मिशन यूपी: किसानों व शिक्षकों की नाराजगी भुनाने के लिए सपा ने बनाया यह प्लान!
लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) नाराज किसानों और शिक्षकों के सहारे लक्ष्य 2022 साधने की तैयारी में हैं। इसके लिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें समर्थन देकर अपनी ओर से सियासी चाल चल दी है। साथ ही किसानों और शिक्षकों के आंदोलन के लिए भारतीय जनता पार्टी की केंद्र व प्रदेश सरकार को …
लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) नाराज किसानों और शिक्षकों के सहारे लक्ष्य 2022 साधने की तैयारी में हैं। इसके लिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें समर्थन देकर अपनी ओर से सियासी चाल चल दी है। साथ ही किसानों और शिक्षकों के आंदोलन के लिए भारतीय जनता पार्टी की केंद्र व प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। कोरोना काल की दूसरी लहर की अव्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरने और पीड़ितों का सहारा बनने का प्रयास कर रही है।
साढ़े चार साल से सत्ता से दूर सपा अब अपनी राजनीतिक भूमि तैयार करने में जुट गई है। करीब छह माह बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में समाजवादी पार्टी उन वर्गों को समर्थन दे रहे हैं, जिनमें भारतीय जनता पार्टी की केंद्र व प्रदेश सरकार के प्रति काफी आक्रोश व्याप्त हैं और वे लगातार सरकार के खिलाफ आंदोलनरत है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खुले मंच से किसानों और शिक्षकों की समस्याओं को बयां किया और साथ ही उनकी पीड़ा के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए उन्हें समर्थन देने की घोषणा की। प्रदेश में लगातार सपा अपनी पैठ बढ़ाने के लिए जगह-जगह विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलन कर विरोध जता रही है।
सरकार को चेता भी रही है कि इन आंदोलन का असर उनके लिए हानिकारक हो सकता है। पश्चिमी यूपी की बात की जाएं तो वहां किसान आंदोलन काफी तेजी से चल रहा है। दूसरी ओर, किसानों के लिए आंदोलनरत भारतीय किसान यूनियन को भी अपनी ओर समर्थन दे दिया है। इधर, 69 हजार शिक्षक भर्ती के मामले में भी सपा आगे बढ़कर आई है और प्रदेश सरकार से नाराज शिक्षक काफी समय से भर्ती की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा शिक्षकों में शिक्षा मित्र, तदर्थ शिक्षक आदि भी लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करते रहते हैं।
कोरोना मृतक आश्रित की मदद का वादा
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा भी किया है यदि 2022 में सरकार बनी तो कोरोना काल में हुई मौतों की जांच कराएंगे और मृतक आश्रितों की मदद करेंगे। इस बयान से भी उन्होंने कोरोना काल की दूसरी लहर में जिन लोगों ने अपनों को खोया है और उन्होंने केंद्र व प्रदेश सरकार की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्हें भी सपा अपने पक्ष में करने की रणनीति तैयार कर ली है। कोरोना की दूसरी लहर में देश व प्रदेश में बड़ी संख्या में लोगों मौत हुईं हैं। साथ ही रेमडेसिवीर इंजेक्शन और ऑक्सीजन की कालाबाजारी भी जमकर हुई। मौतों को आकड़ा इतना बढ़ गया कि अंतिम संस्कार के लिए भी लाइन लगी। इन सभी मुद्दों को लेकर सपा भाजपा सरकार को घेरने की तैयारी में है। सपा मुखिया अखिलेश यादव का कहना है कि कोरोना काल में ध्वस्त स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पूरी तरह भाजपा सरकार जवाबदेह है।
जातीय जनगणना भी हो सकता है बेहतर विकल्प
अखिलेश ने कहा कि केंद्र की सरकार जातीय जनगणना नहीं करना चाहती है। समाजवादी पार्टी की मांग है कि सभी जातियों की जनगणना हो। समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर सबसे पहले जातीय जनगणना की जाएगी। चूंकि दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है इसलिए अखिलेश सियासी बिसात को इस तरह से बिछाने में लगे हुए हैं, ताकि आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के विरोध के स्वर उनके लिए संजीवनी का काम करें और एक बार फिर उनके हाथ प्रदेश की सत्ता की चाबी आ जाएं।
