बरेली: सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेंटर नहीं, तीसरी लहर में कैसे होगा इलाज

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बरेली, अमृत विचार। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से शासन द्वारा आमजन को बेहतर उपचार देने के प्रयासों की जिले में हवा निकल रही है। सरकार जिदंगी की हिफाजत का दम भरने के लिए अस्पताल खोलती है, किंतु जिले में एक भी सरकारी अस्पताल जीवन रक्षक प्रणाली की सुविधा से लैस नहीं हैं। जबकि कोरोना की तीसरी …

बरेली, अमृत विचार। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से शासन द्वारा आमजन को बेहतर उपचार देने के प्रयासों की जिले में हवा निकल रही है। सरकार जिदंगी की हिफाजत का दम भरने के लिए अस्पताल खोलती है, किंतु जिले में एक भी सरकारी अस्पताल जीवन रक्षक प्रणाली की सुविधा से लैस नहीं हैं। जबकि कोरोना की तीसरी लहर में सबसे ज्यादा खतरे में बच्चों को है। जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल में वेंटिलेंटर की सुविधा नहीं होने की दशा में जान बचाने के लिए तीमारदारों को निजी अस्पताल जाना पड़ता है। वहीं अस्पतालों में बेड पर मौजूद ऑक्सीजन सप्लाई भी काफी उपयोग सबित नहीं हो रही है।

सिर्फ तीन बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती
जिले में 100 बेड के जिला महिला अस्पताल में मौजूदा समय में तीन बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। रोजाना 10-15 प्रसव भी हो रहे हैं। इनमें से आधे मामले गंभीर होते हैं। इन नवजात शिशुओं को तत्काल जीवन रक्षक प्रणाली देने की जरूरत पड़ती है, क्योंकि समय से पहले जन्म लेने पर कई बार उनकी हालत गंभीर होती है। इस विकट स्थिति में वेंटिलेंटर की आवश्यक पड़ती है।

लखनऊ किया जाता रेफर
वेंटिलेंटर न होने के चलते ऐसे मामलों को लखनऊ रेफर कर दिया जाता है या फिर तीमारदार निजी अस्पताल के महंगे खर्च को वहन करते हैं। इस मामले में जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डा. अलका शर्मा ने बताया कि गंभीर बच्चों के उपचार के लिए एसएनसीयू की सुविधा उपलब्ध है। वेंटिलेंटर की अधिक आवश्यकता पड़ने पर तीमारदारों को जानकारी व अनुमति के बाद ही रेफर किया जाता है।

कोविड डेडिकेटेड सेंटर में धूल फांक रहा अस्पताल का वेंटिलेटर
जिला अस्पताल में रोजाना हजार से अधिक लोगों की ओपीडी व करीब सैंकड़ों मरीज भर्ती किए जाते हैं। वहीं जिला अस्पताल में आए मरीजों को बेहतर सुविधाओं के लिए एमएलसी रहे वसीम बरेलवी ने मंडल में तीन वेंटिलेंटर उपलब्ध कराए थे। स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) न होने के चलते जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से पहली लहर में बच्चों पर खतरे को देखते हुए एक वेंटिलेंटर 300 बेड वाले कोविड डेडिकेटेड सेंटर भेज दिया गया था।

वहां भी प्रशिक्षित स्टाफ न होने से वेंटिलेटर का संचालन नहीं हो पा रहा है। हालांकि जिला अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अस्पताल में वेंटिलेटर न होने के चलते कई बार आवश्यकता को देखते हुए न चाहते हुए भी शिशुओं को हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है, जिससे मरीज की जान बचाई सके लेकिन सीमित संसाधनों के चलते डाक्टर भी मजबूर हैं।

वेंटिलेटर होने के संबंध में गाइडलाइन नहीं
सीएमओ डा. एसके गर्ग ने बताया कि सीएचसी और पीएचसी में वेंटिलेटर होने के संबंध में कोई गाइडलाइन नहीं है। यहां हालत गंभीर होने पर तत्काल ही जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। शासन की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार सीएचसी-पीएचसी पर एमओआईसी के अलावा पांच विशेषज्ञों की तैनाती का प्रावधान है। यहां के प्रसवोत्तर केंद्र से भी औसतन 70 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को रेफर कर दिया जाता है।

संबंधित समाचार