लखीमपुर-खीरी: यहां मास्क नहीं, दिन में मच्छरदानी लगाते हैं ग्रामीण
मैगलगंज (खीरी)/लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। मास्क हो न हो लेकिन मच्छरदानी के बिना एक पल भी जीना दुश्वार हो रहा है। पोल्ट्री फार्म के चलते कई गांवों में मक्खियों ने ग्रामीणों को परेशानी में डाल रखा है। उनका खाना-पीना मुश्किल हो गया है। धरना-प्रदर्शनों के बाद आश्वासन मिले लेकिन कोई हल नहीं निकला। हालत ये है कि …
मैगलगंज (खीरी)/लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। मास्क हो न हो लेकिन मच्छरदानी के बिना एक पल भी जीना दुश्वार हो रहा है। पोल्ट्री फार्म के चलते कई गांवों में मक्खियों ने ग्रामीणों को परेशानी में डाल रखा है। उनका खाना-पीना मुश्किल हो गया है। धरना-प्रदर्शनों के बाद आश्वासन मिले लेकिन कोई हल नहीं निकला। हालत ये है कि ग्रामीण मच्छरदानी में बैठकर खाना खाते हैं।

मैगलगंज इलाके के अब्बासपुर ग्राम पंचायत में लगभग दो साल पूर्व बरनाला पोल्ट्री फार्म खोला गया था जिसमें मुर्गी पालन बहुत बड़े स्तर पर किया जाता है। प्रबंधन द्वारा मुर्गियों द्वारा डिस्चार्ज किये गए मल मूत्र को निस्तारित करने की कोई व्यवस्था नहीं की गई जिसके कारण पनप रही गंदगी से मक्खियों की पैदावार शुरू हो गई। धीरे-धीरे इन मक्खियों का प्रकोप आस-पड़ोस के गांवों तक पहुंचने लगा। दो साल में यह समस्या इतनी विकराल हो चली है कि अब्बासपुर, डंडौरा, अलियापुर, सेमराघाट, चपरतला, हैरमखेड़ा, इछनापुर, गांधीग्राम, महुआढाब आदि गांवों में लोगों का जीना दूभर हो गया।

इन गांवों के वाशिन्दों की स्थिति यह है कि जानलेवा कोरोना से कम मक्खियों से ज्यादा भयभीत हैं। मक्खियों के कारण ग्रामीणों का सोना जागना खाना-पीना सब दुश्वार हो गया है। हालात यह हैं कि खाने-पीने की वस्तुएं, बर्तन, कपड़े, बिस्तर आदि हर वस्तु पर मक्खियों का झुंड भिनभिनाता रहता है। हर घर में मच्छरदानी बंधी हुई हैं। मक्खियों के प्रकोप से बचने के लिए घर के दरवाजों व खिड़कियों को मच्छरदानी का मास्क पहना दिया।

कई बार ग्रामीणों ने पोल्ट्री फार्म प्रबंधन व मालिक से भी बात की लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला। लोगों ने धरना-प्रदर्शन भी किये। शासन-प्रशासन से भी गुहार लगाई लेकिन सिर्फ आश्वासन मिले। शासन-प्रशासन से राहत मिलने की उम्मीद छोड़ चुके तमाम ग्रामीणों ने अपना गांव, खेती बाड़ी, घरबार सब कुछ छोड़कर कहीं दूसरी जगह आशियाना बनाने का फैसला कर लिया है। अब्बासपुर के चार परिवार घरों में ताला डाल व खेती ठेका बटाई देकर रिस्तेदारों के यहां जा चुके हैं। यदि शासन प्रशासन ने इस समस्या पर समय रहते ध्यान नहीं दिया तो इस इलाके में पोल्ट्री फार्म तो रहेगा लेकिन गांव उजड़ जाएंगे।
डीएम डॉ अरविंद कुमार चौरसिया ने कहा कि कृषि विभाग के कीट वैज्ञानिक (इंटोमोलॉजिक) को दस दिन पहले पत्र लिखा गया था कि वह मौके पर आकर जांच करें कि आखिर मक्खियां क्यों आ रही हैं। कारण मिलने पर हम समस्या खत्म करने का प्रयास करेंगे।
