लखीमपुर खीरी: पतली रस्सी के ऊपर पहिए पर चलती है इनकी जिंदगी

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संसारपुर/लखीमपुर खीरी, अमृत विचार। दे दाता के नाम तुझको अल्लाह रखे, तू एक पैसा देखा वो दस लाख देखा… फिल्मों के गीतों की पंक्तियों के साथ वह पांच साल की लड़की दो डंडों के सहारे ऊंचाई पर बंधी पतली रस्सी पर करतब दिखा रही थी। उसके हैरतअंगेज कारनामे देख लोग तालियां बजाते हैं। बालिका कभी …

संसारपुर/लखीमपुर खीरी, अमृत विचार। दे दाता के नाम तुझको अल्लाह रखे, तू एक पैसा देखा वो दस लाख देखा… फिल्मों के गीतों की पंक्तियों के साथ वह पांच साल की लड़की दो डंडों के सहारे ऊंचाई पर बंधी पतली रस्सी पर करतब दिखा रही थी। उसके हैरतअंगेज कारनामे देख लोग तालियां बजाते हैं।

बालिका कभी रस्सी पर साइकिल का पहिया चलाती है, कभी पैरों के नीचे स्टील प्लेट रखकर रस्सी पर चलती है, तो कभी सिर पर एक के ऊपर एक पांच लोटे रख कमाल दिखाती है। जरा सा बैलेंस बिगड़े तो यकीन जानिए बच्ची के साथ दुर्घटना निश्चित है लेकिन पापी पेट के लिए जान जोखिम में डालना मंजूर।

लोग जब मुग्ध हो वाह-वाह करने लगते हैं तब बालिका की बड़ी बहन और माता गिड़गिड़ाने के अंदाज में कहती है कि पापी पेट का सवाल है। कुछ मदद कर दो बाबू। तमाशा देख रहे लोग कुछ रुपए इनकी और बढ़ा देते हैं। मां-बेटियां जो कुछ मिला उससे संतुष्टि और असंतुष्टि के मिले-जुले भावों के साथ अपना सामान समेटती हैं और किसी दूसरे ठिकाने पर जिंदगी जीने के लिए तमाश दिखाने निकल पड़ते हैं।

गरीबी हटाओ, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, सर्व शिक्षा अभियान, शिक्षा का अधिकार आदि अभियान व प्रावधान का सड़कों पर इसी तरह मजाक उड़ता दिखाई देता है। सड़कों पर नजर दौड़ा लीजीए। देखिए कि किस तरह अपना और परिवार का पेट भरने को मासूम बच्चे मौत का खेल खेलते हैं। जिन्हें स्कूलों में ककहरा सीखना चाहिए था, वे जान जोखिम में डालकर करतब दिखाते हैं। हाथ में कटोरा लेकर लोगों से रुपये मांगते हैं।

पांच साल की बच्ची के पतली रस्सी पर चलने का करतब देख रहे एक युवक ने कहा कि जीने के लिए इन्हें कुछ न कुछ तो करना ही होगा। हम यह भी जानते हैं कि जनता द्वारा पैसे दिए जाने से इन कार्यों से जुड़े लोगों में बच्चों को प्रयोग करने का मनोबल बढ़ता है किंतु इनकी दशा पर आंखें मूँद कर भी नहीं बैठ सकते इसलिए दया भाव के कारण खुद-ब-खुद जेब से रुपए निकालकर देने के लिए विवश हो जाते हैं।

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