लखनऊ: मेट्रो के नीचे आने वाली सड़कों पर नहीं दिखती स्ट्रीट लाइटें, हादसे व अपराध का डर
लखनऊ। यह प्रदेश की राजधानी लखनऊ है के ऊपर से गुजरती मेट्रो के नीचे साफ सुथरी और चौड़ी सड़कें दिन में बड़ा सुकूनदायक अहसास कराती हैं, लेकिन रात ढलते ही यहां अंधेरा छा जाता है। क्योंकि नगर निगम ने यहां स्ट्रीट लाइटें ही नहीं लगाई हैं। क्योंकि स्ट्रीट लाइटों के लग जाने से यहां लगे …
लखनऊ। यह प्रदेश की राजधानी लखनऊ है के ऊपर से गुजरती मेट्रो के नीचे साफ सुथरी और चौड़ी सड़कें दिन में बड़ा सुकूनदायक अहसास कराती हैं, लेकिन रात ढलते ही यहां अंधेरा छा जाता है। क्योंकि नगर निगम ने यहां स्ट्रीट लाइटें ही नहीं लगाई हैं। क्योंकि स्ट्रीट लाइटों के लग जाने से यहां लगे विज्ञापन के होर्डिंगों की चमक फीकी पड़ जाएगी। कंपनियों को यह फायदा पहुंचाते समय अफसर भूल गए कि इस अंधेरे का फायदा असामाजिक तत्व भी उठा सकते हैं और इससे हादसों का भी खतरा है।
शहर में वैसे तो सड़कों पर नगर निगम की स्ट्रीट लाइटें शाम ढलते ही चमकना शुरू हो जाती हैं, लेकिन मेट्रो लाइन के नीचे कहीं यह इंतजाम नजर नहीं आता। यहां डिवाइडर पर लगे विज्ञापन के होर्डिंगों से आ रही हल्की रोशनी से ही राहगीरों को काम चलाना पड़ता है। रात आठ बजे लखनऊ विश्वविद्यालय के पास से गुजर रहे त्रिवेणीनगर निवासी त्रिपुरेश शुक्ला कहते हैं कि यहां अंधेरे की वजह से हर वक्त डर सा लगता है।
इस बारे में मेट्रो कार्पोरेशन के अफसर साफ हाथ उठा देते हैं। यूपीएमआरसी के उप महाप्रबंधक पंचानन मिश्र कहते हैं कि कार्पोरेशन ने सड़कें बनाने के बाद संबंधित विभागों को हैंडओवर कर दिया है। इसलिए यहां स्ट्रीट लाइट लगाने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की है। स्टेशन के नीचे के हिस्से में कार्पोरेशन ने लाइटें लगवा रखी हैं, जबकि कायदे से यह काम भी इन्हीं सरकारी एजेंसियों को करना चाहिए।
सरकार को क्यों नहीं दिखता ये अंधेरा
शहर की इन्हीं सड़कों से रातदिन प्रदेश के शीर्ष अधिकारी से लेकर नगर विकास मंत्री तक गुजरते हैं, लेकिन किसी को यह अंधेरा जाने क्यों नहीं खटक रहा है। वर्ना राजधानी में यह अंधेरा अब तक कायम नहीं रहता।
मेट्रो लाइन के नीचे स्ट्रीट लाइट किसे लगवानी है, फिलहाल यह मेरी जानकारी में नहीं है। यदि नगर निगम को लगवाना होगा तो जल्द ही ये लाइटें लगवा दी जाएंगी-अजय कुमार द्विवेदी, नगर आयुक्त।
