केरल में लो इम्युनिटी से बढ़ रहा कोरोना संक्रमण: प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल
कानपुर। केरल में लगातार बढ़ रहे कोविड-19 पर कानपुर आईआईटी के प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि जो संख्या बढ़ी है, वो वहां की लो सिरो पाजिटिविटी की वजह से है। साथ ही कहा कि अभी हाल ही में जो आईसीएमआर का सर्वे हुआ था तो वहां केवल 45 फीसदी लोगों में इम्युनिटी पाई गई, …
कानपुर। केरल में लगातार बढ़ रहे कोविड-19 पर कानपुर आईआईटी के प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि जो संख्या बढ़ी है, वो वहां की लो सिरो पाजिटिविटी की वजह से है। साथ ही कहा कि अभी हाल ही में जो आईसीएमआर का सर्वे हुआ था तो वहां केवल 45 फीसदी लोगों में इम्युनिटी पाई गई, जबकि भारत का एवरेज करीब 70 फीसदी था।
वहीं, जिस भी जगह कम इम्युनिटी होगी, वहांपर संख्या बढ़ने की संभावना बनी रहती है, जो कि केरल में हो रहा है। इसीलिए केरल में दूसरी लहर का विस्तार है, अभी तीसरी लहर नहीं है। प्रो. अग्रवाल ने कहा कि केरल में उत्तर भारत जैसी स्थिति आने में अभी और समय लगेगा। जब तक वहां इम्युनिटी का स्तर बढ़कर 65 फीसदी नहीं हो जाता। इसके अलावा प्रोफेसर का कहना है कि जो हमारे पास अन्य देशों के उदाहरण हैं, जहां वैक्सीनेशन के बाबजूद जब डेल्टा वैरियंट पहुंचा तो इंफेक्शन की संख्या वहां बढ़ी है।
हालांकि इसके बाद भी ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती नहीं होना पड़ा है। इसे देखकर लगता है कि टीका चाहे पूरी प्रकार से नए संक्रमण से रक्षा न कर पाए, लेकिन हॉस्पिटलाइजेशन जैसी स्थिति नहीं आने देती। साथ ही प्रोफेसर मणीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि जिन लोगों को इंफेक्शन नहीं हुआ और उन्होंने टीकाकरण भी नहीं कराया तो उन्हें भी संक्रमण हो सकता है।
भारत में बूस्टर शॉट की आवश्यकता नहीं: प्रो. अग्रवाल
यूरोप और अमेरिका की स्थित को देखते हुए भारत को बूस्टर शॉट पर उन्होंने कहा कि अमेरिका में जो बूस्टर शॉट चल रहे हैं। उसका मुख्य कारण ये है कि वहां जो वैक्सीन प्रयोग हो रही है, वह कोरोना वायरस की डेल्टा वैरिएंट पर बहुत अधिक कारगर नहीं साबित हो रही है। इसलिए वो लोग बूस्टर शॉट लगा रहे हैं। वहां की अपेक्षा में भारत में जो वैक्सीन हैं चाहे वह को-वैक्सीन है या फिर कोविशील्ड, इनका असर वेरियंट के खिलाफ अच्छा है। उन वैक्सीन की अपेक्षा यहां पर बूस्टर शॉट की कोई चर्चा नहीं है.
