लखीमपुर खीरी: नेपाल से आए जंगली हाथी बने मुसीबत
पलियाकलां/सिंगाही (लखीमपुर खीरी), अमृत विचार। दुधवा टाइगर रिजर्व में मानव-बाघ टकराव के बाद अब मानव-हाथी संघर्ष ने दस्तक दे दी है। यह संघर्ष बढने की संभावना है क्योंकि नेपाल से हाथियों के कुनवों का दुधवा टाइगर रिजर्व और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में आने का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। दुधवा प्रशासन पे वनकर्मियों को हाथियों …
पलियाकलां/सिंगाही (लखीमपुर खीरी), अमृत विचार। दुधवा टाइगर रिजर्व में मानव-बाघ टकराव के बाद अब मानव-हाथी संघर्ष ने दस्तक दे दी है। यह संघर्ष बढने की संभावना है क्योंकि नेपाल से हाथियों के कुनवों का दुधवा टाइगर रिजर्व और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में आने का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। दुधवा प्रशासन पे वनकर्मियों को हाथियों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
उधर सिंगाही में शनिवार की रात बथुआ जंगल से निकले हाथियों के झुंड ने दर्जनों किसानों के खेतों में खड़ी धान व गन्ने की फसल को रौंद कर तहस नहस कर दिया। पीड़ित किसानों परविंदर सिंह, गुरपेच सिंह, हरमेल सिंह, मंगल सिंह, गुरदीप सिंह, जसपाल सिंह आदि ने बताया की जान जोखिम में डालकर आवारा पशुओं से बचाकर फसल को तैयार किया, लेकिन हाथियों के झुंड ने फसल को रौंदकर बर्बाद कर दिया। पीड़ित किसानों ने मुआवजा की मांग की।
दुधवा नेशनल पार्क, कतर्नियाघाट और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में हाथी नेपाल के पांच कारीडोर से आते हैं। इन दिनों नेपाल के शुक्लाफांटा जंगल से निकलकर पीलीभीत होते हुए जंगली हाथियों के इन झुंडों ने कीरतपुर और बनकटी रेंज जंगल, किशनपुर सेंक्च्युरी और बफरजोन की मैलानी रेंज में डेरा डाल दिया है। फील्ड डायरेक्टर,दुधवा नेशनल पार्क संजय पाठक ने कहा कि नेपाल के हाथियों का आना नई बात नहीं है लेकिन, कुछ वर्षों से ये हाथी दुधवा के आसपास ही रह रहे हैं। जंगल से बाहर निकलने पर ग्रामीणों का नुकसान होता है। इसलिए अब बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। इस संदर्भ में अधीनस्थों को बराबर नजर रखने के आदेश दे दिए गए हैं।
फील्ड डायरेक्टर,दुधवा नेशनल पार्क संजय पाठक ने कहा कि नेपाल के हाथियों का आना नई बात नहीं है लेकिन, कुछ वर्षों से ये हाथी दुधवा के आसपास ही रह रहे हैं। जंगल से बाहर निकलने पर ग्रामीणों का नुकसान होता है। इसलिए अब बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। इस संदर्भ में अधीनस्थों को बराबर नजर रखने के आदेश दे दिए गए हैं।
