यूपी: जितेंद्र सिंह बबलू प्रकरण से भाजपा ने लिया सबक, ज्वाइनिंग सिस्टम पर शुरू हुआ मंथन

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

लखनऊ। पूर्व विधायक जितेंद्र सिंह बबलू को पार्टी में शामिल करने के बाद जो फजीहत हुई। उसने पार्टी को अपने ज्वाइनिंग सिस्टम पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। यही नहीं टिकट वितरण के दौरान भी इस तरह के वाकये न आएं, इसके लिए जिला व क्षेत्र स्तर पर स्क्रीनिंग कमेटी की जिम्मेदारी तय …

लखनऊ। पूर्व विधायक जितेंद्र सिंह बबलू को पार्टी में शामिल करने के बाद जो फजीहत हुई। उसने पार्टी को अपने ज्वाइनिंग सिस्टम पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। यही नहीं टिकट वितरण के दौरान भी इस तरह के वाकये न आएं, इसके लिए जिला व क्षेत्र स्तर पर स्क्रीनिंग कमेटी की जिम्मेदारी तय करने पर विचार किया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी में यों तो किसी भी नए व्यक्ति को शामिल करने की संस्तुति जिले और क्षेत्र से ही आती है, लेकिन प्रभावशाली व्यक्तियों के दबाव में कई बार सही रिपोर्ट प्रदेश या राष्ट्रीय नेतृत्व तक नहीं पहुंचती।

चुनावों के दौरान जिन प्रत्याशियों का चयन होता है, उनकी छवि को लेकर जिले या क्षेत्र से अक्सर रिपोर्ट गड़बड़ हो रही है। यही वजह है कि जिला पंचायत चुनाव के दौरान दुष्कर्म मामले में सजायाफ्ता पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की पत्नी संगीता सेंगर को सदस्य पद का प्रत्याशी बना दिया गया था और फिर सेंगर के करीबी अरुण सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष का प्रत्याशी बना दिया गया। जिसे लेकर राष्ट्रीय स्तर पर हंगामा हुआ और यह टिकट बदलने पड़े थे।

अब बबलू का प्रकरण आने के बाद इस विषय को लेकर पार्टी गंभीर है, क्योंकि विधानसभा चुनाव का बिगुल पार्टी बजा चुकी है और वह विपक्ष को कोई मुददा थमाना नहीं चाहती। इसलिए जिला व क्षेत्र स्तर पर स्क्रीनिंग करने वाले पदाधिकारियों को इस बारे में सचेत कर उनकी जिम्मेदारी तय करने पर विचार हो रहा है। हालांकि कोई पार्टी पदाधिकारी इस मामले में खुलकर कुछ नहीं बोल रहा है, लेकिन प्रदेश प्रवक्ता हरिश्चंद्र श्रीवास्तव कहते हैं कि यह व्यवस्था पार्टी में पहले से है, कभी कभार ही ऐसे मामले सामने आते हैं।

संबंधित समाचार