मुरादाबाद : सात अपचारी देखने में तो लग रहे बालिग, लेकिन हमारे पास नहीं कोई रिकार्ड
मुरादाबाद,अमृत विचार। में कितने अपचारी बालिग हो गए है। इसका कोई रिकार्ड संप्रेक्षण गृह के स्टाफ के पास मौजूद नहीं है। यह बात आप को सुनने में थोड़ी अटपटी लग रही होगी, लेकिन ऐसा ही कुछ है। अमृत विचार की पड़ताल में इसकी हकीकत सामने आई है। कम उम्र में अपराध करने वाले बच्चों को …
मुरादाबाद,अमृत विचार। में कितने अपचारी बालिग हो गए है। इसका कोई रिकार्ड संप्रेक्षण गृह के स्टाफ के पास मौजूद नहीं है। यह बात आप को सुनने में थोड़ी अटपटी लग रही होगी, लेकिन ऐसा ही कुछ है। अमृत विचार की पड़ताल में इसकी हकीकत सामने आई है।
कम उम्र में अपराध करने वाले बच्चों को जिले के संप्रेक्षण गृह में रखा जाता है। यहां उन्हें शिक्षा के साथ-साथ ऐसी महौल दिया जाता है, जिससे वह बच्चे आगे चलकर कोई अपराध न करे। इस बीच जो अपचारी बालिग हो जाते है, उन्हें कानून कार्रवाई के तहत जिला कारगार में शिफ्ट कर दिया जाता है।
लेकिन पिछले काफी समय से संप्रेक्षण गृह से कोई भी ऐसी कार्रवाई नहीं की गई, जिसमें बालिगों को जिलाकारगार में शिफ्ट किया गया हो। इसकी पड़ताल करने के लिए अमृत विचार ने संप्रेक्षण गृह के प्रभारी सहायक अधीक्षक से जानकारी करनी चाही तो मामला कुछ और ही निकला। जानकारी करने पर पता चला कि संप्रेक्षण गृह के पास इस बात का रिकार्ड ही नहीं है कि उनके यहां कितने बच्चे अभी बालिग हो चुके है।
पूछने पर प्रभारी सहायक अधीक्षक ने कहा कि छह से सात अपचारी ऐसे है जो देखने में बालिक लग रहे है। लेकिन इनका रिकार्ड हमारे पास नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन अपचारियों का जिस कोर्ट में केस चल रहा है, वहीं उनकी उम्र का रिकार्ड रहता है। इसलिए हम कोर्ट में जाकर बालिक हुए अपचारियों की जानकारी लेंगे। इसके बाद उन बालिगों को मजिस्ट्रेट की देखरेख में जिला कारगार में शिफ्ट कराया जायेगा।
संप्रेक्षण गृह का महौल खराब करे रहे बालिग
अपराधिक मामलों में संप्रेक्षण गृह में मौजूद कई अपचारी बालिग हो गए है। लेकिन संप्रेक्षण गृह की लापरवाही के कारण उन्हे अभी तक जिला कारगार में शिफ्टी नहीं कराया गया है। ऐसे में बालिग हुए अपराधी संप्रेक्षण गृह का महौल खराब कर रहे है। जिसके कारण आये दिन संप्रेक्षण गृह में मारपीट की घटनाएं भी होती रहती है।
संप्रेक्षण गृह प्रभारी सहायक अधीक्षक रामप्रताप ने बताया कि सबसे बड़ी परेशानी यह है कि उम्र का कोई भी रिकार्ड हमारे पास नहीं रहता है। उम्र की जांच कोर्ट ही करता है। हमे इसका कोई रिकार्ड नहीं मिलता। लगभग छह-सात बच्चें है जो दिखने में बालिग लग रहे है। पहले हम कोर्ट में जाकर पता करेंगे कि कितने बच्चे बालिग हो गए है। इसके बाद बालिग हुए युवाओं को जिला कारगार भेजने की प्रक्रिया की जायेगी।
