बरेली: टेंडर पास होने के बाद भी नहीं शुरू हुए 512 निर्माण
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम के निर्माण विभाग के इंजीनियरों की एक बार फिर से बड़ी लापरवाही सामने आई है। शहर के सड़क-नाली सहित दूसरे कामों के लिए 500 से ज्यादा टेंडर अप्रैल में ही हो गए थे, लेकिन तीन माह गुजरने के बाद भी इन कामों के लिए अब तक वर्क ऑर्डर जारी नहीं …
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम के निर्माण विभाग के इंजीनियरों की एक बार फिर से बड़ी लापरवाही सामने आई है। शहर के सड़क-नाली सहित दूसरे कामों के लिए 500 से ज्यादा टेंडर अप्रैल में ही हो गए थे, लेकिन तीन माह गुजरने के बाद भी इन कामों के लिए अब तक वर्क ऑर्डर जारी नहीं हुए हैं। इस वजह से ये सभी काम अब भी नहीं शुरू किए जा सके हैं। शहर के विकास को ठप करने वाले अभियंताओं को अब रडार पर लिया गया है। उनसे इस बड़ी ढिलाई के लिए जवाब मांगा जा रहा है। मेयर ने इन सभी मामलों को लेकर निर्माण विभाग के अभियंताओं से जवाब-तलब किया है।
शहर के लगभग सभी 80 वार्डों में सड़क व नाली निर्माण के लिए 700 से ज्यादा कामों के टेंडर कराए गए थे लेकिन बारिश आने से पहले गली-मोहल्लों और कॉलोनियों के आंतरिक मार्गों के साथ नालियों के कामों को ठीक कराया जा सके। इसमें एक काम औसतन 10 से 15 लाख रुपए के बीच का है। जबकि, निर्माण विभाग के इंजीनियरों ने इन कामों को लेकर कोई दिलचस्पी ही नहीं दिखाई। हाल में उनकी यह लापरवाही सामने आई कि लगभग 512 कामों के टेंडर अप्रैल में होने के बावजूद उनके निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए वर्क ऑर्डर अब तक जारी नहीं किए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि ये सभी काम करीब 50 से 60 करोड़ रुपए तक के हैं। ऐसे में करोड़ों के काम स्वीकृत होने और उनके टेंडर होने के बावजूद नगर निगम के इंजीनियर इन कामों की फाइल दबाए बैठे हैं। नगर निगम निर्माण विभाग की यह लापरवाही सामने आने के बाद मेयर डॉ. उमेश गौतम ने इंजीनियरों को निशाने पर लिया है। उन्होंने निर्माण विभाग के अभियंताओं को नोटिस देते हुए यह पूछा है कि इन कामों को अब तक क्यों नहीं शुरू कराया गया है? साथ ही अभियंताओं को 15 अगस्त तक किसी दशा में इन कामों को शुरू करने की समय सीमा भी निर्धारित कर दी गई है।
पहले भी निशाने पर आ चुके निर्माण विभाग के इंजीनियर
अभी कुछ दिन पहले भी निर्माण विभाग के इंजीनियर निशाने पर आए थे। नगर निगम ने शहर में तमाम सड़कों के निर्माण कराए थे लेकिन वह कुछ ही महीने में टूटने और उधड़ने शुरू हो गए। पार्षदों की शिकायत के बाद मेयर ने तमाम मामलों में निर्माण विभाग के इंजीनियरों के खिलाफ लिखा-पढ़ी भी की थी लेकिन बाद में मामला ठंडा पड़ गया। कुछ पार्षदों ने सड़क की मरम्मत हो जाने का तर्क देते हुए शिकायत को वापस भी ले लिया था।
अफसर समीक्षाएं करते रहे और खाली बैठे रहे इंजीनियर
नगर निगम प्रशासन ने अप्रैल में ही बड़ी संख्या में निर्माण कार्यों के टेंडर करा दिए थे लेकिन निर्माण विभाग के इंजीनियरों ने इसे समय से पूरा कराने को लेकर लापरवाही दिखाई। जबकि, नगर निगम के अधिकारी समीक्षाएं करते रह गए लेकिन वर्क ऑर्डर न कर निर्माण कार्य शुरू न कराने वाले इंजीनियरों पर शिकंजा नहीं कसा। अब यह मामला खुला और खलबली मची हुई है।
डॉ. उमेश गौतम, मेयर ने बताया कि निर्माण विभाग ने बड़ी संख्या में निर्माण कार्यों के टेंडर होने के बावजूद वर्क ऑर्डर ही नहीं दिए हैं। इससे शहर के विकास पर खराब असर पड़ा है। इस संबंध में चीफ इंजीनियर को नोटिस दिया गया है।
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