कानपुर: मंदिरों में हुई गुरु पूर्णिमा की पूजा, भक्तों ने लगाई गांगा में आस्था की डुबकी

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कानपुर। शहर के विभिन्न मंदिरों और घरों में गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया गया। प्रति वर्ष आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को यह त्योहार मनाया जाता है। ज्योतिषों की माने तो इस बार यह पर्व बहुत खास है। पूर्णिमा पर दो ग्रह अपनी ही राशि में रहेंगे, साथ ही चार शुभ योग बना रहे हैं। सितारों …

कानपुर। शहर के विभिन्न मंदिरों और घरों में गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया गया। प्रति वर्ष आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को यह त्योहार मनाया जाता है। ज्योतिषों की माने तो इस बार यह पर्व बहुत खास है। पूर्णिमा पर दो ग्रह अपनी ही राशि में रहेंगे, साथ ही चार शुभ योग बना रहे हैं। सितारों की शुभ स्थिति के प्रभाव से आषाढ़ पूर्णिमा (आषादी) पर स्नान, दान और पूजा-पाठ का विशेष फल मिलेगा। इस शुभ अवसर पर खरीदारी, निवेश और लेन-देन करने से लाभ होगा।

सुबह से ही शहर के मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखने को मिली। कोरोना संक्रमण के चलते अधिकतर लोगों ने कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए, पूजा- पाठ की। शहर प्रमुख गंगा घाटों पर स्नान-ध्यान करने वालों की खासी भीड़ रही। सोशल डिस्टेसिंग और कोरोना संक्रमण से बचाव के कारण इस बार कई जगहों पर गुरू और शिष्यों के बीच दूरी रही । ऐसे गुरू में के चित्र की पूजा, मानसिक नमस्कार और सोशल मीडिया की मदद से गुरू पूर्णिमा का पर्व मनाया गया।

हिंदू धर्म में स्नान-दान की है पुरानी परम्परा
बिठूर, गंगा बैराज, परमठ, जाजमऊ, मैग्नीज और सरसैया घाट सहित तमाम जगहों पर भक्तों ने गंगा जी में स्नान कर दान पुण्य किया । के हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार आज के दिन पित्रों का पूजन करने से कई गुना फल मिलता है। सूर्योदय से पहले उठकर नहा लेना चाहिए । कोरोना संक्रमण के कारण घाटों पर विगत वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष कम भीड़ देखने को मिली। इसीलिए अधिकतर लोगों ने घर पर ही पानी में गंगा जल या अन्य पवित्र नदियों का जल मिलाकर स्नान किया।

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