बरेली: 16 दंपतियों का हुआ पुनर्मिलन, 17144 वाद निस्तारित हुए

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बरेली, अमृत विचार। राष्ट्रीय लोक अदालत के जरिए शनिवार को विभिन्न न्यायालयों के 14849, बैंक के 1971 तथा बीएसएनएल के 38 वादों का निस्तारण किया गया। एसपी ट्रैफिक द्वारा 286 ई चालानों का निस्तारण किया गया। कुल 17144 वादों का निस्तारण किया गया। जिसमें विभिन्न न्यायालयों की धनराशि 6,56,64,231 और बैंको के माध्यम से 7,65,16,722 …

बरेली, अमृत विचार। राष्ट्रीय लोक अदालत के जरिए शनिवार को विभिन्न न्यायालयों के 14849, बैंक के 1971 तथा बीएसएनएल के 38 वादों का निस्तारण किया गया। एसपी ट्रैफिक द्वारा 286 ई चालानों का निस्तारण किया गया। कुल 17144 वादों का निस्तारण किया गया। जिसमें विभिन्न न्यायालयों की धनराशि 6,56,64,231 और बैंको के माध्यम से 7,65,16,722 धनराशि, बीएसएनएल की 2,66,167 तथा एसपी ट्रैफिक द्वारा ई चालान की धनराशि 234800 की धनराशि, कुल मिलाकर 14,26,81,920 की धनराशि वसूल की गई।

जनपद न्यायाधीश/ अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रेणु अग्रवाल की अध्यक्षता में राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन सुबह 11 बजे जनपद न्यायालय परिसर में किया गया। इस अवसर पर अपर जिला जज प्रथम सुनील कुमार वर्मा, स्पेशल जज सत्यदेव गुप्ता, अपर जिला जज रचना अरोड़ा, अपर जिला जज अमित सिंह, अपर जिला जज प्रमोद गुप्ता, सीजेएम अतुल चौधरी, सिविल जज (सी.डी.) हरिश्चन्द्र, एसीजेएम प्रथम विष्णु देव सिंह, सिविल जज (सी.डी.) प्रथम मृदान्शु कुमार आदि न्यायाधीश उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय लोक अदालत में जनपद न्यायाधीश द्वारा 12 वादों, अपर जिला जज प्रथम ने तीन, स्पेशल जज सत्यदेव गुप्ता ने 10, अपर जिला जज इफ्तेखार अहमद ने एक, अपर जिला जज ई. सी. एक्ट अंगद प्रसाद द्वारा 291, अपर जिला जज एंटी करप्शन अब्दुल कय्यूम ने चार, विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट अनिल कुमार सेठ ने तीन, सीजेएम ने 1822, एसीजेएम प्रथम 428, सिविल जज (सी.डि.) हरिश्चंद्र ने 21, सिविल जज (सी.डि.) प्रथम मृदान्शु कुमार ने दो, एसीजेएम सत्यप्रकाश आर्या ने 188, एसीजेएम आशुतोष ने 262, एसीजेएम देवेन्द्र कुमार ने 153 वादों का निस्तारण किया।

जनपद न्यायालय में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत के शुभारम्भ पर जिला जज रेनू अग्रवाल

लोक अदालत के नोडल अधिकारी एडीजे इफ्तेखार अहमद ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से विभिन्न न्यायालयों द्वारा 5351 वादों का निस्तारण किया गया जिसमें सिविल प्रकृति के 420 वाद, मोटर दुर्घटना प्रतिकर के 199 वाद, पारिवारिक मामलों के 69 वाद, फौजदारी के 4663 वाद तथा 9406 राजस्व वादों का निस्तारण आपसी सुलह समझौते बाद अभिस्वीकृति के आधार पर किया गया। मोटर दुर्घटना प्रतिकर वादों में पीठासीन अधिकारी मयंक चौहान द्वारा 199 वादों के निस्तारण के साथ रुपए 40156000 प्रतिकर की धनराशि वाद कारियों को दिलाई गई।

पीठासीन अधिकारी कॉमर्शियल कोर्ट बी.के. शैलेट द्वारा 17 वादों का निस्तारण करते हुए धनराशि 9385235 रूपये का सेटलमेंट कराया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव न्यायाधीश सत्येन्द्र सिंह वर्मा ने बताया कि जजी परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसमे विभिन्न बैंको द्वारा बैंक ऋण से सम्बंधित 1971 वादों का निस्तारण किया गया एवं कुल ऋण धनराशि रुपए 7,65,16,722 वसूल की गई तथा दूरसंचार विभाग के 38 वादों का निस्तारण कर 2,66,167 रूपये की धनराशि वसूल की गई। प्राधिकरण सचिव द्वारा अवगत कराया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में जनपद न्यायालय मे बतौर जुर्माना राशि रुपये 5,98,77,266 की धनराशि वसूल की गई।

इन दंपतियों का हुआ पुनर्मिलन
इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय हरीश त्रिपाठी द्वारा 14 दंपतियों एव पारिवारिक न्यायालय प्रथम शैलौज चंद्रा द्वारा दो दंपत्तियों का पुनर्मिलन करा कर एक दूसरे के गले में फूलमाला डलवाकर विदाई दी गई। लोक अदालत को सफल बनाने में समस्त न्यायिक अधिकारियों, बैंक-बीमा कंपनी के अधिकारियों, अन्य न्यायिक कर्मचारियो के साथ पैरा लीगल वालिंटयर का भी योगदान रहा।

जनपद न्यायालय में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में सुनी गयी लोगों की समस्याएं

चालान न मिलने से लोग हुए परेशान
लोक अदालत में बाइक, कार समेत अन्य वाहनों के ट्रैªफिक पुलिस द्वारा किये गये चालानों का निस्तारण कराने के लिए भी बड़ी संख्या मे लोग आये थे मगर आनलाइन व मोबाइल पर मैसेज (आपका चालान कोर्ट में निस्तारण के लिए भेजा जा चुका है) आने के बाद भी अदालत में चालान निस्तारण के लिए उपलब्ध नहीं थे। चालान निस्तारण पटल के लिपिक ने इसका कारण बताया कि ट्रैफिक पुलिस ने आनलाइन ही चालान भेजे हैं मगर हार्डकापी उपलब्ध नहीं करायी है जबकि आनलाइन देखने व उनके निस्तारण के लिए हमारे पास सिस्टम का अभाव है जो चालान उपलब्ध हैं उनका तुरंत निस्तारण किया जा रहा है। इस बाबत एसपी ट्रैªफिक को भी समस्या से अवगत कराया गया। यही वजह रही कि लोक अदालत में केवल 286 ई चालानों का ही निस्तारण हो सका जबकि तमाम लोगों को खाली हाथ ही वापस लौटना पड़ा।

कोविड से बेखौफ दिखे लोग
लोक अदालत के दौरान कोविड गाइडलाइन के पालन के निर्देश दिये गये थे। इसके लिए मुख्य गेट पर सैनेटाइजर व टैम्परेचर मापने के लिए भी प्रबन्ध किये गये थे मगर बैंको, कंपनियो के स्टालों पर अपने केसों का निपटारा करवाने के लिए उमड़ी भीड़ कोरोना से बेखौफ नजर आयी। सोशल डिस्टेंस के अलावा तमाम लोग मास्क भी पहने नजर नहीं आये।

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