मुरादाबाद : तफ्तीश में बेदाग हो गए भ्रष्ट अधिकारियो‍ं के दामन

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

मुरादाबाद,अमृत विचार। सरकारी विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी घूस लेते हुए रंगे हाथ पकड़े गए। इनके खिलाफ मुकदमे दर्ज कराकर उन्हें जेल भी भेजा गया। इसके बावजूद इनके दामन पर लगे भ्रष्टाचार के दाग जांच के दौरान साफ हो गए। भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने पिछले 20 वर्षों में 65 मामलों में अंतिम रिपोर्ट लगाई …

मुरादाबाद,अमृत विचार। सरकारी विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी घूस लेते हुए रंगे हाथ पकड़े गए। इनके खिलाफ मुकदमे दर्ज कराकर उन्हें जेल भी भेजा गया। इसके बावजूद इनके दामन पर लगे भ्रष्टाचार के दाग जांच के दौरान साफ हो गए। भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने पिछले 20 वर्षों में 65 मामलों में अंतिम रिपोर्ट लगाई है, जबकि 892 मामलों में आरोप पत्र दाखिल किए गए हैं।

मुगलपुरा निवासी आरटीआई कार्यकर्ता ने सूचना मांगी थी कि भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने पिछले 20 साल में कितने मामले ट्रैप किए, कितने केस दर्ज कराए गए और कितने मुकदमों में आरोप पत्र दाखिल किए गए। यह भी पूछा गया था कि कितने मामलों में अंतिम रिपोर्ट लगाई गई। इस मामले में पुलिस अधीक्षक जन सूचना अधिकारी ने जवाब दिया, जिसमें बताया गया कि वर्ष 2000 से 2020 के बीच कुल 892 मामलों में आरोप पत्र दाखिल किए गए। इस अवधि में 65 मामलों में अंतिम रिपोर्ट लगाई गई। खास बात यह रही कि जिस विभाग की टीम ने मेहनत करके ट्रैप किया, उसी विभाग के विवेचक इन्हें भ्रष्टाचारी साबित नहीं कर पाए।

2020 में पकड़े गए पांच मामले
भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने जनपद में वर्ष 2020 में पांच अधिकारियों को ट्रैप किया गया था, जबकि 2019 में 10 मामले ट्रैप हुए थे। इन सभी मामलों की जांच पूरी करने के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किए जा चुके हैं। सभी मामले अदालत में लंबित हैं। भोजपुर में अक्टूबर 2020 में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने लेखपाल नैपाल सिंह को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था। निरीक्षक एके सिंह ने बताया कि दो साल में 15 मामले ट्रैप किए गए हैं। सभी मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।

तीन वर्ष में सबसे ज्यादा लगीं फाइनल रिपोर्ट
आरटीआई के जरिए मांगी गई रिपोर्ट में पता चला है कि वर्ष 2002 में सबसे ज्यादा 19 मामलों में फाइनल रिपोर्ट लगाई गई थी। इसके बाद वर्ष 2005 में 13 और 2011 में आठ मामलों में एफआर लगाई गई।

वर्ष                        आरोप पत्र            अंतिम रिपोर्ट
2010                      15                      5
2011                      33                      8
2012                      10                      1
2013                      14                      0
2014                      23                      1
2015                      53                      0
2016                      34                      1
2018                      82                      0
2019                      98                      0
2020                      15                      0

संबंधित समाचार