बरेली: शूटिंग के नेशनल खिलाड़ी आकाश उड़ाकर लाए बेंगलुरू से पहली फ्लाइट
बरेली, अमृत विचार। शूटिंग के नेशनल खिलाड़ी रवींद्रनगर निवासी पायलट आकाश सोलंकी बेंगलुरू-बरेली की पहली फ्लाइट बेंगलुरू से उड़ाकर बरेली लाए। आकाश अपने बड़े भाई दुबई की एमिरेट्स एयरलाइन के पायलट राघवेंद्र सोलंकी से प्रेरणा लेकर पायलट बने हैं। आकाश 2018 से इंडिगो में पायलट हैं। बेंगलुरू में तैनात आकाश ने बताया कि बेंगलुरू से …
बरेली, अमृत विचार। शूटिंग के नेशनल खिलाड़ी रवींद्रनगर निवासी पायलट आकाश सोलंकी बेंगलुरू-बरेली की पहली फ्लाइट बेंगलुरू से उड़ाकर बरेली लाए। आकाश अपने बड़े भाई दुबई की एमिरेट्स एयरलाइन के पायलट राघवेंद्र सोलंकी से प्रेरणा लेकर पायलट बने हैं। आकाश 2018 से इंडिगो में पायलट हैं।
बेंगलुरू में तैनात आकाश ने बताया कि बेंगलुरू से करीब 8:40 बजे फ्लाइट 161 यात्रियों को लेकर बरेली के लिए उड़ी और 11:27 बजे एयरफोर्स के रन-वे पर लैंड हुई। बेंगलुरू से बरेली आने में 2:47 घंटे लगे। उनके साथ साथी पायलट बेंगलुरू के ही राजाराम चंद्रन रहे। फ्लाइट में छह क्रू मेंबर भी थे।
आकाश बताते हैं कि फ्लाइट में ज्यादातर यात्री बरेली व इसके आसपास के ही थे। आकाश ने बीबीएल पब्लिक स्कूल से पढ़ाई की है। अपने बड़े भाई को पायलट बनने के बाद दिल में पायलट बनने की इच्छा जागृत करते रहे। आकाश के पिता चन्द्रभान सिंह रेलवे से सेवानिवृत्त हैं। दोनों बेटों की शिक्षा में उनका बड़ा योगदान है।
यूथ ओलंपिक गेम्स का ट्रायल भी दे चुके हैं आकाश
आकाश ने सिर्फ कैरियर ही नहीं बल्कि खेल जगत में भी ऊंचाइयों को छुआ है। आकाश शूटिंग के नेशनल खिलाड़ी भी हैं एवं यूथ ओलंपिक गेम्स का ट्रायल भी दे चुके हैं। आकाश फ्लाईंग को अपना कैरियर एवं शूटिंग को अपना टारगेट मानते हैं। आकाश युवाओं को संदेश देना चाहते हैं कि सक्सेस की परिभाषा सिर्फ कैरियर ही नहीं, बल्कि अच्छे छात्र, अच्छे मित्र एवं अच्छे नागरिक बनना भी है।
बेंगलुरू फ्लाइट ने दिलों की दूरियां कम कर उन्हें जोड़ा भी है: आकाश
पायलट आकाश बताते हैं कि बेंगलुरू से फ्लाइट शुरू होने का बहुत लाभ मिला है। वह भी दूरी ज्यादा होने से कम ही घर आ पाते थे। शनिवार को जो पहली फ्लाइट बरेली आयी, उसमें कई ऐसे यात्री थे जो अपने परिवार से मिलने बेंगलुरू गए थे। बरेली के ही एक व्यक्ति बेंगलुरू में कार्यरत हैं, उनकी पत्नी उनसे मिलकर बरेली लौंटी। एक दंपति भी परिवार से मिलकर इसी फ्लाइट से आयीं। एयरफोर्स परिसर में फ्लाइट की लैंडिंग के बाद उन्हें यात्रियों से ज्यादा बात करने का समय नहीं मिला। कुछ यात्रियों से ही बात हुई। बेंगलुरू फ्लाइट ने दिलों की दूरियां कम कर उन्हें जोड़ा भी है।
पहली फ्लाइट से बेंगलुरू गए असजद मियां
शनिवार को बरेली एयरपोर्ट से बेंगलुरू के लिए पहली फ्लाइट रवाना हुई है। जिसमें काजी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती मोहम्मद असजद रजा खां कादरी ने भी अपना सफर शुरू किया। असजद मियां 14 से 17 अगस्त तक हैदराबाद और बेंगलुरू में ही रहेंगे।
10 मिनट देरी से पहुंचने पर छूट गयी फौजी की फ्लाइट
यहां तैनात बेंगलुरू के सैनिक सतीश ने पहली फ्लाइट से घर जाने के लिए टिकट बुक कराया था। शनिवार पूर्वाह्न करीब 11:30 बजे तक उन्हें एयरपोर्ट पहुंचना था लेकिन वह 11:40 बजे पहुंचे थे। सतीश ने इंडिगो के अधिकारियों से एंट्री कराने की गुहार की लेकिन उन्हें एंट्री नहीं मिल सकी। क्योंकि एंट्री 11:30 बजे बंद हो चुकी थी। नियमानुसार 12:30 बजे की फ्लाइट के लिए 11:30 बजे तक एंट्री करानी होती है। इंडिगो की टीम दस्तावेज जांचने के बाद यात्रियों को एंट्री देती है।
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