बरेली: जुगाड़ से करोड़ों के काम लेने वाले ठेकेदारों की अब फंसी गर्दन
बरेली, अमृत विचार। पहले जुगाड़ लगाकर करोड़ों के निर्माण कार्यों के टेंडर के लिए तीस फीसदी तक कम रेट पर काम लेने वाले ठेकेदारों की अब गर्दन फंस गई है। तमाम चेहते ठेकेदारों ने पहले अधिकारियों के संरक्षण में यह सोचकर काम तो ले लिया कि वह मनमाने तरीके से सड़क-नाली के काम कराकर खेल …
बरेली, अमृत विचार। पहले जुगाड़ लगाकर करोड़ों के निर्माण कार्यों के टेंडर के लिए तीस फीसदी तक कम रेट पर काम लेने वाले ठेकेदारों की अब गर्दन फंस गई है। तमाम चेहते ठेकेदारों ने पहले अधिकारियों के संरक्षण में यह सोचकर काम तो ले लिया कि वह मनमाने तरीके से सड़क-नाली के काम कराकर खेल कर लेंगे लेकिन उच्चाधिकारियों के पास घटिया निर्माण को लेकर पहुंची तमाम शिकायतों के बाद काफी कम रेट पर टेंडर लेने वाले ठेकेदारों के कामों को निशाने पर ले लिया गया है।
इतना ही नहीं, जांच के नाम पर गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे, इसके लिए नगर निगम के इंजीनियरों के बजाय रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिकल सर्विसेज यानी राइट्स नाम की बाहरी संस्था को जिम्मा दिया गया है। अफसरों का कहना है कि इस टीम की रिपोर्ट के आधार पर ब्लैक लिस्ट व कार्रवाई करने की चेतावनी जारी की जाएगी।
नगर निगम ने 15वें वित्त आयोग से शहर में सड़क-नाली सहित दूसरे करीब 700 निर्माण कार्यों के लिए टेंडर निकाले थे। 50 से 60 करोड़ रुपये के इन कामों को कराने के लिए निगम के कई अधिकारियों के चहेते ठेकेदारों को रेवड़ी की तरह काम दे दिया गया।
इसमें बड़ी संख्या में ऐसे ठेकेदार थे, जिन्होंने जुगाड़ लगाकर और अत्यधिक लो-कॉस्ट लगभग टेंडर के 30 फीसदी तक कम रेट तक काम ले लिए गए क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में ठेकेदारों को कई अफसरों का वरदहस्त था, इसलिए उन्होंने पहले कम रेट पर टेंडर लेकर बाद में निर्माण कार्य में खेल करने की योजना बनाई थी लेकिन इसी नीयत के साथ काम लेने वाले ठेकेदारों की गर्दन अब फंस गई हैं, क्योंकि उच्चाधिकारियों के पास सड़क-नाली के कामों में गड़बड़ी और घटिया निर्माण सामग्री के प्रयोग की लगातार शिकायतें पहुंची। इसके बाद अब ऐसे ठेकेदारों के कामों की जांच शुरू करा दी गई है, जिन्होंने काफी कम रेट पर काम लिए थे और उतनी लागत में घटिया निर्माण की संभावना बनी हुई है।
पहले चरण में ऐसे 50 कामों को सूचीबद्ध भी कर लिया गया है। इस जांच में पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए जांच में निगम की टीम को न लगाकर रेलवे की राइट्स नाम की संस्था को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इसलिए ठेकेदारों के साठगांठ कर जांच प्रभावित करने की संभावना भी काफी कम होने से उनकी गर्दनें नपती दिखाई दे रही हैं। इसे लेकर ठेकेदारों के बीच खलबली मची हुई है।
100 और कामों को देने की तैयारी कर रहा निगम
नगर निगम अभी पिछले सैकड़ों निर्माण के काम नहीं करा सका है। उस पर निगम के निर्माण विभाग ने करीब 100 और निर्माण कार्यों को शुरू कराने की तैयारी कर ली है। इसके लिए टेंडर कर दिए गए हैं। इस साल के अंत में आचार संहिता की सुगबुगाहट होने के चलते इन कामों को शुरू कराना निगम के लिए चुनौती बना है। दिक्कत यह है कि अब ठेकेदार भी नए कामों को करने से हाथ खींच रहे हैं।
मेयर के पास भी पहुंची थी बड़ी संख्या में शिकायतें
मेयर डॉ. उमेश गौतम के पास बड़ी संख्या में पार्षदों ने अपने वार्ड में कराए जा रहे निर्माण कार्यों में गड़बड़ी और मानकों के अनुरूप कार्य न कराए जाने को लेकर शिकायतें की थी। इस पर जांच के निर्देश भी दिए गए थे लेकिन तमाम पार्षदों ने बाद में ठेकेदारों से साठगांठ करके एक-एक कर अपनी शिकायतों को वापस ले लिया था।
करीब सात सौ निर्माण कार्य चल रहे हैं। साथ ही सौ और काम शुरू कराए जाने हैं। पूर्व में चल रहे निर्माण कार्यों की राइट्स संस्था जांच कर रही है। उसकी रिपोर्ट के आधार पर कोई गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई होगी। -संजय सिंह चौहान, अधिशासी अभियंता, नगर निगम
