यूपी: योगी सरकार की जीरो टॅालरेंस नीति के तहत जनिए कितने भ्रष्ट अधिकारियों पर हुई कार्रवाई

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लखनऊ। भ्रष्टाचार के खिलाफ योगी सरकार कि जीरो टॉलरेंस पॉलिसी को अमली जामा पहनाते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने भ्रष्ट अधिकारियों पर जबरजस्त शिकंजा कसा है। इसी का परिणाम है कि वर्ष 2018 जनवरी से अभी तक 232 भ्रष्ट कर्मचारियों व अधिकारियों पर कार्रवाही की गई है। प्रदेश में सबसे भ्रष्ट कर्मचारी राजस्व विभाग के …

लखनऊ। भ्रष्टाचार के खिलाफ योगी सरकार कि जीरो टॉलरेंस पॉलिसी को अमली जामा पहनाते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने भ्रष्ट अधिकारियों पर जबरजस्त शिकंजा कसा है। इसी का परिणाम है कि वर्ष 2018 जनवरी से अभी तक 232 भ्रष्ट कर्मचारियों व अधिकारियों पर कार्रवाही की गई है। प्रदेश में सबसे भ्रष्ट कर्मचारी राजस्व विभाग के हैं। उसके बाद दूसरा नंबर पुलिस विभाग का है। बीते साढे़ तीन वर्षों में ट्रैप के माध्यम से राजस्व के जहां 91 कर्मचारी घूस लेते हुए धरे गए तो वहीं घूस लेते रंगे हाथ धरे गए पुलिस कर्मियों की संख्या भी करीब ढाई दर्जन के पास है।

राजस्व,पुलिस के साथ ही अन्य विभागों के भ्रष्टचारियों पर कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने अभी तक 3989000 रुपए की धनराशि भी पकड़ी है। भ्रष्टाचार निवारण संगठन के पुलिस अधीक्षक राजीव मेहरोत्रा बताया कि ट्रैप के माध्य से वर्ष 2018 में 80 कर्मचारियों पर कार्रवाई कर 1544000 रुपए की धनराशि पकड़ी गई। वहीं 2019 में भ्रष्ट कर्मियों पर कार्रवाई का यह आंकड़ा 100 तक पहुंच गया और इनसे 1722000 रुपए एवं वर्ष 2020 में कुल 34 मामलों पर कार्रवाई करते हुए 522000 रुपए की धनराशि पकड़ी गई है।

वर्तमान समय में चल रहे वर्ष 2021 के जुलाई माह तक 18 भ्रष्ट कर्मचारियों-अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए 201000 रुपए की धनराशि पकड़ी गई है। भ्रष्टाचारियों पर यह कार्रवाही भ्रष्टाचार निवारण संगठन की 11 जिलों की यूनिटों एवं टास्क फोर्स द्वारा की गई है। जिन जिला इकाईयों द्वारा यह कार्रवाई की गई है उनमें वाराणसी, गोरखपुर, आगरा, बरेली, लखनऊ, कानपुर, झांसी, मेरठ, मुरादाबाद, अयोध्या के साथ ही टास्क फोर्स की टीम शामिल है।

एंटी करप्शन कोर्ट में होती है सुनवाई
भ्रष्टाचार संगठन के एसपी राजीव मेहरोत्रा के अनुसार किसी भी अराजपत्रित अधिकारी या कर्मचारी को ट्रैप करने के बाद संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कराई जाती है। मुकदमें की विवेचना भी संगठन द्वारा की जाती है। जिस लोक सेवक के खिलाफ कार्रवाई की जाती है उस मामले में दो माह के अंदर चार्जशीट दाखिल करनी होती है। पकड़े गए सरकारी कर्मचारी के खिलाफ उसके विभागध्यक्ष को अभियोजन की स्वीकृति देने के लिए पत्र लिखा जाता है। संगठन द्वारा पकड़े गए कर्मचारियों के मामलों की सुनवाई सामान्य न्यायालय में न होकर लखनऊ, गोरखपुर, बरेली, मेरठ और वाराणसी में स्थित एंटी करप्शन के विशेष न्यायालय में होती है।

2018-19 में हुई 180 कर्मियों पर हुई कार्रवाई, 3266000 रुपये बरामद
भ्रष्टाचार निवारण संगठन द्वारा वर्ष 2018-19 में विभिन्न विभागों के 180 कर्मियों पर कार्रवाई हुई। इनमें राजस्व कर्मियों की संख्या 65 और पुलिसकर्मियों की संख्या 21 है। इसके साथ ही पंचायतीराज के 8, बेसिक शिक्षा 8, उप्र पावर कारपोरेशन के 15, आवास-विकास एवं विकास प्राधिकरण के 4, पीडब्यूडी के 3, चिकित्सा विभाग के 3, चकबंदी के 3, शिक्षा विभाग के 5 के साथ ही सिंचाई, खाद्य एवं रसद, मनोरंजन कर, उद्यान, समाज कल्याण, कोषागार, श्रम, वन, पेंशन, बाट एवं माप, पशुपालन, कारागार, नगर-निगम, ग्रामोद्योग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के साथ ही कईअन्य विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। इन दोनों वर्षों में पकड़े गए भ्रष्टचारियों से 3266000 रुपए की धनराशि जब्त की गई है।

2020-21 में 52 कर्मियों पर हुई कार्रवाई, पकड़े गए 723000 रुपये, वर्ष 2018-19 के मुकाबले वर्ष 2020-21 में भ्रष्टचारियों की संख्या में कमी आई है। वर्ष 2020 से लेकर जुलाई 2021 तक कुल 52 कर्मियों पर कार्रवाई की गई। इनके पास से संगठन के अधिकारियों ने 723000 रुपये की धनराशि जब्त की है। वर्ष 2020 में घूस लेते हुए 16 राजस्वकर्मी पकड़े गए तो वहीं पुलिसकर्मियों की संख्या 6 रही। वहीं उप्र पावर कारपोरेशन, उप्र परिवहन विभाग, बेसिक शिक्षा और नगर निगम के भी दो-दो कर्मचारी पकड़े गए। इनके पास से संगठन ने 522000 रुपये की धनराशि बरामद की। वर्ष 2021 के जुलाई माह तक कुल 18 ट्रैप किए गए। इनमें राजस्व के 10 के साथ ही दो पुलिसकर्मियों के साथ अन्य विभागों के कर्मचारी शामिल रहे। इनके पास से टीम ने 201000 रुपए की धनराशि पकड़ी है।

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