यूपी: कुंभ घोटाला बनेगा भाजपा की चुनावी सांसत, घेरने में लगे विपक्षी दल

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लखनऊ। प्रयागराज कुंभ-2019 के जिस आयोजन के भव्यता और व्यवस्था पर प्रदेश सरकार इतराती है। प्रदेश का वह सबसे महंगा आयोजन अब अपने घोटाले को लेकर सवालों के घेरे में है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने इस आयोजन में वित्तीय गड़बड़ी, खराब गुणवत्ता, मनमानी कार्यप्रणाली काे उजागर किया है। जिसे लेकर सरकार …

लखनऊ। प्रयागराज कुंभ-2019 के जिस आयोजन के भव्यता और व्यवस्था पर प्रदेश सरकार इतराती है। प्रदेश का वह सबसे महंगा आयोजन अब अपने घोटाले को लेकर सवालों के घेरे में है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने इस आयोजन में वित्तीय गड़बड़ी, खराब गुणवत्ता, मनमानी कार्यप्रणाली काे उजागर किया है। जिसे लेकर सरकार पर विपक्षी दलों के हमले शुरू कर दिए हैं। जो भाजपा के लिए चुनावी सांसत बन सकता है।

इस आयोजन के लिए नगर विकास विभाग ने कुम्भ मेला अधिकारी को 2,743.60 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। जिसमें ऑडिट होने यानि जुलाई, 2019 तक 2,112 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। रिपोर्ट इसी बजट के आधार पर तैयार की गई है। मेला प्रशासन ने अन्य विभागों के काम का विवरण ही नहीं दिया। जितनी जांच कैग ने की है, उसी के अनुसार सैकड़ों करोड़ का घोटाला होने का अंदेशा है। कैग के प्रधान महालेखाकार बीके मोहंती की कुंभ संबंधी रिपोर्ट ने आते ही तहलका मचाना शुरू कर दिया है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इस घोटाले को लेकर सरकार पर हमले तेज कर दिए हैं। हालांकि इस मामले में भाजपा के प्रवक्ता कुछ कहने से सीधा इन्कार कर रहे हैं।

अस्थाई शौचालयों में 8.75 करोड़ रुपये का गोलमाल

कुंभ आयोजन के दौरान ही अस्थायी शौचालयों की खरीद को लेकर घोटाले का अंदेशा जताया गया था और इसमें एक वरिष्ठ अधिकारी की सीधी संलिप्तता चर्चा का विषय रही थी। अब कैग ने इस घोटाले पर मुहर लगा दी है। पाया गया कि एक अस्थायी शौचालय 42,000 रुपये में खरीदा गया, जबकि इसकी असल कीमत 36,500 रुपये थी। जिससे 8.75 करोड़ रुपये अधिक का फर्जी भुगतान किया गया।

मोपेड और कार से बराबर कराई मेले की जमीन

कुंभ आयोजन के लिए गंगा-यमुना तट पर जमीन बराबर करने और जमीन का विकास करने का ठेका स्वास्तिक कांस्ट्रक्शन, नारायण एसोसिएटस और मां भवानी कांस्ट्रक्शन को सौंपा गया था। जिसकी एवज में 4.43 करोड़ का बिल लगा और 3.66 करोड़ पेमेंट हो गया था। इसमें स्वास्तिक के रिकार्ड में जो 32 ट्रैक्टर दिखाए गए थे। ऑडिट परीक्षण में पाया गया कि उसमें से दो के नंबर मोटरसाइकिल, एक कार और एक मोपेड का था। सरकार ने इसे टाइपिंग की गलती बताया, लेकिन कैग ने इसे संदिग्ध माना है।

कैग ने यह पकड़ी यह बड़ी खामियां

  • कुंभ मेला अधिकारी ने अन्य विभागों के कार्यों की रिपोर्ट सीएजी की जांच एजेंसी को नहीं दी।
  • नियमविरुद्ध् तरीके से आपदा राहत कोष के 65.87 करोड़ रुपये कुम्भ मेले में खर्च कर डाले।
  • टेंट और अन्य अस्थायी निर्माण के लिए एजेंसियों ने 231.45 करोड़ रुपये के बिल जमा किए, जिसमें केवल 143.13 करोड़ रुपये देय पाए गए।
  • उचित चैनल पर विधिवत लिखापढ़ी के बगैर मेलाधिकारी ने मौखिक आदेश पर कई कार्य नियमविरुद्ध् तरीके से कराए।
  • 21.75 करोड़ रुपये में खरीदे गए टेंट और फर्नीचर का विवरण उपलब्ध नहीं है। हालांकि बिल भुगतान नहीं हुआ था।
  • 32.5 लाख रुपये में खरीदे गए 10 ड्रोन कैमरे खराब गुणवत्ता के कारण इस्तेमाल नहीं किए जा सके।
  • सड़क चौड़ीकरण कार्य के लिए उपरिव्यय प्रभार 2.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6 प्रतिशत किया गया। इससे लागत 2.68 करोड़ रुपये बढ़ गई।
  • लोक निर्माण विभाग ने जिन एलईडी लाइटों की कीमत 10,500 रुपये तय की थी, उसे नगर निगम ने 16,589 रुपये में खरीदकर भुगतान किया।
  • ठेकेदारों को आरओए के लिए छोटी गारंटी जमा करने की अनुमति देकर कुल 2.40 करोड़ रुपये का लाभ दिया गया
  • पीडब्ल्यूडी की 24 सड़कों के नमूना जांच किए गए कार्यों में से किसी के संबंध में तीनों स्तर पर निर्धारित गुणवत्ता परीक्षण नहीं किया गया था।
  • ठेकेदारों ने लैब से निर्माण का क्वालिटी टेस्ट करवाया, इसका भी प्रमाण नहीं मिला।

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