बरेली: बढ़ा कुत्‍तों का आतंक, रोज अस्‍पताल पहुंच रहे लगभग 100 मरीज

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार।  शहर से लेकर देहात तक आवारा कुत्तों का आतंक हावी है। आए दिन कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में बच्चे घर से निकलने में डर रहे हैं। शुक्रवार को भी कुत्तों के हमले से चार बच्चे घायल हो गए। परिवार वाले उन्हें जिला अस्पताल में ले गए। …

बरेली, अमृत विचार।  शहर से लेकर देहात तक आवारा कुत्तों का आतंक हावी है। आए दिन कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में बच्चे घर से निकलने में डर रहे हैं। शुक्रवार को भी कुत्तों के हमले से चार बच्चे घायल हो गए। परिवार वाले उन्हें जिला अस्पताल में ले गए। उपचार के बाद डाक्टरों ने उनकी हालत अब खतरे से बाहर बताई है। लगातार कुत्तों के आतंक से क्षेत्र के लोगों में दहशत का महौल है। लोग निजी अस्पताल में कुत्ते काटे का इंजेक्शन महंगा होने के कारण जिला अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाने पहुंच रहे हैं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार रोजाना करीब 100 लोगों को एआरवी लगाया जा रहा है।

पहले भी हुईं कई मौतें
कुत्तों के हमले का यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि इसके पहले भी कुत्तों के हमले में कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं। बरेली की बहेड़ी तहसील में कुत्तों के हमले में सबसे ज्यादा मौत हुई हैं। बच्चों की मौत के बाद प्रशासन बड़े-बड़े दावे करता है और अभियान भी चलाता है लेकिन कुछ दिनों बाद फिर मौन हो जाता है। सीबीगंज के बंडिया गांव और पस्तोर कॉलोनी में कुत्तों के हमले में एक बच्ची और लड़के की जान जा चुकी है।

अवैध बूचड़खाने से कुत्ते हुए हिंसक
जिले में अब भी कई जगह चोरी छिपे पशु काटे जाते हैं और उनके अवशेष खुले में फेंक दिए जाते हैं, जिन्हें खाकर कुत्ते हिंसक होते जा रहे हैं। जब उन्हें मांस नहीं मिलता तो वो बच्चों पर हमला कर देते हैं। इनके शिकार तमाम लोग जिला अस्पताल में इंजेक्शन लगवाने पहुंचते हैं।

नगर निगम की लापरवाही से हो रहीं घटनाएं
गांव के लोगों का कहना है कि मोहल्ले में लगभग एक साल पूर्व भी आधा दर्जन बच्चों को कुत्तों ने अपना शिकार बनाया था। इसके बाद भी नगर निगम ने कुत्तों को पकड़ने की जहमत नहीं उठाई है। अब एक साथ चार बच्चों पर कुत्ते के हमले के बाद मोहल्ले में दहशत का माहौल बना हुआ है। डर की वजह से बच्चे घरों में कैद हैं। सूचना देने पर कोई सरकारी टीम अब तक नहीं पहुंची है। इससे मोहल्ले के लोगों में रोष व्याप्त है।

व्यवहार परिवर्तन भी एक वजह
आईवीआरआई के वैज्ञानिकों के अनुसार बारिश के मौसम के बाद कुत्ते अधिक आक्रामक हो जाते हैं। व्यवहार परिवर्तन के बारे में शोध करने पर सामने आया कि गाड़ियों की चपेट में आने से कुत्तों के बच्चों की मौत होती है। ऐसे में कुत्ते चिड़चिढ़े हो जाते हैं। गाड़ियों के पीछे भागते हैं और लोगों को काट भी लेते हैं। इसके अतिरिक्त बारिश में खाने-पीने की चीजें बह जाती हैं। भूखे होने से मानसिक असर पड़ता है। उनकी ब्रीडिंग की जरूरत भी हावी होती है। इन्हीं वजहों से कुत्ते हमलावर हो जाते हैं।

जिला अस्पताल में भरपूर व्यवस्थाएं
जिला अस्पताल के मंडलीय अपर निदेशक एवं प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. सुबोध शर्मा ने बताया कि जिला अस्पताल में रोजाना करीब 100 लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई जाती है। कोरोना गाइडलाइन का पालन हो सके, इसके लिए ओपीडी से हटाकर एआरवी इंजेक्शन फिजियोथेरेपी विभाग में लगाया जा रहा है। ओपीडी खुलने के बाद पांच हजार से अधिक लोगों को एआरवी लगाई जा चुकी है। बीते दिनों एआरवी की कमी होने पर शासन से मांग के बाद पर्याप्त स्टाक हो गया है।

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