक की पहचान है।
उन्होने कहा कि आने वाले दिनो में अखिलेश यादव के देश का प्रधानमंत्री बनने की प्रबल संभावनाये हैं। कचहरी रोड पर रहने वाले अवध किशोर बाजपेई कर्म क्षेत्र इंटर कालेज से रिटायर हो चुके हैं। अंग्रेजी के शिक्षक रहे अवध किशोर बाजपेई को शुरुआती दौर में अखिलेश यादव को उस समय अंग्रेजी पढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई जब अखिलेश पढ़ाई में काफी कमजोर थे।
हालांकि 2012 में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हो चुके अखिलेश धारा प्रवाह अंग्रेजी मे माहिर खिलाडियों को मात देते है। अवध किशोर बाजपेई उस दिन को याद करते हैं जब मुलायम सिंह यादव ने सेंट मेरी स्कूल में अखिलेश की पढ़ाने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी थी। इसके बाद बाजपेई ने ही अखिलेश यादव को सैनिक स्कूल के लिए तैयार किया और खुद वर्ष 1983 में अखिलेश यादव को धौलपुर के मिलिट्री स्कूल लेकर के गए।
अखिलेश के शैक्षिक गुरु अवध किशोर ने बताया कि कक्षा छह में अखिलेश का चयन धौलपुर सैनिक स्कूल में हो गया था। बाद के दिनों में संभवत मुलायम सिंह के राजनीति में होने के चलते अखिलेश ने भी राजनीति में पदार्पण किया, नहीं तो आज वे भारतीय सेना में जनरल होते । उनका कहना है कि अखिलेश का कद ही उनकी गुरु दक्षिणा है। अवध किशोर ने बताया कि मुलायम सिंह यादव ने 1981 में अपने लगभग 10 साल के बेटे टीपू (बचपन के अखिलेश यादव) का हाथ उनको थमाकर उनकी पढ़ाई का जिम्मा सौंपा था। अखिलेश को अन्य बच्चों की तरह खेलना खूब पसंद था, लेकिन जो पढ़ाया समझाया जाए उसे कंठस्थ कर लेते थे।
