सुमित हत्याकंड: पिता ने मानवाधिकार आयोग से लगाई न्याय की गुहार, जानें पूरा मामला?
लखनऊ। हत्या के एक मामले में पुत्र को फंसाने का आरोप लगाकर पिता ने न्याय के लिए मानवाधिकार आयोग से गुहार लगाई है। इस बावत उन्होंने आयोग के अध्यक्ष को एक प्रार्थना पत्र देने के साथ ही मामले से संबंधित कुछ फोटोग्राफ व वीडियो भी उपलब्ध कराए हैं। पीड़ित अरुण प्रकाश सिंह का कहना है …
लखनऊ। हत्या के एक मामले में पुत्र को फंसाने का आरोप लगाकर पिता ने न्याय के लिए मानवाधिकार आयोग से गुहार लगाई है। इस बावत उन्होंने आयोग के अध्यक्ष को एक प्रार्थना पत्र देने के साथ ही मामले से संबंधित कुछ फोटोग्राफ व वीडियो भी उपलब्ध कराए हैं। पीड़ित अरुण प्रकाश सिंह का कहना है कि वह त्रिवेणीनगर के रहने वाले हैं और उनके पुत्र का नाम आदेश सिंह है। आदेश की मित्रता आयुष पांडेय से थी। जिसकी बहन मानसी ने दो वर्ष पूर्व सुमित मिश्रा से लव मैरिज शादी कर ली थी। शादी के बाद वह आदेश के मकान के बगल में ही रहने लगा।
पीड़ित ने बताया कि इस दौरान वह रोज अपनी पत्नी को शराब के नशे में मारता था और उसका गलत दुरुप्रयोग करना चाह रहा था। इस बात की जानकारी उनके पुत्र आदेश ने मानसी के परिजनों को दी थी। जिसके बाद वह आदेश से रंजिश रखने लगा और घर आकर गाली-गलौज व जान से मारने की धमकी देने लगा। इस मामले में मानसी ने सुमित के खिलाफ अलीगंज थाने में मामला भी दर्ज कराया था।
अरुण प्रकाश का कहना है कि 16 जुलाई को मेरे पुत्र आदेश, उसके मित्र आयुष एवं विपक्षी सुमित व उसके साथी का आमना सामना हुआ और जमकर मारपीट हुई। जिसके बाद आयुष ने मामले की जानकारी 112 को दी। मौके पर दो सिपाही पहुंचे और उन्होंने सुमित व उसके साथी को लाठी से जमकर पीटा। जससे उसकी नाक से खून निकलने लगा। इसके बाद पुलिस सबको लेकर थाने पहुंची। सुमित और उसकी साथी की हालत खराब देखकर पुलिस उन्हें भाऊराव देवरस अस्पताल ले गई। जहां से उन्हें सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया।
सिविल पहुंचने के पहले ही सुमित की मौत हो गई। अरुण प्रकाश का कहना है कि पुलिस ने अपने बचाव में तथ्यों को छिपाकर आयुष व आदेश के ऊपर हत्या का आरोप मढ़ दिया। इस बावत सुमित की मां मनोरमा मिश्रा ने झूठी कहानी बनाकर रंजीशन आयुष व आदेश के खिलाफ हत्या का नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया। उनका कहना है कि उनका पुत्र निर्दोंस है। मानवाधिकारी आयोग पूरे मामले की जांच करवाकर हमें न्याय दिलाए।
