बरेली: मशीन लर्निंग से गंगा के पानी की शुद्धता जान सकते हैं
बरेली, अमृत विचार। कम्प्यूटर आधारित टूल्स से गंगा के पानी की गुणवत्ता का पता लगाकर प्रदूषण दूर किया जा सकता है। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कम्प्यूटर साइंस के शोधार्थी अनिल कुमार बिष्ट ने “एप्लीकेशन ऑफ कम्प्यूटेशन टेक्निक्स इन वॉटर क्वालिटी फोर कास्टिंग मॉडल: अ केस स्टडी ऑफ गंगा रिवर” विषय पर शोध पूरा किया है। …
बरेली, अमृत विचार। कम्प्यूटर आधारित टूल्स से गंगा के पानी की गुणवत्ता का पता लगाकर प्रदूषण दूर किया जा सकता है। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कम्प्यूटर साइंस के शोधार्थी अनिल कुमार बिष्ट ने “एप्लीकेशन ऑफ कम्प्यूटेशन टेक्निक्स इन वॉटर क्वालिटी फोर कास्टिंग मॉडल: अ केस स्टडी ऑफ गंगा रिवर” विषय पर शोध पूरा किया है। उन्होंने प्रोफेसर रविंद्र सिंह के निर्देशन में शोध कार्य पूरा किया। इनके शोध प्रबंध को गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के प्रो. करमजीत भाटिया ने परीक्षण के बाद ऑनलाइन माध्यम से सफलतापूर्वक मौखिकी संपन्न करायी।
अनिल बिष्ट ने गंगा नदी की पानी की गुणवत्ता और उसके भविष्य में अनुमान पर अपना शोध पूरा किया। उन्होंने उत्तराखंड के पांच स्थानों देवप्रयाग, ऋषिकेश, हरिद्वार, ज्वालापुर व एक अन्य जगह के गंगा नदी के 2001 से 2015 के पानी के आंकड़ों का एनालिसिस किया जिसमें पाया कि गंगा का पानी ए क्लास यानी पीने योग्य है।
सरकारी आंकड़ों से भी जब मिलान किया गया तो 95 फीसदी आंकड़ा सही रहा। इनका शोध कई अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स और चैप्टर में प्रकाशित हुआ। सुप्रीम कोर्ट की 2009 में सरकार को गंगा नदी की पानी की गुणवत्ता के लिए कोई टेक्नोलॉजिकल समाधान निकालने के दिशा-निर्देश ने डॉ बिष्ट को इस शोध कार्य को करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने बताया कि नदी के पानी की गुणवत्ता का कम्प्यूटर आधारित टूल्स की सहायता से पहले से ही अनुमान लगाने से इसके प्रदूषण को भी नियंत्रित किया जा सकता है औऱ पानी की गुणवत्ता को भी सुधारने का प्रयास किया जा सकता है। साथ ही पानी प्रबंधन में भी मददगार साबित होगा।
मशीन लर्निंग पर आधारित इस शोध में गंगा नदी के पिछले 15वर्षों के डेटा पर मशीन लर्निंग टेक्निक्स: आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क और सपोर्ट वेक्टर मशीन की सहायता से प्रेडक्शन और फोरकास्ट मॉडल को डिंग कर के बनाए गए जिसके परिणाम काफ़ी संतोषजनक पाए गए। इस शोध में शोध निदेशालय के अधिकारियों व शिक्षकों का भी सहयोग रहा।
