राज्यपाल ने प्रशिक्षण शिविर का किया उद्घाटन, कहा- गर्भ संस्कार का भी कोई पाठ्यक्रम…

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लखनऊ। स्वस्थ और संस्कारवान बच्चों के निर्माण के लिए कुछ नए प्रयोग करने होंगे। आज के इस तकनीकी युग में यह आवश्यक हो गया है कि विश्वविद्यालय ऐसे पाठ्यक्रमों का सृजन करें, जिसके माध्यम से भविष्य में माता-पिता बनने वाले आज के छात्र-छात्राओं को गर्भ संस्कार की शिक्षा दी जा सके। वहीं विश्वविद्यालयों में भी …

लखनऊ। स्वस्थ और संस्कारवान बच्चों के निर्माण के लिए कुछ नए प्रयोग करने होंगे। आज के इस तकनीकी युग में यह आवश्यक हो गया है कि विश्वविद्यालय ऐसे पाठ्यक्रमों का सृजन करें, जिसके माध्यम से भविष्य में माता-पिता बनने वाले आज के छात्र-छात्राओं को गर्भ संस्कार की शिक्षा दी जा सके। वहीं विश्वविद्यालयों में भी गर्भ संस्कार का पाठ्यक्रम बेहद जरूरी है। ये बात राज्यपाल आनंदी बेन पटेल नहीं कही। राज्यपाल शुक्रवार को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के आईईटी परिसर में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा विश्व के सबसे बड़े गैर सरकारी शैक्षिक संस्थान विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के सहयोग से आयोजित आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित कर रहीं थीं। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में बहुत बल है। इसमें तीन वर्ष, चार से पांच व 5 से 6 वर्ष के आयुवर्ग की शिक्षा आंगनबाड़ी केंद्र का भाग है। भारत का भविष्य बनाने के लिए नन्हे-मुन्नों को संस्कारित शिक्षा दी जानी चाहिए। बच्चे को 7 वर्ष तक जो सिखाया व पढ़ाया जाता है, उसका 80 फीसदी उनकी आदत में ढल जाता है।

आंगनबाड़ी से पता चलेगा बच्चों का दोष 
राज्यपाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति में पहले पांच साल में तीन साल आंगनबाड़ी के लिए हैं। बच्चा घर में जो भी गलत-सही कार्य करेगा, वह आंगनबाड़ी में भी करेगा। हमारे बच्चों में बेहतर और दोष क्या है इसका पता आंगनबाड़ी से ही चल सकता है और इसी आधार पर उनका भविष्य निखारा जा सकता है। राज्यपाल ने कहा कि शिशु शिक्षा गर्भाधान से लेकर सात साल तक होती है, ऐसे में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की भूमिका और बड़ी हो जाती है।

देश भविष्य का निर्माण कर रही आंगनबाड़ी कार्यकत्री 
राज्यपाल ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां हमारे देश के भविष्य का निर्माण करने का काम कर रही हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां बच्चों को उठने-बैठने, हाथ-पैर ऊपर-नीचे करने आदि का सलीका सिखाएं। खेल, खिलौना, प्रदर्शनी कीट आदि के माध्यम से भाषा, गणित, विज्ञान, रंगों, अंकों का ज्ञान कराएं। पर्यावरण, संयुक्त परिवार, राष्ट्रप्रेम, अच्छी सीख विषयक बाल कहानियां रोचक ढंग से सुनाएं। बच्चों के सुनने, पूछने व बोलने की सहभागिता कराएं, ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके।

50 फीसदी महिलाओं में हीमोग्लोबिन की कमी 
राज्यपाल ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां महिला ग्राम प्रधान के साथ मिलकर कार्य करें। उन्होंने कहा कि मां जब बीमार होगी तक बीमार बच्चे को ही जन्म देगी, ऐसे में हमें इस पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज 50 फीसदी महिलाओं में हीमोग्लोबिन की कमी है, जो चिंता का विषय है।

41 लाख बच्चों का भविष्य सवांर रहे आगंनबाड़ी केन्द्र 
इस मौके पर उपस्थित महिला एवं बाल विकास मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वाती सिंह ने कहा आगंनबाड़ी कार्यकत्रियों से बड़ी अपेक्षायें हैं। वह जैसे अपने बच्चों के साथ रहती हैं, उसी भावना के साथ आंगनबाड़ी के बच्चों के साथ भी करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 1,88,982 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जहां 41 लाख से अधिक बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ये बच्चे प्रारंभिक शिक्षा लेकर अपनी नींव मजबूत करके आगे आएंगे और देश का भविष्य उज्ज्वल करेंगे।

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