यूपी: यूं ही नहीं बढ़ा पावर कॉरपोरेशन पर कर्ज का बोझ, उधार की बिजली लेकर…

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लखनऊ। पावर कॉरपोरेशन पर उधार की बिजली का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। वजह यह है कि कॉरपोरेशन बकायेदारों से बिल वसूल नहीं कर पा रहा है, उल्टे उधार की बिजली लेकर उन्हें भरपूर बिजली मुहैया करा रहा है। बीती 16-17 जुलाई को कॉरपोरेशन ने अब तक की सर्वाधिक 25032 मेगावाट बिजली आपूर्ति का …

लखनऊ। पावर कॉरपोरेशन पर उधार की बिजली का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। वजह यह है कि कॉरपोरेशन बकायेदारों से बिल वसूल नहीं कर पा रहा है, उल्टे उधार की बिजली लेकर उन्हें भरपूर बिजली मुहैया करा रहा है। बीती 16-17 जुलाई को कॉरपोरेशन ने अब तक की सर्वाधिक 25032 मेगावाट बिजली आपूर्ति का रिकॉर्ड बनाया था। इससे पूर्व 30 जून को 24926 मेगावाट बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की गई थी।

पिछले करीब एक माह से प्रदेश में मांग के सापेक्ष लगभग 24 हजार मेगावाट की बिजली आपूर्ति की जा रही है। वितरण कंपनियों के प्रबंध निदेशकों व निदेशकों को नाईट पेट्रोलिंग कर सबको निर्बाध बिजली की सप्लाई उपलब्ध कराने को कहा गया है। राज्य के बिजलीघरों से करीब आठ हजार मेगावाट बिजली आपूर्ति होती है, जबकि बाकी बिजली एनटीपीसी व अन्य इकाइयों से आयात की जा रही है। वर्तमान में आयतित बिजली का करीब 20 हजार करोड रुपये बकाया चल रहा है।

एनटीपीसी व अन्य इकाइयों द्वारा उधार की बिजली का पैसा मांगा जाता है तो बिल अदा करने के बजाय आश्वासन भर दे दिया जा रहा है। केंद्रीय इकाइयां भी बकाया जमा करने का नोटिस देकर अपनी खानापूरी कर रही हैं, यही वजह है कि कॉरपोरेशन पर बकाया लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकार खुद स्वीकार कर रही है कि बिजली बिल वसूल न होने के कारण पावर कॉरपोरेशन 90,000 करोड़ रुपये के घाटे में चल रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में 75 प्रतिशत व शहरी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत बिजली उपभोक्ता बिल जमा नहीं कर रहे हैं। राजस्व वसूली का अभियान बड़े बकायेदारों के बजाय छोटे बकायेदारों तक ही सीमित रहता है। उद्योगों व ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही बिजली चोरी के खिलाफ भी प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस सिलसिले में पावर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक पंकज कुमार से फोन पर संपर्क किया गया, पर उन्होंन अपनी व्यस्तता बताकर कोई जानकारी नहीं दी।

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