बरेली: मातृत्व अवकाश न देने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो कांपे अफसर
बरेली, अमृत विचार। जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) में एक महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश न देने का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित महिला का आरोप है कि प्रसव के कुछ ही दिन बाद उन्हें वापस ड्यूटी पर बुलाने का दबाव बनाया गया। उन्होंने असमर्थता जताई तो उसे नौकरी से निकालने या दूरस्थ जिले …
बरेली, अमृत विचार। जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) में एक महिला कर्मचारी को मातृत्व अवकाश न देने का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित महिला का आरोप है कि प्रसव के कुछ ही दिन बाद उन्हें वापस ड्यूटी पर बुलाने का दबाव बनाया गया। उन्होंने असमर्थता जताई तो उसे नौकरी से निकालने या दूरस्थ जिले में स्थानांतरित करने की तैयारी चलने लगी।
इस मामले में सुनवाई नहीं हुई तो पीड़ित महिला डूडा के पीडी सहित कई अफसरों के खिलाफ हाई कोर्ट इलाहाबाद चली गई। अब इस प्रकरण को लेकर अफसरों के बीच खलबली मची हुई है। जिसके बाद डूडा के पीडी को बुलाकर अपर नगर आयुक्त काफी देर तक इस प्रकरण में पूछताछ करते रहे।
डूडा दफ्तर में राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) की सिटी मिशन मैनेजर मनोरमा बिष्ट करीब छह साल से कार्यरत हैं। उनका कहना है कि डॉक्टर की राय के बाद प्रसव के लिए उन्होंने 5 जनवरी 2021 को एक माह का अवकाश लिया था। 1 फरवरी को ई-मेल के माध्यम से दो महीने घर से काम करने की अनुमति चाही थी।
उनका कहना है कि प्रसव के बाद वह पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं हुई थी और नवजात बच्चा भी था लेकिन उन्होंने इस दौरान ही बार-बार वापस काम पर बुलाने का दबाव डाला गया जब उन्होंने ऐसा करने में असमर्थता जाहिर की तो उन्हें नौकरी से हटाने या दूर किसी दूसरे जिले में स्थानांतरित करने की तैयारी की जाने लगी। उन्होंने डूडा के परियोजना निदेशक अभिषेक आनंद और परियोजना अधिकारी शैलेंद्र भूषण से कई बार आग्रह कर अपनी व अपने बच्चे की देखभाल के लिए बगैर अवकाश के छुट्टी की स्वीकृति मांगी लेकिन कर्मचारी का कहना है कि अफसरों ने नहीं सुनी और वे संवेदनहीन बने रहे। इस पर महिला कर्मी अफसरों के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट चली गई।
कोर्ट में दायर याचिका में महिला कर्मी मनोरमा बिष्ट ने 1961 एक्ट के तहत राहत मांगी है। कोर्ट के इस मामला का संज्ञान लेने के बाद डूडा के अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया चूंकि डूडा के परियोजना अधिकारी नगर आयुक्त हैं, इसलिए उन्होंने पीओ को इस मामले की सभी पत्रावली के साथ तलब करते हुए पूछताछ की है। इस मामले में अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने डूडा के पीओ शैलेंद्र भूषण को बुलाकर काफी देर तक जानकारी ली। इस मामले में कोर्ट में पार्टी बनाए गए अफसरों को जवाब देने हैं, इसलिए उनके बीच प्रकरण को लेकर हड़कंप मचा हुआ है।
एनयूएलएम में 10 से कम कर्मचारी, इसलिए नहीं लागू होता नियम
अफसरों का तर्क है कि महिला कर्मचारी आउटसोर्सिंग कंपनी से नियुक्त है और उसकी शर्तों के अनुसार मातृत्व अवकाश दिए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह का कहना है कि एनयूएलएम में 10 से कम आठ ही कर्मचारी हैं। इसलिए वहां मातृत्व अवकाश के नियम लागू नहीं होते। जबकि, महिला कर्मी ने कोर्ट में 1961 एक्ट के तहत ऐसे प्रावधान का दावा किया है।
सिटी मिशन मैनेजर, डूडा मनोरमा बिष्ट ने बताया कि मैंने मानवता के आधार पर अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई थी कि मुझे घर से काम करने की स्वीकृति देने या वेतन से कटौती के साथ अवकाश देने की कृपा की जाए लेकिन सुनवाई न होती देख मैंने हाईकोर्ट इलाहाबाद कोर्ट में याचिका दायर की है।
परियोजना अधिकारी, डूडा शैलेंद्र भूषण ने कहा कि संबंधित महिला कर्मी आउटसोर्सिंग पर तैनात है। इसलिए उनकी सेवा शर्तों की जानकारी ली जा रही है। साथ ही विधिक राय लेने के साथ हाईकोर्ट को जवाब भेजा जा रहा है।
अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने कहा कि नगर आयुक्त के निर्देश के बाद मैंने पीओ डूडा को बुलाकर इस मामले की जानकारी ली है। इसमें कानून पक्ष को जाना जा रहा है। इसके बाद न्यायालय में जवाब दाखिल करने की तैयारी है।
