बरेली: किसानों ने रणनीति बनाने को इटौआ माफी में दिखायी एकजुटता
बरेली, अमृत विचार। बीडीए के रामगंगानगर परियोजना के विस्तारीकरण के लिए जमीनें अधिग्रहण करने की तैयारी को लेकर 12 गांवों के किसानों में आक्रोश बढ़ रहा है। 31 अगस्त को तय बैठक में कमिश्नर से मुलाकात नहीं होने से गुस्साए किसानों ने आंदोलन तेज कर दिया है। बुधवार को किसानों ने इटौआ माफी गांव में …
बरेली, अमृत विचार। बीडीए के रामगंगानगर परियोजना के विस्तारीकरण के लिए जमीनें अधिग्रहण करने की तैयारी को लेकर 12 गांवों के किसानों में आक्रोश बढ़ रहा है। 31 अगस्त को तय बैठक में कमिश्नर से मुलाकात नहीं होने से गुस्साए किसानों ने आंदोलन तेज कर दिया है। बुधवार को किसानों ने इटौआ माफी गांव में साप्ताहिक बाजार स्थल पर पंचायत बुलायी। जिसमें किसानों ने साफ कहा कि वे अपनी जमीन को किसी भी कीमत पर नहीं देंगे। पंचायत में भारतीय मजदूर किसान संगठन राष्ट्रवादी और किसान एकता संघ समेत कई संगठनों के तमाम नेता भी पहुंचे। नेताओं ने भी किसानों के साथ होने की बात कही।
एक किसान ने कहा कि अगर बीडीए ने जबरन जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया तो कमिश्नरी में आत्मदाह कर लेंगे। पंचायत में भारतीय मजदूर किसान संगठन राष्ट्रवादी के प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना लाल, किसान एकता संघ के प्रदेश अध्यक्ष रवि नागर और सपा नेता मनोहर सिंह पटेल ने एक सुर में कहा कि हम एक भी इंच जमीन बीडीए को नहीं देने देंगे। चाहें हमें जो भी करना पड़े। इस मामले को लेकर 24 अगस्त को किसानों ने प्रदर्शन करते हुए कमिश्नरी का घेराव किया था।
कमिश्नर ने किसानों के साथ 31 अगस्त को बैठक करने की तारीख तय की थी मगर 31 अगस्त को किसानों से कमिश्नर नहीं मिले। इस पर किसानों में आक्रोश फैला और कई घंटे तक कमिनरी में हंगामा किया था। इसी मामले को लेकर किसानों ने बुधवार को पंचायत कर आगे की रणनीति तैयार की है। बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में किसान आज फिर कमिश्नरी का घेराव कर सकते हैं। बता दें बीडीए रामगंगा आवासीय योजना के विस्तार के लिए 12 गांवों के किसानों की जमीनों को सहमति के आधार पर अधिग्रहण करने की तैयारी कर रहा है।
150 किसानों ने अभी तक नहीं लिया मुआवजा
बरेली विकास प्राधिकरण ने रामगंगानगर परियोजना को बसाने के लिए 750 किसानों की करीब 259 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की थी। इसमें चंद्रपुर बिचपुरी, डोहरिया, अहरौला और मोहनपुर उर्फ रामनगर गांव शामिल थे। विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय के अधिकारी बताते हैं कि अभी तक 150 से अधिक किसानों ने मुआवजा नहीं लिया है। करीब 36 करोड़ रुपये कोषागार में जमा है। किसानों से कई बार मुआवजा बांटने के प्रयास किए लेकिन वे नहीं आ रहे हैं। वर्ष 2004 में जमीनें अधिग्रहण की गयी थी।
बड़ा बाईपास: 400 किसानों ने अभी तक नहीं लिया है मुआवजा
बड़ा बाईपास का निर्माण करने के लिए किसानों के साथ बड़ा धोखा हुआ था। कुछ को मोटा मुआवजा तो कुछ को बहुत कम मुआवजा मिला था। 2006 में 33 गांवों के किसानों की जमीनें अधिग्रहण करने के लिए नोटिफिकेशन किया गया। नेशनल हाइवे अथारिटी ऑफ इंडिया ने जमीन पर कब्जा लेकर किसानों को मुआवजा बांटना शुरू किया। उस दौरान इमरजेंसी लगाकर जमीनें अधिग्रहण की गयीं। इसमें उप्र करार नियमावली (जिसका इसमें इस्तेमाल किया जाना था) को पूरी तरह रद्दी की टोकरी में डाला गया था।
किसानों से कोई सहमति नहीं ली गई और अधिग्रहण में शामिल 33 गांवों में मनमर्जी के आधार पर अलग-अलग रेट तय किए गए। इसमें 2000 से अधिक किसान थे जिसमें से 400 से अधिक किसानों ने अभी तक मुआवजा नहीं लिया है। इसमें से 161 किसान कोर्ट भी गए हैं। मामला कोर्ट में विचाराधीन है और कई करोड़ की रकम कोषागार में पड़ी है।
