रेटिंग एजेंसी S&P ने भारत की Rating को न्यूनतम स्तर की ‘निवेश श्रेणी’ में रखा कायम

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नई दिल्ली। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने लगातार 14वें साल भारत की रेटिंग को निवेश श्रेणी के न्यूनतम स्तर बीबीबी- (ट्रिपल बी माइनस) पर कायम रखा रहा है और आगे की संभावनओं को स्थायित्वपूर्ण बताया है। रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि सरकार को अगले 24 माह के दौरान अधिक अतिरिक्त कोष की जरूरत होगी, लेकिन …

नई दिल्ली। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने लगातार 14वें साल भारत की रेटिंग को निवेश श्रेणी के न्यूनतम स्तर बीबीबी- (ट्रिपल बी माइनस) पर कायम रखा रहा है और आगे की संभावनओं को स्थायित्वपूर्ण बताया है। रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि सरकार को अगले 24 माह के दौरान अधिक अतिरिक्त कोष की जरूरत होगी, लेकिन भारत की मजबूत बाह्य स्थिति (विदेशी मुद्रा भंडार) वित्तीय दबाव के समक्ष बफर का काम करेगी।

एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने कहा कि भारत की सरकारी वित्तीय साख का यह स्तर देश की अर्थव्यवस्था दीर्घावधि की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि की औसत से ऊपर रहने, मजबूती बाह्य स्थिति (विदेशी मुद्रा भंडार) की पृष्ठभूमि, नयी उभरती मौद्रिक परिस्थियों को दर्शाती है।

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि भारत के लोकतांत्रिक संस्थान नीतिगत स्थिरता और सहमति को प्रोत्साहन देते हैं तथा रेटिंग को सहारा देते हैं। लेकिन देश की इस ताकत को प्रति व्यक्ति आय का निम्न स्तर और कमजोर राजकोषीय स्थिति से चुनौती मिलती है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स का अनुमान है कि शेष बचे 2021-22 के वित्त वर्ष में भारत में आर्थिक गतिविधियां सामान्य होंगी। इससे 9.5 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी की वृद्धि हासिल की जा सकेगी।

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि इसका एक उल्लेखनीय हिस्सा पिछले वित्त वर्ष के निम्न तुलनात्मक आधार के प्रभाव (शून्य से नीचे की आर्थिक वृद्धि से तुलना) की वजह से हासिल होगी। 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 7.3 प्रतिशत की गिरावट आई है। एसएंडपी ने कहा कि भारत की राजकोषीय स्थिति कमजोर है। हालांकि, सरकार द्वारा इसको मजबूत करने के लिए कदम उठाए जाएंगे लेकिन अभी कुछ वर्षों तक यह ऐसी ही रहेगी।

एसएंडपी ने भारत की दीघावधि की बीबीबी- तथा लघु अवधि की अनापेक्षित विदेशी एवं स्थानीय मुद्रा सावरेन रेटिंग को ए-3 पर कायम रखा है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि स्थिर परिदृश्य हमारी इस उम्मीद को दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था कोविड-19 महामारी के बाद उबर जाएगी। देश की मजबूत बाह्य स्थिति वित्तीय दबाव के लिए एक बफर के रूप में काम करेगी। हालांकि, अगले 24 माह के दौरान सरकार को अतिरिक्त कोष की जरूरत होगी।

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