रिवर फ्रंट के बाद अब स्मारक घोटाले में बसपा नेताओं से पूछताछ की तैयारी
लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव से पहले जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। गोमती रिवर फ्रंट घोटाले को लेकर देश के कई राज्यों के 17 शहरों में छापेमारी और अखिलेश यादव के करीबियों से सीबीआई ने पूछताछ की है। इसी बीच स्मारक घोटाले को लेकर बहुजन समाज पार्टी के शासनकाल के दो पूर्व मंत्रियों से …
लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव से पहले जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। गोमती रिवर फ्रंट घोटाले को लेकर देश के कई राज्यों के 17 शहरों में छापेमारी और अखिलेश यादव के करीबियों से सीबीआई ने पूछताछ की है। इसी बीच स्मारक घोटाले को लेकर बहुजन समाज पार्टी के शासनकाल के दो पूर्व मंत्रियों से भी पूछताछ की तैयारी है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार के दौरान में 1500 करोड़ रुपये की गोमती रिवर फ्रंट योजना में घोटाले की सीबीआई ने जांच तेज कर दी है। सीबीआई ने रिवर फ्रंट घोटाले में दूसरी एफआईआर दर्ज करने के बाद सोमवार को आरोपितों के 49 ठिकानों पर छापेमारी की बड़ी कार्रवाई की। कांट्रैक्टरों और इंजीनियरों से पूछताछ के बाद सीबीआई इस मामले में कई बड़ों की भूमिका को खंगालने की तैयारी कर रही है।

अखिलेश सरकार के गोमती रिवर फ्रंट के बाद अब बसपा शासनकाल में हुए करीब 1400 करोड़ रुपये के स्मारक घोटाले की जांच की आंच से बसपा के दो पूर्व मंत्रियों के घिरने के संकेत मिल रहे हैं। पिछले सात वर्षों से सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) इस मामले की जांच कर रहा है। लोकायुक्त संगठन ने वर्ष 2013 में स्मारकों के निर्माण में अनियमितता के आरोपों की जांच की थी। लोकायुक्त की जांच में करीब 1400 करोड़ रुपये का घोटाला होने का खुलासा हुआ था। विजिलेंस ने जनवरी, 2014 में लखनऊ के गोमतीनगर थाने में इस घोटाले को लेकर 199 आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा जांच शुरू की थी।
बसपा शासनकाल के दौरान हुए चीनी मिल घोटाले की सीबीआई जांच ने भी बीते दिनों तेजी पकड़ी। वहीं जलनिगम भर्ती घोटाले में सपा सरकार के पूर्व मंत्री आजम खां की मुश्किलें पहले ही बढ़ चुकी हैं। दर्ज कराई गई इस एफआईआर में बसपा सरकार के पूर्व मंत्री और मौजूदा समय में कांग्रेस नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी व बाबू सिंह कुशवाहा भी नामजद हैं। इस मामले की जांच के दौरान विजिलेंस ने यूपी निर्माण निगम के कई तत्कालीन अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा था। अब विजिलेंस ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी व बाबू सिंह कुशवाहा को पूछताछ के लिए तलब किया है। बता दें कि स्मारक घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय यानि ईडी भी कर रहा है।
इतना ही नहीं सपा सरकार में हुए खनन घोटाले की सीबीआई जांच से अखिलेश यादव की मुश्किलों में इजाफा हो सकता है। अखिलेश सरकार में मंत्री रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति जेल में हैं और उनके मंत्री रहने के दौरान का ही यह घोटाला भी है। इस घोटाले में भी कई आईएएस अधिकारियों समेत सफेदपोशों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। इन सभी पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
बीते दिनों कोरोना संक्रमण की वजह से जांच एजेंसियां शांत बैठी थीं, लेकिन अब वे दोबारा से सक्रिय हो गई हैं।
