AAP ने कसा तंज, कहा- बिजली समझौते की सच्चाई अमरिंदर को देर से समझ आई

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चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई ने कहा है कि विधानसभा चुनाव निकट आने पर अमरिंदर सरकार को समझ आया है कि बिजली खरीद समझौतों की समीक्षा या रद्द किये जायें। प्रतिपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा ने आज यहां पत्रकारों से कहा कि बिजली समझौतों की समीक्षा या रद्द करने के लिये मुख्यमंत्री ने …

चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई ने कहा है कि विधानसभा चुनाव निकट आने पर अमरिंदर सरकार को समझ आया है कि बिजली खरीद समझौतों की समीक्षा या रद्द किये जायें। प्रतिपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा ने आज यहां पत्रकारों से कहा कि बिजली समझौतों की समीक्षा या रद्द करने के लिये मुख्यमंत्री ने पीएसपीसीएल को पत्र लिखा है। यदि मुख्यमंत्री सच में ही गंभीर हैं तो मंत्रिमंडल की बैठक में और फिर विधानसभा सत्र में पीपीएज समझौते रद्द करवाएं जिन्हें पिछली अकाली-भाजपा सरकार में कैबिनेट ने पास किया था।

हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यह चिट्ठी का खेल पंजाब के लोगों के साथ धोखा और कांग्रेस सरकार की टाइम पास की एक चाल है। कैप्टन सिंह जनता को स्पष्ट करें कि वो मंत्रिमंडल की बैठक बुलाने से क्यों भाग रहे हैं। आज 41 दिन हो गए मंत्रिमंडल की कोई बैठक ही नहीं बुलाई गई। आज तक ऐसा नहीं हुआ कि इतने दिनों तक मंत्रिमंडल की बैठक ही न बुलाई गई हो।

प्रतिपक्ष के नेता ने बताया कि मुख्यमंत्री की इस चिट्ठी ने एक बात साफ कर दी कि आप पार्टी बिजली समझौते रद्द करने का जो मुद्दा पिछले कई सालों से गली मोहल्लों से लेकर विधानसभा में उठाती आ रही है और धरने प्रदर्शन करती आ रही, वह बिल्कुल सही और लोक हितैषी है।

इससे हमारे ये आरोप सही होते हैं कि बादलों ने निजी बिजली कंपनियों के साथ कमीशन (दलाली) निर्धारित की हुई थी और वही दलाली बाद में कांग्रेस सरकार ने लेना शुरू कर दिया। जिस कारण कैप्टन-जाखड़ समेत सब चुप हो गए और नवजोत सिद्धू बिजली विभाग संभालने से पीछे हट गए।

मोनटेक सिंह आहलूवालिया समिति की सिफारिशों के बारे में हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि समिति पंजाब के लोगों को दी जाने वाली बिजली समेत सभी सब्सिडी खत्म करना चाहती है। आहलूवालिया वही सिफारिशें कर रहे जो मोदी सरकार के नए बिजली संशोधन बिल 2021 के द्वारा थोपने की कोशिशें हो रही हैं।

सरकार आहलूवालिया समिति की सिफारिशों को भी विधानसभा के जरिये हमेशा के लिए रद्द करे। उन्होंने मांग की है कि बिजली समझौते समीक्षा और रद्द करने की कार्यवाही भी हाईकोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए। इसके साथ ही पंजाब के खजाने और लोगों को अंधाधुंध लूटने वाले बादलों, बिजली कंपनियों, अफसरों और दलालों के पास से अरबों रुपए वापस करवाए जाएं।

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