बरेली: अफगान पर तालिबान के कब्जे से जिले में मेवा महंगा
बरेली, अमृत विचार। अफगानिस्तान में चल रहे ताजा घटनाक्रम ने जिले में मेवे की कीमतें बढ़ा दी हैं। रक्षाबंधन और दीपावली के त्योहार से ठीक पहले मेवे की आवक पर असर पड़ते ही व्यापारियों ने हर उत्पाद पर 20 फीसदी तक मूल्य बढ़ा दिए। इससे मेवे से बनने वाले अन्य उत्पादों पर भी असर देखने …
बरेली, अमृत विचार। अफगानिस्तान में चल रहे ताजा घटनाक्रम ने जिले में मेवे की कीमतें बढ़ा दी हैं। रक्षाबंधन और दीपावली के त्योहार से ठीक पहले मेवे की आवक पर असर पड़ते ही व्यापारियों ने हर उत्पाद पर 20 फीसदी तक मूल्य बढ़ा दिए। इससे मेवे से बनने वाले अन्य उत्पादों पर भी असर देखने को मिलेगा। बता दें कि अफगानिस्तान से शहर में किशमिश, अखरोट, बादाम, अंजीर, खजूर पिस्ता, अफगानी हींग, काजू व मुनक्का की सप्लाई होती है। जिले में मेवे के सात ही बड़े कारोबारी हैं।
बरेली में जम्मू कश्मीर और दिल्ली से मेवे की आपूर्ति आती है। कारोबारियों के मुताबिक अफगानिस्तान सूखे मेवे की 80 फीसदी आपूर्ति पर कब्जा रखता है। काबुल से सर्वाधिक सूखा मेवा आता है। अब वहां तालिबान के कब्जे के बाद किसानों की उपज पर खराब असर पड़ा है। उपज प्रभावित होते ही आपूर्ति नहीं हो पा रही है। दूसरी तरफ इस वक्त भारत में फेस्टिवल सीजन करीब है। रक्षाबंधन, जन्माष्टमी जैसे पर्वों पर जहां बाजारों में सूखे मेवा की मांग बढ़ जाती है।
वहीं अफगानिस्तान के ताजे घटनाक्रम के बाद वहां से आयात होने वाले सूखे मेवे की आवक पर असर पड़ा है। इससे मेवा व्यापारी भी परेशान हैं। उनका कहना है कि अभी तक जो मेवा स्टॉक में है, उससे काम चलाया जा रहा है। आने वाले त्योहार पर मेवा के दामों में और बढ़ोत्तरी देखने को मिल सकती है। इससे आम लोगों को जेब और ढीली करनी पड़ेगी।
मेवा के कई करोड़ के फंसे आर्डर
अफगान विवाद जल्द थमता नहीं दिख रहा है। कारोबारियों की माने तो त्योहारी सीजन को देखते हुए मेवा के कई करोड़ के ऑर्डर दिए गए थे। यह रुपये फंस गए हैं और माल भी नहीं मिल पाया। कानपुर, दिल्ली, आगरा, बेंगलुरु के व्यापारियों ने भी माल देने से हाथ ऊपर खड़े कर दिए हैं। इसलिए जिन थोक व्यापारियों के पास मेवा का स्टॉक है, उन्होंने मेवा पर 20 से 25 प्रतिशत की बढोत्तरी कर दी है।
अफगानिस्तान से ये चीजें आती हैं यहां
अफगानिस्तान से सूखे किशमिश, अखरोट, बादाम, अंजीर, पाइन नट, पिस्ता, सूखे खुबानी और खुबानी, चेरी, तरबूज और औषधीय जड़ी-बूटियों और ताजे फल आदि का आयात होता है। सूखे मेवे और फल तो वहां के बेहद उम्दा होते हैं। इसलिए इसके रेट भी प्रीमियम होते हैं। वहीं, भारत अफगानिस्तान को चाय, कॉफी, काली मिर्च, कपास, खिलौने, जूते और अन्य वस्तुएं भेजता है।
मेवे पहले अब
बादाम गिरी 600 850
मुनक्के 650 800
बादाम गिरी 700 1100
अंजीर 800 1000
पिस्ता 900 1200
काजू 800 9700
हींग 9000 12000
छुआरा पाकिस्तान 150-250 200-300
(नोट-सभी दाम प्रतिकिग्रा में हैं। )
अफगानिस्तान से दिल्ली के थोक बाजार में मेवा नहीं आई तो और महंगाई आएगी। अफगानिस्तान के ताजा हालात के बाद माल वहीं फंस गया है। इस वजह से मेवे के दामों में उछाल आया है। बरेली के व्यापारी दिल्ली से मेवा मंगाते हैं, जिससे दिल्ली में मेवे की किल्लत से मेवे के दामों में तेजी है। -शिव चावला, ड्राईफ्रूट कारोबारी
पिछले कुछ सालों से बेहतर क्वलिटी का मेवे की आवक हो रही थी लेकिन अब अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद किसानों पर खराब असर पड़ा है। अचानक रेट में बढ़ोत्तरी का अंदेशा कारोबारी पिछले कई दिनों से जता रहे थे। आने वाले दिनों में दिक्कत और बढ़ेगी। -संजय आनंद, ड्राईफ्रूट कारोबारी
