बरेली: अनुदान ने बढ़ाया केले की खेती का रकबा और किसानों का रुझान
महिपाल गंगवार, अमृत विचार, बरेली। ‘मेरे देश की धरती सोना, उगले-उगले हीरे मोती…’ फिल्म उपकार के गाने की यह पंक्तियां किसानों की श्रम शक्ति और सरकारी मदद से साकार होती दिख रही हैं। अब परंपरागत खेती छोड़कर किसानों का केले की खेती में तेजी से रुझान बढ़ा है। परंपरागत खेती उनके लिए घाटे का सौदा …
महिपाल गंगवार, अमृत विचार, बरेली। ‘मेरे देश की धरती सोना, उगले-उगले हीरे मोती…’ फिल्म उपकार के गाने की यह पंक्तियां किसानों की श्रम शक्ति और सरकारी मदद से साकार होती दिख रही हैं। अब परंपरागत खेती छोड़कर किसानों का केले की खेती में तेजी से रुझान बढ़ा है। परंपरागत खेती उनके लिए घाटे का सौदा थी जब सरकार ने केले की खेती को लेकर प्रोत्साहित किया तो वह आमदनी में इजाफा करने में जुट गए। इससे किसानों की आय दोगुनी करने की सरकार की मंशा भी पूरी होती दिख रही है। जिला उद्यान अधिकारी ने भी केला की खेती की तरफ बढ़ते रुझान को देखते हुए शासन को लक्ष्य बढ़ाने के लिए पत्र लिखा है।
जिले में वर्तमान में छोटे-बड़े मिलाकर करीब 2300 किसान करीब 80 हेक्टेयर से अधिक भूमि में केला की खेती कर रहे हैं। दो साल पहले तक चंद किसान ही इसकी खेती करते थे लेकिन प्रधानमंत्री ने किसानों की आय दोगुनी करने का मन बनाया और किसानों को उद्यान विभाग की ओर से प्रति हेक्टेयर 30,500 रुपये का अनुदान दिया जाने लगा। जिसके बाद किसानों का रुझान तेजी से बढ़ा। उद्यान विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक बीते वित्तीय वर्ष में 10 हेक्टेयर का लक्ष्य मिला था। इस बार भी यही लक्ष्य मिला।
निर्धारित समय से पहले लक्ष्य पूरा होने और केले की खेती की तरफ बढ़ता किसानों का रुझान देख लक्ष्य बढ़ाने को शासन को पत्र भेजा है। अफसरों के मुताबिक जिले में बिथरीचैनपुर, बहेड़ी, दमखोदा, शेरगढ़ आदि स्थानों पर केले की टिश्यू कल्चर खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रगतिशील किसान सौरभ पुनिया का कहना है कि किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या उत्पाद को उचित मूल्य पर बेचने की होती है। यदि सही समय पर फसल की बिक्री होकर उसका दाम मिल जाए तो खेती से निश्चित तौर पर फायदा ही होता है।
नए कृषि कानूनों से हो रहा किसानों को लाभ
नए कृषि कानून से किसानों को लाभ यह हुआ कि व्यापारी सीधे उनकी फसल खरीद रहे हैं। सरकार केले की खेती करने वाले किसानों को पहले वर्ष में 30 हजार और दूसरे वर्ष में 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान देती है। जिले में इस समय करीब 80 हेक्टयर भूमि पर केले की खेती हो रही है। एक बीघे में करीब केले के 200 पेड़ लगाए जा सकते हैं।
प्रति एकड़ दो लाख रुपये की कमाई
किसान केले की खेती कर प्रति एकड़ लगभग दो लाख रुपये लाभ कमा रहे हैं। यह 14 महीने की फसल है। नया कृषि कानून बनने के बाद अब किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए नया बाजार भी मिला है। व्यापारी सीधे उनसे संपर्क कर माल खरीद रहे हैं जिससे उनको अपनी फसल बेचने के लिए मंडियों के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ रहे हैं।
जब से सरकारी अनुदान मिलना शुरू हुआ है तब से किसानों का केले की खेती की ओर रुझान तेजी के साथ बढ़ा है। इस बार तो लक्ष्य बढ़ाकर भेजने के लिए शासन को पत्र लिखा है। केला की खेती से जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है और सह फसली खेती का लाभ भी लिया जा सकता है। -पुनीत पाठक, जिला उद्यान अधिकारी
