बरेली: 12. 68 अरब की भूमि यूपीसीडा को 250 करोड़ में चाहिए
बरेली, अमृत विचार। 1960 में मुंबई के सेठ किलाचंद को राज्य सरकार ने एक विक्रय पत्र के आधार पर 309554 रुपए में 5585592 वर्ग मीटर भूमि दी थी। करीब 38 साल फैक्ट्री चली। इसके बाद 1999 में बंद हो गयी लेकिन धीरे-धीरे भूमि की कीमत बढ़ती गयी। तब न सरकार और न ही किलाचंद ने …
बरेली, अमृत विचार। 1960 में मुंबई के सेठ किलाचंद को राज्य सरकार ने एक विक्रय पत्र के आधार पर 309554 रुपए में 5585592 वर्ग मीटर भूमि दी थी। करीब 38 साल फैक्ट्री चली। इसके बाद 1999 में बंद हो गयी लेकिन धीरे-धीरे भूमि की कीमत बढ़ती गयी। तब न सरकार और न ही किलाचंद ने सोचा होगा कि बंद फैक्ट्री वाली भूमि की कीमत 60 साल के बाद 12. 68 अरब हो जाएगी। अब भूमि पर मालिकाना हक के लिए बाम्बे हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है।
विक्रय पत्र को आधार बनाते हुए राज्य सरकार भूमि पर पुनर्प्रवेश और स्वामित्व के लिए केस लड़ रही है लेकिन इस बीच भूमि को विक्रय करने के लिए यूपीसीडा (उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण) से बात भी चलायी गयी। यूपीसीडा ने भूमि डेवलपमेंट प्लान बनाते हुए सर्वे किया। यहां पर दो हाईटेक कालोनियों को विकसित करने का खाका भी तैयार कर लिया लेकिन यूपीसीडा इस भूमि को महज 250 करोड़ में लेना चाहती है।
इस संबंध में यूपीसीडा के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी राजेश कुमार राय की ओर से 2 जुलाई को एक पत्र उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के विशेष सचिव डा. मुथु कुमार स्वामी बी को भेजा गया था। जिसमें बताया गया कि भूमि पर ट्रांस गंगा सिटी और सरस्वती हाईटेक सिटी को विकसित करने के लिए यूपीसीडा ने रिपोर्ट तैयार की है। जून माह में वर्तमान में औद्योगिक एवं आवासीय भूखंडों को विक्रय करने की संभावित दर का आकलन भी किया। यूपीसीडा ने सलाहकार बोर्ड से सलाह ली।
सरस्वती हाईटेक सिटी के विकास कार्यों के मानकों के आधार पर वर्ष 2015 में आयी लागत पर सात प्रतिशत मुद्रास्फीति जोड़ते हुए भूमि की लागत की चार विभिन्न स्थितियों में विभिन्न भू-उपयोग के भूखंडों का अनुमानित प्रीमियम दर तथा उसके विपणन का विवरण तैयार कराकर प्रस्तुत भी किया लेकिन उसमें गणना शीट के अनुसार अधिकतम 250 करोड़ रुपए की लागत पर ही भूमि प्राप्त होने की बात कही। यह भी कहा कि इससे अधिक लागत पर भूमि प्राप्त होने पर भूखंडों की विपणन (विक्रय) दरों की व्यवहार्यता नहीं रहेगी।
यूपीसीडा ने भूमि का डेवलपमेंट प्लान ऐसे बनाया
यूपीसीडा ने भूमि की डेवलपमेंट लागत 2.82 करोड़ प्रति एकड़ की दर से निकलवायी। इसमें औद्योगिक भूखंड के लिए लीज प्रीमियम 1143.44 करोड़, संस्थागत भूखंड की लीज प्रीमियम 231.80 करोड़, आवासीय भूखंड की लीज प्रीमियम 1236.26 करोड़, वाणिज्य भूखंड के लिए लीज प्रीमियम 309.07 करोड़ की बनी। इसके साथ 2.01 करोड़ प्रति एकड़ की दर से भूमि की डेवलपमेंट लागत निकलवायी। इसमें औद्योगिक भूखंड के लिए लीज प्रीमियम 855.009 करोड़, संस्थागत के लिए 173.312 करोड़, आवासीय भूखंड के लिए 924.436 करोड़ और वाणिज्य भूखंड के लिए 231.104 करोड़ की लीज प्रीमियम निकलवायी।
इतनी भूमि पहले ही फैक्ट्री की बिक चुकी है
रबर फैक्ट्री 1999 में व्यापारिक कारणों से बंद हुई थी। वर्ष 1982 में राज्य सरकार को बीएसएफ कैंप स्थापित किए जाने के लिए 100 एकड़ (40.4686 हेक्टेयर भूमि) की आवश्यकता होने पर उक्त भूमि से सौ एकड़ भूमि 11300.08 रुपए का भगतान कर पुनर्ग्रहीत की गयी थी। यह फैक्ट्री बरेली राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-24 पर स्थित है। इसकी 9.3746 हेक्टेयर भूमि राजमार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के लिए वर्ष 2008-09 में अर्जित की गयी थी। अर्जन से प्रतिकर के रूप में 42248522 रुपए प्राप्त हुए थे। उक्त धनराशि रबर फैक्ट्री के खाते में हस्तांतरित न करके परियोजना निदेशक एनएचएआई व विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के संयुक्त बैंक खाते में जमा है। इसके बाद वर्ततान में अब रबर फैक्ट्री की 508.707 हेक्टेयर (1256.65 एकड़) भूमि अवशेष है।
भूमि के संबंध में 23 जुलाई को वीडियो कान्फ्रेंसिंग
रबर फैक्ट्री की भूमि के संबंध में अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास विभाग उप्र शासन की अध्यक्षता में 23 जुलाई को दोपहर 1 बजे ऑनलाइन/वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक बुलायी गयी है। संयुक्त सचिव अनिल कुमार की ओर से यूपीसीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, आयुक्त बरेली, जिलाधिकारी और बॉबे हाईकोर्ट में सरकार का केस लड़ रहे अधिवक्ता रमेश दुबे पाटिल को भी पत्र भेजा गया है। मीटिंग आईडी और पासवर्ड भी जारी किया गया है।
