बरेली: नगर निगम नहीं बना सका दुकानों के दाखिल-खारिज की नीति
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम की दुकानों के कराए गए सर्वे में यह सामने आया है कि करीब 600 मूल आवंटियों के वारिसानों ने अपनी दुकानों का दाखिल-खारिज नहीं कराया है। ऐसे दुकानदारों को नोटिस दिए गए हैं लेकिन दिक्कत यह आ रही है कि नगर निगम प्रशासन ने अब दुकानों के नामांतरण के लिए …
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम की दुकानों के कराए गए सर्वे में यह सामने आया है कि करीब 600 मूल आवंटियों के वारिसानों ने अपनी दुकानों का दाखिल-खारिज नहीं कराया है। ऐसे दुकानदारों को नोटिस दिए गए हैं लेकिन दिक्कत यह आ रही है कि नगर निगम प्रशासन ने अब दुकानों के नामांतरण के लिए कोई नीति ही नहीं बनाई गई है।
करीब डेढ़ साल पहले इसकी कोशिश भी हुई थी लेकिन पूरी कवायद बाद में कागजों में ही सिमट कर रह गई थी। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस नीति को बनाने के लिए फिर से काम कराया जा रहा है।
शहर के विभिन्न 51 बाजारों में बनीं नगर निगम की 1350 दुकानों को लेकर एक के बाद एक बड़ी गड़बड़ियां उजागर हो रही हैं। इन गड़बड़ियों पर पूर्व में तैनात रहे नगर निगम के कई अफसर-सर्वेयरों की मिलीभगत से पर्दा डाले रखा गया। नगर निगम की दुकानों की जांच में एक और यह बड़ा मामला सामने आया है कि नगर निगम की 60 से 70 साल तक की पुरानी दुकानों के अधिकांश मूल आवंटी अब इस दुनिया में नहीं रहे।
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इसके बावजूद उनके नाम किराए की रसीदें कट रही हैं। जबकि नियमानुसार इसका मृतक आवंटियों के उत्तराधिकारियों के नाम दाखिल-खारिज होना चाहिए ताकि नगर निगम प्रशासन के रिकार्ड में वर्तमान किराएदारों के नाम का ब्योरा दर्ज हो सके, लेकिन दुकानदारों की ओर से अब तक दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को ही पूरा नहीं किया गया है। इसका सर्वे कराया तो चौंकाने वाला मामला यह सामने आया है कि करीब 50 फीसदी लगभग 600 दुकानदारों ने दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को ही पूरा नहीं किया है।
नगर निगम प्रशासन ने इसके लिए अलग से पोर्टल भी तैयार किया है। बताते हैं कि इसमें अब तक करीब 400 दुकानदारों ने इस प्रक्रिया के लिए अपने ब्योरे भी अपलोड कर दिए हैं। दिक्कत यह आ रही है कि नगर निगम प्रशासन ने अब तक दाखिल-खारिज की कोई नीति ही नहीं बनाई है। करीब डेढ़ साल पहले नगर आयुक्त एम. सैमुअल पॉल के नेतृत्व में टीम बनाकर दाखिल-खारिज की नीति बनाने की कोशिश भी हुई थी लेकिन यह प्रक्रिया अधर में ही लटक गई।
अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने बताया कि नगर निगम की दुकानों को दाखिल खारिज करने की नीति बनाने की कोशिश चल रही है। जल्द ही इस पर निर्णय होते ही लंबित मामलों का निस्तारण होगा।
