रामपुर: 72 साल का दूल्हा और 70 साल की दुल्हन, शादी में झूमे नाती-नातिन
रामपुर, अमृत विचार। जिले के भोट थाना क्षेत्र के नरखेड़ा नरखेड़ी के रहने वाले मोहम्मद शफी अहमद 72 साल के हैं और बिलासपुर क्षेत्र के गांव टांडा हुरमतनगर की रहने वाली आरफा 70 साल की हैं। दोनों ने बच्चों की रजा मंदी के बाद निकाह कर लिया। अब दोनों एक साथ रह रहे हैं। निकाह …
रामपुर, अमृत विचार। जिले के भोट थाना क्षेत्र के नरखेड़ा नरखेड़ी के रहने वाले मोहम्मद शफी अहमद 72 साल के हैं और बिलासपुर क्षेत्र के गांव टांडा हुरमतनगर की रहने वाली आरफा 70 साल की हैं। दोनों ने बच्चों की रजा मंदी के बाद निकाह कर लिया। अब दोनों एक साथ रह रहे हैं। निकाह में शफी के नाती नातिन भी नाचे और खुशियां मनाईं। यह अनोखी शादी सभी जगह चर्चा का विषय बनी हुई है।
बताया गया है कि नरखेड़ी के रहने वाले शफी अहमद करीब 24 साल पहले वीबी की मौत के बाद से अकेले थे। पांच पुत्रियां थीं, जिनका निकाह वे कर चुके थे। करीब 24 साल से अकेले छोटी सी दुकान चलाकर जिंदगी चला रहे थे। शफी अहमद को अकेले ज़िंदगी गुजारते देख बेटियों को रहा नहीं गया। खुद कमाने और खाना बनाकर खाते देख नाती और नातिनें भी नाना की ऐसी जिंदगी से दुखी होती थीं। शफी की दो पुत्रियां बिलासपुर के टांडा हुरमतनगर में ब्याही हैं।
दोनों बेटियों ने अब्बू की जिंदगी अच्छी कटने के लिए उन पर निकाह का दबाव बनाया। इसके लिए टांडा में उन्ही की तरह एक विधवा आरफा बी थीं जोकि 70 साल की हैं। वे भी अकेले जिंदगी गुजार रही थीं। पुत्रियों ने पहले आरफी बी को अपने अब्बू से निकाह करने के लिए मनाया। इसके बाद अब्बू शफी अहमद को मनाने में कामयाब हो गईं।
पहले तो शफी ने मना किया, पुत्रियों और नातिनों के दबाव में वे इनकार नहीं कर सके। शनिवार के दिन दोनों का निकाह करा दिया गया। इस निकाह में अपार खुशियां देखने को मिलीं नाती-नातिनें भी जमकर झूमें। शफी के साथ ही आरफा बी की बेटियां भी निकाह में शामिल हुईं।
बारात में आई और सभी रस्म अदायगी भी हुईं
72 और 70 साल के दंपति की अनोखी शादी के लिए बाकायदा नरखेड़ी से बारात टांडा हुरमतनगर गई और वहां बारात का स्वागत हुआ। खाना-खिलाना और दुल्हन की रुखसती भी हुई। गांव में 70 साल की दुल्हन को देखने के लिए तांता लग गया। इस अनोखी शादी के लिए आसपास के लोग भी पहुंचे। बच्चों ने जमकर डांस किया। नव दंपति की शादी से अधिक इस अनोखी शादी में लोगों में खुशी थी।
अब अकेलेपन से निजात मिलेगी : शफी
शफी अहमद का कहना है कि उनकी जिंदगी सही चल रही थी। बच्चों को अपने अब्बू का अकेलापन अच्छा नहीं लगता था। उन्हीं ने हम लोगों को एक कर दिया। इत्तेफाक से आरफी बी भी हमारी तरह ही जिंदगी जी रही थीं। अब बच्चों की जिद थी तो हम मना नहीं कर सके। अब जिंदगीभर दोनों साथ निभाएंगे। इससे हमें अकेलेपन से निजात मिलेगी।
