यूपी: साधारण बसों की बॉडी बनाने में हुआ 1 करोड़ 34 लाख का घोटाला, जानें क्या है पूरा मामला?
लखनऊ। तीन साल बाद कुंभ मेले की बस बॉडी बनाने में इस्तेमाल किए गए घटिया सामानों की जांच रिपोर्ट आ गई। जांच में परिवहन निगम मुख्यालय से जिन पंजीकृत फर्मो से सामान खरीदने के आदेश दिए थे, उन फर्मो के बजाए बिना पंजीकृत फर्मो से घटिया सामान खरीदकर बसों में लगा दिए गए। बदले में …
लखनऊ। तीन साल बाद कुंभ मेले की बस बॉडी बनाने में इस्तेमाल किए गए घटिया सामानों की जांच रिपोर्ट आ गई। जांच में परिवहन निगम मुख्यालय से जिन पंजीकृत फर्मो से सामान खरीदने के आदेश दिए थे, उन फर्मो के बजाए बिना पंजीकृत फर्मो से घटिया सामान खरीदकर बसों में लगा दिए गए। बदले में गलत तारीके से एक करोड़ 34 लाख 27 हजार रुपये का भुगतान कर दिया गया।
इन मामले में परिवहन निगम के दो अधिकारियों को दोषी ठहराया गया है। इनमें से परिवहन निगम के केंद्रीय कार्यशाला कानपुर में तैनात प्रधान प्रबंधक (प्राविधिक) रविंद्र सिंह को निलंबित किया जा चुका है। वहीं एआरएम वित्त राजकुमार निगम पर उसी अवधि के दौरान निलंबन के आदेश जारी किए गए हैं। इस पूरे में मामले में मुख्यालय के दो जीएम की जांच रिपोर्ट एमडी धीरज साहू को सौंपी गई है।
ये आरोप लगाए गए हैं
- परिवहन निगम मुख्यालय के अनुमति के बिना टेंडर करा लिया गया
- तय कीमत और मानक के विरूद्ध बसों के घटिया सामान खरीदे गए
- अधिक कीमत पर बस बॉडी के सामान खरीदकर नुकसान पहुंचाया
- नुकसान न हो इसलिए पंजीकृत फर्मो से गलत रिकवरी कर ली गई
- पंजीकृत फर्मो का भुगतान रोककर फर्जी फर्मो को भुगतान कर दिया
बसों में ये घटिया सामान लगाए गए थे
- स्टील की पाइप की जगह ब्लैक पाइप लगा दिए
- सीटों में प्रयोग होने वाले सैंपल में फेल रैक्सीन लगा दिए
- डबल स्क्रीन ग्लास के बजाए सिंगल स्क्रीन ग्लास लगाए
- बसों में पंखें और लाइट में घटिया सामान लगाए गए
निलंबित अधिकारी को कर दिया बहाल
इस पूरे मामले के शुरूआती जांच में 27 मई 2019 को निलंबित किए गए प्रधान प्रबंधक प्राविधिक रविंद्र सिंह को प्रबंध निदेशक धीरज साहू ने बहाल कर दिया। एमडी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि जांच अधिकारी की रिपोर्ट पर निलंबन सेवा से बहाल करते हुए अनुशासनिक कार्यवाही जारी रहेंगी।
वेतनमान में दो पायदान नीचे करके मांगा जवाब
दोषी पाए गए प्रधान प्रबंधक को दंड के स्वरूप वेतनमान में दो पायदान नीचे कर दिया गया है। इस संबंध में एक नोटिस भेजकर 15 दिनों के भीतर दोषी अफसर से जवाब मांगा गया है।
लखनऊ के एआरएम वित्त भी दोषी पाए गए
तत्कालिक सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (वित्त) कानपुर कार्यशाला के आरके निगम को भी दोषी पाया गया है। वर्तमान में लखनऊ परिक्षेत्र में तैनात आरके निगम को भी 27 मई 2019 से निलंबित कर प्रधान प्रबंधक के सामान दोषी पाया गया है।
