मुरादाबाद: दिल्ली से लखनऊ के बीच बढ़ेगी ट्रेनों की स्पीड, मंडल में रिकार्ड 400 किलोमीटर बदली गई पटरी
मुरादाबाद,अमृत विचार। अब दिल्ली से लखनऊ के बीच ट्रेनों की गति बढ़ सकेगी। यह संभव हो पाया है रेल प्रबंधन के प्रयासों से। कोरोना काल के लॉकडाउन में इंजीनियरिंग विभाग ने रेल पटरी बदलने का रिकार्ड कार्य कर दिया। यानी की इस साल मंडल में 400 किलोमीटर रेल पटरी बदल दी गई। मेन लाइन के …
मुरादाबाद,अमृत विचार। अब दिल्ली से लखनऊ के बीच ट्रेनों की गति बढ़ सकेगी। यह संभव हो पाया है रेल प्रबंधन के प्रयासों से। कोरोना काल के लॉकडाउन में इंजीनियरिंग विभाग ने रेल पटरी बदलने का रिकार्ड कार्य कर दिया। यानी की इस साल मंडल में 400 किलोमीटर रेल पटरी बदल दी गई। मेन लाइन के स्लीपर नए मानक के लगाए गए हैं। जबकि कई सेक्शन में नए लक्ष्य आधारित गति का परीक्षण भी हो चुका है। रेल प्रबंधन को गति बढ़ाने के बड़ौदा हाउस के नए आदेश का इंतजार है।
मंडल में क्यूआरटी के सहारे रेल ट्रैक बदले गए हें। इस उपकरण के सहयोग से मुख्य लाइन पर 400 किमी पटरी बदली जा चुकी है। जबकि चालू बर्ष में 250 किमी लंबी रेल पटरी बदलने का लक्ष्य था। मंडल में 19 लेबल क्रासिंग की जगह 41 फाटक इंटरलाक किए गए हैं। इससे ट्रेनों का समयबद्ध और सुरक्षित संचालन संभव हो पाता है। रेल पटरी बदलने और ट्रैक रिन्यूवल की वजह से इस साल मंडल में केवल तीन रेल हादसे हुए हैं। पिछले साल यह संख्या 11 थी, लेकिन पुरानी रेल पटरी बदलने के प्रभावी प्रयास से ट्रेनों की गति बढ़ाने का कार्य यहां संभव दिख रहा है।
सूत्रों का कहना है कि मुरादाबाद से आलमबाग के बीच कॉशन और अन्य कारणों से टाइम लास 50 मिनट की जगह 30 से 35 मिनट के बीच आ गया है। टाइम लास दो स्टेशनों के बीच ट्रेनों के निर्धारित समय के बीच कुछ समय की छूट को माना जाता है।
यानी कि ट्रेन के रवाना होने से निर्धारित स्टेशन पर पहुंचने के समय में विलंब की कुछ गुंजाइश दी जाती है। मुरादाबाद से आलमबाग के बीच यह सीमा 24 मिनट है। लेकिन, कुछ दिनों से यह 50 मिनट हो गया था। सेक्शनल गति बढ़ने के बाद ट्रेनों का समयबद्ध संचालन संभव होगा। रेल पटरी बदलने की वजह से नया लक्ष्य हासिल हो सकेगा। दिल्ली से लखनऊ के बीच ट्रेनों की गति बढ़ सकेगी।
मुरादाबाद-गाजियाबाद सेक्शन का हो चुका है ट्रायल
कमिश्नर आफ रेल सेफ्टी (सीआरएस) से रोजा अलीगढ़ सेक्शन के निरीक्षण के दौरान गाजियाबाद-मुरादाबाद सेक्शन का परीक्षण हुआ। 110-120 की स्पीड वाले सेक्शन में 130 किमी प्रति घंटे की गति से ट्रेन को चलाया जा चुका है। रेल अधिकारियों ने हाल में इस सेक्शन का ट्रायल किया था। ऐसा इसलिए कि इस सेक्शन को नए लक्ष्य के लिए तैयार किया जा सकेगा। यानी कि मेन लाइनों पर ट्रेनों की गति बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
मुरादाबाद-बरेली रूट पर हैं बहुत कॉशन
तकनीकी वजह और रेल लाइनों की कमजोरी की वजह से मुरादाबाद- बरेली रूट के बीच ट्रेनों को फुल स्पीड से नहीं चलाया जा रहा है। साल 2017-18 में रामपुर के नजदीक कोसी नदी के पार राज्यरानी एक्सप्रेस के आठ डिब्बे बेपटरी हो गए थे। जांच में इस बात के प्रमाण मिले थे कि रेल पटरी टूटने से हादसा हुआ था।
यानी की पुरानी पटरी को समय से बदला नहीं जा सका था। इसके बाद दलपतपुर, रामपुर से बरेली के कई स्टेशनों के बीच ट्रेनों को कॉशन में चलाए जाने के आदेश जारी हो गए थे। फिलहाल मुरादबाद- बरेली के बीच ट्रेनों को अधिकतम 100 किमी प्रति घंटे की गति से चलाए जाने के निर्देश है। लेकिन काशन की वजह से कोई ट्रेन निर्धारित गति से नहीं चलाई जाती है।
अजय नंदन, मंडल रेल प्रबंधक ने बताया कि ट्रेनों के संचालन बंद होने के दौरान पटरी बदलने का रिकार्ड कार्य हुआ है। मंडल में 400 किलोमीटर रेल पटरी बदली गयी है। नए मानक के आधार पर 325 किलोग्राम के स्लीपर लगाए गए हैं। सिग्नल एण्ड टेलिकाल विभाग ने अतिआधुनिक उपकरण स्थापित किए हैं। इन सबका लाभ गति और संरक्षा कार्य में मिलेगा। गाजियाबाद-मुरादाबाद और मुरादाबाद से आलमबाग तक स्पीड में वृद्धि संभव होगी। हम 110-120 सेक्शन में 130 किमी स्पीड से ट्रेनों के चलाएंगे और 100-110 वाले सेक्शन में 120 की स्पीड से ट्रेनों के चलाने का लक्ष्य पूरा करेंगे। –
