टनकपुर: देशभर में प्रसिद्ध बग्वाल मेले में फिर लटकी तलवार 

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देवेन्द्र चन्द देवा, टनकपुर। देशभर में प्रसिद्ध देवीधुरा के बग्वाल मेले में लगातार दूसरी बार खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। कोरोना महामारी के चलते पिछले साल भी यह ऐतिहासिक मेला नहीं हो सका था। यह लगातार दूसरा अवसर होगा, जब यह ऐतिहासिक मेला नहीं होगा। अलबत्ता अभी मेले को निरस्त करने की औपचारिक घोषणा …

देवेन्द्र चन्द देवा, टनकपुर। देशभर में प्रसिद्ध देवीधुरा के बग्वाल मेले में लगातार दूसरी बार खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। कोरोना महामारी के चलते पिछले साल भी यह ऐतिहासिक मेला नहीं हो सका था। यह लगातार दूसरा अवसर होगा, जब यह ऐतिहासिक मेला नहीं होगा। अलबत्ता अभी मेले को निरस्त करने की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। वहीं मेले के नहीं होने के अंदेशे के चलते बग्वाल की परंपरा को प्रतीकात्मक रूप से बगैर दर्शकों के कराने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। चम्पावत जिला पंचायत संचालित इस मेले में कई लाख लोग शिरकत करते हैं।
टनकपुर से 132 किमी दूर चम्पावत जनपद के पाटी ब्लॉक के देवीधुरा में मां बाराही धाम मंदिर के खोलीखांड दुबाचौड़ में हर साल आषाड़ी कौतिक (रक्षाबंधन) के दिन बग्वाल होती है। पत्थर से शुरू यह बग्वाल बीते कुछ वर्षों से फल-फूलों से खेली जाती रही है। इस बार बग्वाल 22 अगस्त को प्रस्तावित है। कई लाख लोगों की मौजूदगी में होने वाली बग्वाल में चार खामों (चम्याल, गहरवाल, लमगडिय़ा और वालिग) के अलावा सात थोकों के योद्धा फर्रो के साथ हिस्सा लेते हैं। लेकिन इस बार कोरोना महामारी की वजह से बग्वाल मेले के आयोजन की संभावना लगातार दूसरी बार समाप्त प्राय: है। वर्ष 2020 में 3 अगस्त को हुई बग्वाल में फर्रों के साथ मंदिर की परिक्रमा और पूजा-अर्चना हुई थी। मेला नहीं होने से सांस्कृतिक और व्यापारिक गतिविधियों पर मार पड़ेगी। आमतौर पर दो सप्ताह तक चलने वाले जिला पंचायत संचालित इस मेले में दूरदराज से कारोबारी आते हैं।
बलि प्रथा का विकल्प है बग्वाल 
टनकपुर। चारों खामों के लोग पूर्णिमा के दिन पूजा-अर्चना के बाद बग्वाल खेलते हैं। किवंदती है कि पूर्व  में यहां नरबलि देने का रिवाज था। लेकिन जब चम्याल खाम की एक  बुजुर्ग महिला के एक मात्र पौत्र की बलि देने की बारी आई, तो वंश का नाश होने के डर से बुजुर्ग महिला ने मां बाराही की तपस्या की। तप से देवी मां के प्रसन्न होने पर वृद्धा की सलाह पर चारों खामों ने आपस में युद्ध कर इस परंपरा को आगे बढ़ाने की बात मान ली। और तब से ही बग्वाल का सिलसिला चला आ रहा है।
कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच धार्मिक आयोजनों में भीड़भाड़ प्रतिबंधित है। कोरोना के बीच बग्वाल की परंपरा को सांकेतिक रूप से निभाने के लिए मंदिर समिति के सदस्यों के साथ बैठक कर अंतिम रूप दिया जाएगा। यह बैठक 22 जुलाई को आयोजित की गई है।
– विनीत तोमर, डीएम चम्पावत
कोरोना के खतरे के मद्देनजर बग्वाल मेले के आयोजन की संभावना कम है। अलबत्ता परंपराओं का पालन करने के लिए बग्वाल को प्रतीकात्मक रूप से आयोजित किए जाने की संभावना है। अलबत्ता इसे लेकर अंतिम निर्णय इस महीने होने वाली बैठक में लिया जाएगा। 
– पंडित कीर्ति बल्लभ जोशी, पीठाचार्य, मां बाराही धाम।

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