बरेली: अंक पत्र के संशोधन से विलंब से छात्रों के भविष्य से खिलवाड़
बरेली, अमृत विचार। क्षेत्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद के कार्यालय के पटल बाबुओं की लापरवाही से अनेक छात्रों के भविष्य पर संकट मंडराने लगा है। कई छात्र अंकपत्रों में संशोधन कराने के लिए दो साल से बोर्ड कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। हर बार छात्रों को बाबू कागजात अधूरे होने की बात कहकर टाल दिया …
बरेली, अमृत विचार। क्षेत्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद के कार्यालय के पटल बाबुओं की लापरवाही से अनेक छात्रों के भविष्य पर संकट मंडराने लगा है। कई छात्र अंकपत्रों में संशोधन कराने के लिए दो साल से बोर्ड कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। हर बार छात्रों को बाबू कागजात अधूरे होने की बात कहकर टाल दिया जाता है। अंकपत्र में संशोधन न होने से छात्र न तो किसी नौकरी के लिए आवेदन कर पा रहे हैं और न ही उच्च शिक्षा के लिए कहीं बाहर जा पा रहे हैं।
केस 1
पिता के नाम में है गड़बड़
फोटो – 31 पी 101 हमसा अकलाख , छात्रा
-शहर क्षेत्र निवासी छात्रा हमसा अकलाख दो वर्षों से अंक पत्र में पिता का नाम संशोधित कराने के लिए बोर्ड कार्यालय के चक्कर लगा रही हैं। वह जब भी बोर्ड कार्यालय जाती हैं, विभागीय पटल बाबू उन्हें और कागजात जमा कराने के लिए कह देते हैं। जबकि हमसा कई बार जरूरी कागज कार्यालय में जमा करा चुकी हैं। हमसा ने बताया कि कर्मचारी कई बार उन्हें कोरोना काल में काम बंद रहने की बात भी कह चुके हैं। जबकि कार्यालय खुले हुए कई महीने बीत चुके हैं।
केस 2
आठ बार आ चुका बोर्ड कार्यालय
फोटो – 31 पी 102 – युगांत, छात्र
-बोर्ड कार्यालय के चक्कर काट रहे बिजनौर के युगांत भी बाबुओं की कार्य शैली से परेशान हैं। इनकी 10वीं और 12वीं के अंकपत्र में नाम संशोधन होना है। इसके लिए बाबू उन्हें एक साल से चक्कर कटवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह अब तक आठ बार कार्यालय आ चुके हैं लेकिन अभी तक उनका काम नहीं हुआ। अब कर्मचारियों ने बताया कि दिल्ली स्थित फर्म में अंकपत्र छपने के लिए भेजा गया है। इसमें अब भी 2-3 माह का समय लग सकता है।
केस-3
कोरोना काल में काम ज्यादा की बात कह लौटा रहे
फोटो- 31 पी 103- रितिक राघव, छात्र
बोर्ड कार्यालय के कर्मचारियों के रवैये से परेशान चंदौसी के रितिक राघव भी 8 माह से परेशान हैं। उनके 10वीं के अंकपत्र में नाम सुधार होना है। कोरोना की दूसरी लहर से पूर्व ही उन्होंने अपने दस्तावेज कार्यालय में जमा कराए थे लेकिन अभी तक नाम संशोधन नहीं हो सका। कर्मचारी हर बार यही कह देते हैं कि बाद में दस्तावेज लेकर आना, क्योंकि कोरोना काल के बाद से काम बहुत बढ़ गया है।
अंकपत्र में संशोधन में इतना लगता है समय
-विभागीय जानकारी के मुताबिक 2016 के बाद के अंकपत्रों में संशोधन के लिए बामुश्किल 30 दिन का समय लगता है। जबकि, इससे पूर्व में जारी अंकपत्रों में सुधार के लिए 60 दिनों का समय निर्धारित किया गया है। कारण यह है कि 2016 से बाद के अंकपत्र स्थानीय कार्यालय द्वारा ही संशोधित हो जाते हैं। जबकि, इसके पूर्व के अंकपत्रों में संशोधन के लिए मुख्यालय भेजा जाता है। बावजूद, छात्रों के इस काम को बाबू सालों तक लटका रहे हैं।
माध्यमिक शिक्षा परिषद के उपसचिव, क्षेत्रीय कार्यालय कांता प्रसाद का कहना है कि छात्रों की समस्याओं को प्रमुखता से दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। शिकायत आने पर तत्काल जांच कर उसका निस्तारण कराया जाएगा।
