सीतापुर: घाघरा नदी में समा गए बाग व कई घर, ग्रामीणों में दहशत, पलायन को मजबूर

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सीतापुर। बैराजों से छोड़े गए पानी से गांजरी क्षेत्र में बहने वाली घाघरा नदी ने तटवर्ती इलाके में विनाशलीला शुरू कर दी है। घाघरा और शारदा नदियों के बढ़ते जलस्तर से क्षेत्र के करीब आधा दर्जन किसानों की कृषि योग्य भूमि व डेढ़ एकड़ बाग एवं चार घर कट कर नदी के आगोश में समा …

सीतापुर। बैराजों से छोड़े गए पानी से गांजरी क्षेत्र में बहने वाली घाघरा नदी ने तटवर्ती इलाके में विनाशलीला शुरू कर दी है। घाघरा और शारदा नदियों के बढ़ते जलस्तर से क्षेत्र के करीब आधा दर्जन किसानों की कृषि योग्य भूमि व डेढ़ एकड़ बाग एवं चार घर कट कर नदी के आगोश में समा गए हैं। बुधवार को मेउड़ी छोलहा के पूर्व प्रधान स्व. अजीज एवं हामिद अली की आम की बाग घाघरा नदी में समाहित हो गई।

इसके साथ ही किसान सलाउद्दीन, सफीकउद्दीन, कलीम, रियाजुद्दीन, अलीशेर, सद्दाम हुसैन सहित सत्रह बीघा कृषि योग्य भूमि नदियों के बढ़ते जलस्तर में कटकर समाहित हो गई। गोलोक कोडर के फौजदार पुरवा एवं ठेकेदार पुरवा गांव का अस्तित्व संकट में दिखाई दे रहा है। प्राथमिक विद्यालय फौजदार पुरवा कटान के मुहाने पर पहुंच चुका है। जहाँ 27 घरों को घाघरा नदी ने निगल लिया। गांव को कटा कटान से बचाने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा लाख प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन यह प्रयास सभी असफल दिखाई दे रहे हैं। 4 जिओ बैग फटकर घाघरा नदी के पानी में समाहित हो रहे हैं।

फौजदार पुरवा के राजकुमार, शोभाराम, बड़को, फूलमती एवं ठेकेदार पुरवा के रामनरेश ठाकुर, देई, अंकित, श्रीकेशन, बीपी, भेरूलाल, त्रिभुवन, सोबरन, अनुज, राम सहारे, श्यामलाल, रामप्रकाश, कौशल, राजकमल, संभारी, विशंभर, रामू, सुंदर, अमरीश, भिखारी यादव, विनोद, राकेश कुमार आदि ने नदी की कटान से भयभीत होकर अपने घरों को उजाड़ कर सुरक्षित स्थानों की तरफ पलायन कर रहे है। ग्रामीणों की भूमि को घाघरा नदी की विनाशकारी धाराओं ने निगल रही है। क्षेत्र में नदियों के घटते बढ़ते जलस्तर ने नदी के तटवर्ती इलाके के बाशिंदों का सुकून चैन छीन लिया है। कहीं ग्रामीण अपने घरों को हाथों से तोड़कर ईटों को ट्रैक्टर ट्राली में भरकर सुरक्षित स्थानों की तरफ पलायन कर रहे हैं।

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